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बुधवार, 11 फ़रवरी 2026

पंडवन धाम (पन्ना)- प्राकृतिक दर्शनीय स्थल

आलेख-पंडवन एक दर्शनीय एवं धार्मिक प्राकृतिक स्थल

         मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के अमानगंज तहसील के निकट सुनवानी गांव  से उडला गांव के पहले ‘पंडवन’ नामक स्थान, अपनी खूबसूरती एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थली के रूप में बहुत प्रसिद्ध हो रहा है। पंडवन में सुनार एवं व्यारमा नदी जो कि केन नदी में मिलकर एक संगम का निर्माण करती है। यहाँ पर  पानी के लगातार तेज बहाव के कारण चट्टानों पर आकर्षक कलाकृतियाँ बन गयी है जो कि देखने में बहुत ही खूबसूरत लगती हैं। 
      चट्टानों एवं बड़े पत्थरों के बीच-बीच में अनेक छोटे-बड़े प्राकृतिक कुंड़ जिन्हें स्थानीय बोली में ‘डबरा’ एवं ‘दहार’ कहा जाता है मौंजूद है, जिनमें स्वच्छ जल भरा हैं कुछ कुंड़ों की गहराई तो बीस-बीस फीट तक है। चट्टानों के ऊपर से गिरता जल एक खूबसूरत छोटे प्रपात का निर्माण करता है। यहाँ पर बरसात को छोड़कर कभी भी जाया जा सकता है। गर्मियों एवं शीतकाल में घूमने आया जा सकता है यहाँ पर घूमने का सबसे उपयुक्त समय जनवरी से मार्च तक का होता है।
        केन नदी के  मध्य भाग में ग्रेनाइट, डालोमाइट, क्वार्टजाइट, काग्लोमरेट आदि पत्थरों से बनी ये चट्टाने एवं बड़े-बड़े पत्थरों के बीच में बहती सैकड़ों जलधाराएँ यहाँ की खूबसूरती को बढ़ा देती हैं। यहाँ पर एक विशेष प्रकार के ‘सजर’ (सहजर)  नामक कीमती पत्थर भी पाये जाते हैं जिनके अंदर कुदरत की बनायी हुई अद्भुद कला कृतियांँ होती हैं। पत्थर के अंदर अनेक आड़ी-तिरछी रेखाओं से बनी संरचनाएँ देखने में बहुत ही आकर्षक लगती है जिसके कारण इन विशेष सजर कीमती पत्थरों की माँग भारत के साथ-साथ विदशों तक में है।
           अपनी जैव  विविधता के कारण केन नदी बहुत समृद्ध है। नदी के तटों पर लगभग 40 प्रकार के पेड़ एवं 30 से अधिक प्रकार की वनस्पतियाँ ,30 से अधिक प्रकार के स्तनरधारी,सरीसृप एवं लगभग 12 प्रकार की मछलियाँ पायी जाती है। पक्षियों की 60 प्रजातियाँ यहाँ देखी गयी है। अनेक प्रकार के खरपतवार, गाजर घास, लेंटाना घास, विदेशी कीकर आदि पाये जाते है। अनेक प्रकार की सीपिया, झींगुर,कछुए एवं जुगनू पाये जाते है। जानवरों में बंदर,लंगूर हिरन,सांभर,भालू नीलगाय,यिसार लोमड़ी तथा शेर तक यहाँ पाये जाते हैं। शेरों के लिए तो यह वन्य अभ्यारण बहुत ही अनूकूल पाया गया है।
     कहते है इस क्षेत्र में कुछ समय पाण्डवों ने अपना अज्ञातवास किया था। यहाँ पास में ही पाड।व जल प्रपात भी है जो कि दर्शनीय है।
      यह खूबसूरत स्थल बस कुछ ही दिनो का मेहमान है यहाँ पर केन-बेतवा लिंक परियोजना के पूरी होने पर यह क्षेत्र  डूब में आ जाने  के कारण हमेशा के लिए विलुप्त हो जायेगा।
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आलेख -राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
संपादक ‘आकांक्षा’ (हिन्दी) पत्रिका
संपादक ‘अनुश्रुति’ (बुन्देली) पत्रिका
अध्यक्ष-म.प्र लेखक संघ,टीकमगढ़
अध्यक्ष- वनमाली सृजन पीठ, टीकमगढ़
कोषाध्यक्ष-श्री वीरेन्द्र केशव साहित्य परिषद्
शिवनगर कालौनी,टीकमगढ़ (म.प्र.)