Rajeev Namdeo Rana lidhorI

मंगलवार, 15 सितंबर 2015

व्यग्ंय - ‘‘छपास को भयंकर रोग’’ (व्यंग्यकार-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’)

व्यग्ंय - ‘‘छपास को भयंकर रोग’’
            (व्यंग्यकार-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’) 
              
        वैसे तो प्रत्येक कवि व साहित्यकार को छपास का रोग होता है, किन्तु कुछ टुच्चे कवियों में इसके कीटाणु अत्याधिक मात्रा में पाये जाते हैं। ऐसे छपास रोगी कवि प्रायः हर शहर हर गाँव में आपको दो-चार की संख्या में तो देखने को मिल ही जाऐंगे। ऐसे ही हमारे शहर के एक कवि महोदय को इस ‘छपास रोग’ इस कदर लग गया कि पूछों मत।
        वे हर कवि गोष्ठी में आ ही जाते थे बस किसी प्रकार से पता भर चल जाये और कवि सम्मेलन में तो जुगाड़ कर धंस ही जाते थे और फ्री सेवा में अपने स्थानीय शहर तो शहर ,बाहर तक के शहरों तक में अपने वाहन सहित निःशुल्क उपलब्ध हो जाते थे। उसके बाद उन्हें छपास कीडा़ काटने लगता था और दूसरे दिन उन्हें अपना नाम समाचार पत्रों में पढ़ने का बेहद जनून पागलपन की हद तक सवार था।
        कभी-कभी तो कवि सम्मेलन चल ही रहा होता है और ये अपनी कविता सुनाकर उसे तुरंत ही अपने मोबाइल से केवल सामने वाले के हाथ पाँव जोड़ के अपनी फोटो खिंचवाकर उसे फेसबुक पर उधर बैठे बैठे केवल अपनी महिमा पंिडत करते हुए फोटो डाल देते है मानों पूरे कवि सम्मेलन में केवल इन्होंने ही कविता पढ़ी हों, और तो और कार्यक्रम में कौन मुख्य अतिथि है किसने,अध्यक्षता की है इससे इनको कोई मतबल नहीं, उनका नाम तक नहीं देते है और बेचारे आयोजक-संयोजक महोदय का भी आभार प्रकट करना तो दूर उसका नाम तक नहीं देते है केवल आत्म प्रशंसा अपनी कविता की चार लाइने लिख देते है और पूरे समाचार की .......कर देते है।
        कुल जमा पंूजी की अपनी वे ही दो-चार घिसीपपिटी कविता घुमाफिरा कर सुनाते और उन्हीं में से दो लाइने समाचार पत्रों में छपने को दे देते। ये वही लाइनें होती थीं जो गोल्डन जुबली,डायमंड जुबली मना चुकी होती है।
        अन्य साथी कवि तो ठीक है,समाचार लिखनेवाले पत्रकारों तक को वे लाइने कंठस्थ याद हो गयी थी, इसीलिए वे इनकी लाइने यदि उस दिन पेपर में जगह खाली रही तो छाप देते थे,
वर्ना उनकी लाइनों को केवल पढ़कर की उन्हें प्रणाम करके मुक्ति दे देते थे और उनके स्थान पर दूसरे कवि की कविता की लाइनें छाप देते है। 
            जिस दिन समाचार में उनकी लाइने आ गयी तब तो ठीक है वर्ना उस आयोजक व संयोजक की शामत आ जाती थी ये महोदय सुबह पेपर पढ़ते ही जब अपनी लाइनें नहीं देखते तो आगबबूला हो जाते और तुरंत मोबाइल से कवि गोष्ठी के संयोजक महोदय को ऐसे फटकारते जैसे इन्होंने उस कार्यक्रम के लिए मानों बहुत कुछ चंदा दिया हो वो भी सपने में क्योकि हकीकत में तो ये ‘चमड़ी जाये पर दमडी न जाये’ उक्ति के परम भक्त हैं मजाल है कि कोई इनसे कार्यक्रम के नाम से एक रूपए भी प्राप्त कर सकें। हाँ,कुछ संस्थाओं की वार्षिक सदस्यता शुल्क देने पर इन्हें बहुत अधिक अंदरूनी कष्ट पहँुचता था ,लेकिन ये देना उनकी मजबूरी थी वर्ना वार्षिक कार्यक्रम व कवि सम्मेलन इनकी दाल न गलती और फिर मंच पर आना असंभव हो जाता है।
