अनुश्रुति-19 की प्राप्त प्रतिक्रियाएं:-
आदरणीय राना जी आप की त्रैमासिक पत्रिका अनुश्रुति का अंक -19 पढी पढ कर आनन्दित हुआ आप बहुत ही लगन और मेहनत से साहित्य का कार्य करते हैं आप सभी को उत्साहित करते हो मार्ग दिखाते हो में आप की किस प्रकार से बडवाई कर सकूँ मेरे पास तो वह शब्द ही नहीं हैं।
में तो ईश्वर से विनय करता हूँ करता रहूँगा आप हमेशा प्रगति करें स्वस्थ रहें सुखी रहें। इन्ही शब्दों के साथ आप को ह्रदय तल से बधाई देता हूँ 🙏🏼
-रामानंद पाठक 'नंद' नैगुवां
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आपके सतत प्रयास से बुंदेली परिष्कृत साहित्य सृजन संभव हो पा रहा है,मैं भी कुछ लिखने का प्रयास करती रहती हूं तदर्थ हार्दिक आभार, आपको व अनुश्रुति पत्रिका के साहित्य कारों को हार्दिक बधाई ।🌹🙏🏿🌹
-आशा रिछारिया निवाड़ी
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वाह बेहतरीन अनुश्रुति पत्रिका आपकी लगन कर्माता से बहुत सुंदर त्रैमासिक पत्रिका प्रकाशित की गई बहुत-बहुत बधाई ।
-शोभारामदाॅ॑गी नदनवारा
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बहुत बहुत धन्यवाद सर, आप हम लोगो का उत्साह बनाये रखते है, और हमे लिखने के लिए प्रेरित करते है! आपको शुभकामनाएं💐
-सविता मोर्य,सागर
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सभी रचनाएँ श्रेष्ठ लगीं । साहित्यिक सेवा हेतु आपको साधुवाद आ. राजीव जी 🙏💐
सुंदर पत्रिका बनी है । बधाई एवं अभिनंदन 🙏💐
-विद्या चौहान फरीदाबाद
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संकलन और संपादन दोनों लाजवाब हैं 👌
-अमर सिंह राय नौगांव
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बुंदेली भाषा के लिये आपका श्रमसाध्य अभियान अति प्रशंसनीय है - राना जी . सातत्य बना रहे .
-देवेद्र कुमार जैन , भोपाल
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सविता मौर्य,सागर दिनांक -8.6.2026
जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़ के व्हाट्स एप गुप से साभार
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*समीक्षा -
आंचलिक पत्रकारिता और ई पत्रिका ‘अनुश्रुति’
आंचलिक पत्रकारिता किसी क्षेत्र विशेष की भाषा, संस्कृति, लोकजीवन, साहित्य और सामाजिक सरोकारों को अभिव्यक्ति प्रदान करने का सशक्त माध्यम है। डिजिटल युग में स्थानीय ई-पत्रिकाओं ने इस भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाया है। बुन्देलखण्ड मे टीकमगढ़ से प्रकाशित होने वाली अनुश्रुति ई पत्रिका इसी दिशा में एक उल्लेखनीय प्रयास है। यह बुंदेली भाषा में निरंतर प्रकाशित होने वाली त्रैमासिक ई-पत्रिका है, जिसका संपादन राजीव नामदेव राना लिधौरी द्वारा किया जा रहा है। 'अनुश्रुति' का 19वाँ अंक (अप्रैल-जून 2026) प्रकाशित हो चुका है, जो इसके सतत प्रकाशन और साहित्यिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
अनुश्रुति ई पत्रिका का सबसे बड़ा योगदान यह है कि यह बुंदेली भाषा मे लेखन और प्रकाशन को मंच प्रदान करती है. वर्तमान समय में जब क्षेत्रीय बोलियाँ मुख्यधारा के मीडिया में सीमित स्थान पा रही हैं, तब ऐसी ई-पत्रिकाएँ स्थानीय भाषाई अस्मिता को सशक्त बनाती हैं। पत्रिका में बुन्देलखण्ड के कवियों, लेखकों, लोकसाहित्यकारों और नवोदित रचनाकारों की रचनाओं को स्थान मिलता है। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को पहचान मिलती है तथा क्षेत्रीय साहित्य का दस्तावेजीकरण भी होता है। बुन्देलखण्ड की लोक परंपराएँ, लोकगीत, लोककथाएँ, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक धरोहरें पत्रिका के माध्यम से पाठकों तक पहुँचती हैं। इससे सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सहायता मिलती है. ई-पत्रिका होने के कारण अनुश्रुति केवल बुन्देलखण्ड तक सीमित नहीं रहती, बल्कि देश-विदेश में बसे बुन्देली भाषा-प्रेमियों तक भी पहुँचती है. डिजिटल माध्यम क्षेत्रीय पत्रकारिता को वैश्विक पाठक वर्ग प्रदान करता है।
स्थानीय ई-पत्रिकाएँ उन विषयों को प्रमुखता देती हैं जिन्हें राष्ट्रीय मीडिया में पर्याप्त स्थान नहीं मिलता. ई पत्रिका अनुश्रुति बुन्देलखण्ड के साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पक्षों को केंद्र में रखकर आंचलिक पत्रकारिता की सार्थक भूमिका निभा रही है।
अनुश्रुति ई पत्रिका की विशेषता की बात करे तो यह बुंदेली भाषा पर केन्द्रित प्रकाशन को प्रोत्साहन तो देती ही है इसमे स्थानीय रचनाकारों की सक्रिय सहभागिता होती है, साथ ही इसमे साहित्य, संस्कृति और लोकजीवन से जुड़े गीत, कविता, और आलेख शामिल किये जाते है। इसका डिजिटल स्वरूप व्यापक प्रचार प्रसार में सहायक है. यह एक नियमित एवं निरंतर प्रकाशित होने वाली बुन्देली भाषा पत्रिका है।
गौरतलब हो कि यह पत्रिका बिलकुल निःशुल्क है। पाठक ‘अनुश्रुति’ पत्रिका को राना लिधौरी से संपर्क करके मुफ्त में इसकी पीडीएफ फाइल प्राप्त कर सकता है तथा रचनाकारों से भी प्रकाशन के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता है अर्थात राना लिधौरी जी विशुद्ध साहित्यिक सेवा कर रहे हैं जो कि साधुवाद के पात्र हैं।
अतः कह सकते है ‘अनुश्रुति’ केवल एक साहित्यिक ई-पत्रिका नहीं, बल्कि बुन्देलखण्ड की भाषा, संस्कृति और लोकचेतना की प्रतिनिधि पत्रिका के रूप में उभर रही है। आंचलिक पत्रकारिता के क्षेत्र में इसका योगदान महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्थानीय भाषा को सम्मान देती है, क्षेत्रीय साहित्य को मंच प्रदान करती है और डिजिटल युग में बुन्देली पहचान को सशक्त बनाने का कार्य कर रही है। इस दृष्टि से ‘अनुश्रुति’ ई पत्रिका आंचलिक पत्रकारिता का एक सफल और प्रेरणादायी उदाहरण है।
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*समीक्षक-विजय कुमार मेहरा*
अध्यक्ष
श्री वीरेन्द्र केशव साहित्य परिषद,टीकमगढ़
*लाइब्रेरियन*
शासकीय जिला पुस्तकालय टीकमगढ़ (म.प्र.)