        हाँ, तो हम बात रहे थे जिस दिन इनकी कवि महोदय की कविताओं की लाइने नहीं छपती, ये तुरंत संयोजक को मोबाइल पर हिला देते, मानों कोई भूकंप आ गया हो।
संयोजक महोदय बेचारे समझाते-समझाते थक जाते कि हमने तो आपकी लाइनें दी थीं, अब पेपरवालों ने नहीं छापा तो हम क्या करे,हो सकता है उस दिन कोई विज्ञापन मिल गया होगा और उसे छाप दिया होगा या पेपर में ज्यादा जगह नहीं होगी तो उन्होंने समाचार काटकर अपने हिसाब से कर दिया, लेकिन ‘अनपढ़ तो समझाया जा सकता है, लेकिन एक पढे लिखे मूर्ख को नहीं’ वे इतने बडे वाले मूर्ख है कि वे किसी बात को मानने को तैयार नहीं होते।
    एक बार ऐसे ही एक दिन एक कवि सम्मेलन का समाचार छपा जिसमें इनकी लाइनें अदृश्य थीं, फिर क्या था इन्होंने तुरंत मुझे मोबाइल किया, क्योंकि कार्यक्रम मेरे संयोजन में हुआ था। न हेलो न हाय,
सीधे धंाय-धांय और सीधे वाकयुद्ध शुरू, तुम पक्षपात करते हो,अपने को बहुत बड़ा समझते हो तुमने मेरा नाम क्यों नहीं दिया?,
    ऐसे ही एक अन्य छापस रोगी ने तो मुझे धमकी तक दे दी कि इस बार कुछ भी हो जाये तुम्हें संस्था का अध्यक्ष नहीं बनने देंगें। हमने भी कह दिया कि तुम भगवान नहीं आम सहमति से चुनाव होगा, अब ये बात अलग है कि इनके अलावा विरोध करने वाला दूसरा कोई नहीं है,सभी संतुष्ट है, लेकिन कहते है कि ‘खिसयाई बिल्ली खंभा ही नोंचे’ और अब यह बिल्ली बूढ़ी हो गयी है और इसकेे नाखून ही बूढ़े हो गये है लेकिन फिर भी ऐंठ नहीं गयी है। कहते है ‘रस्सी जल गयी पर ऐंठ नहीं गई’ उक्ति को चरितार्थ कर रहे है।
        आज का पेपर पढ़ा हम समझ गए कि आज फिर पागलपन का छापास दौरा पड़ा हैं फिर भी हमने अनजान होते हुए कहा-नहीं, क्यों क्या बात है। वे बोले आज फिर केवल हमारी लाइने नहीं छपी है सबकी छपी है और नाम तक गोल है। (हमनेे मन ही मन में कहा कि -तुम खुद गोल हो अर्थात शून्य हो,जीरो हो, लेकिन समझते अपने को हीरो है।) मैंने उन्हें अपनी सफाई देते हुए कहा कि भई मैंने तो सभी कि लाइने दी थी, विस्वास नहीं हो तो मेरी रिपोर्ट की फोटो कापी देख लो,बात तो उनकी समझ में आ गयी कि पेपरवाले ने ही नहीं छापा है, लेकिन फिर वहीं जुमला दोहराया कि इस प्रमुख पेपर में मेरा नाम नहीं आता है। मैंने कहा भई दूसरे पेपरों में तो तुम्हारा नाम है दस पेपरों में से किसी एकाद में नहीं आया तो क्या गजब हो गया।
        वे फिर तैश मे आकर बोले- अरे वाह ! कैसे नहीं हो गया। यह पेपर शहर में सबसे ज्यादा पढ़ा जाता हैं (हमने मन ही मन फिर बुदबुदाते हुए कहा कि इसीलिए तो आपका नाम उसने नहीं दिया वह समझदार पत्रकार है।) मैंने कहा कि- हमने तो दिया था अब अगर उसने नहीं छापा तो इसमें मेरा क्या कसूर हैं। हो सकता उसकी तुम्हारी पिछले जनम् की दुश्मनी होगी इसलिए वह इस जनम् में तुम्हें नहीं छाप कर चुका रहा है। इतना सुनना था कि उन्होंने फौरन अपना मोबाइल काट दिया हमने भी राहत ही सांस ली, सोचा चलो,पीछा छूटा।
            -राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
                (संपादक-‘आकांक्षा’ पत्रिका)
                 अध्यक्ष-म.प्र. लेखक संघ,टीकमगढ़
                  नई चर्च के पीछे,शिवनगर कालोनी,
                     टीकमगढ़ (म.प्र.).472001                                
                    मोबाइल-9893520965

rajeev namdeo rana lidhori

रविवार, 6 सितंबर 2015

राना लिधौरी के ग़ज़ल संग्रह ‘राना का नज़राना’का हुआ विमोचन








rajeev namdeo rana lidhoriराना लिधौरी के ग़ज़ल संग्रह ‘राना का नज़राना’का हुआ विमोचन
  (आर.एस.शर्मा को मिला पं.घनश्याम दास तिवारी स्मृति सम्मान)
(म.प्र.लेखक संघ ने 201वीं राजभाषा हिन्दी पर केद्रित गोष्ठी हुई)
  टीकमगढ़//परमेश्वरीदास तिवारी के निवास पर, अद्धवर्यु मंंिदर के पास म.प्र.लेखक संघ’ टीकमगढ़ ने अपनी 201वीं गोष्ठी ‘राज भाषा हिन्दी’ पर केन्द्रित आयोजित कि जिसमें म.प्र.लेखक संघ के जिलाध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी की चैथी पुस्तक ‘राना का नज़राना’ का विमोचन किया गया। जिसकी समीक्षा पढ़ते हुए उमाशंकर मिश्र ने कहा कि राना लिधौरी साहित्य के क्षेत्र में आलरांडर है उन्होनें कविता,ग़ज़ल,दोहे,हाइकु,व्यंग्य,लघुकथाएँ आदि सभी प्रमुख विद्या पर अपनी कलम चलायी है पढ़ी इतनी कम उम्र उम्र में उन्होने से राष्टीªय स्तर पर बहुत ख्याति प्राप्त की है, राना लिधौरी कि दो ग़ज़लों की संगीतमय प्रस्तुति गीतकार वीरेन्द्र चंसौरिया द्वारा दी गयी। कार्यक्रम में, मुख्य अतिथि तंजीम बज़्में अदब के सदर जनाब इकबाल ‘फ़जा’ रहे व अध्यक्षता प.हरिविष्णु अवस्थी ने की जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में होमोपैथी के प्रसिद्ध डाॅ.नरेन्द्र कुमार जैन उपस्थित रहे। इस अवसर पर यात्रा संस्मरण व गद्य लेखन के लिए साहित्यकार आर.एस.शर्मा को ‘म.प्र. लेखक संघ’ द्वारा प.घनश्याम दास स्मृति सम्मान 2015 से सम्मानित किया गया एवं सभी संगीकारों का भी सम्मान शाल श्रीफल द्वारा किया गया।
सर्वप्रथम प.मनमोहन पाण्डेय ने सरस्वती वंदना‘ की और गीत सुनाया-
बंदर के हाथ में आ गया है बम,बच के रहना बचके रहना तुम।
परमेश्वरीदास तिवारी ने कविता पढी-    सबक सीख लो तासकंद से भूल न फिर होने पाये,
जीता हिस्सा हारे थे,कष्मीर नहीं जाने पाये।।
ग्राम नदनवारा से पधारे गीतकार शोभाराम दांगी ‘इन्दु’ ने गीत पढ़ा- देवकी माई नंद बाबा घर प्यारौ लल्ला हो गब।
                                    गाँव में हल्ला हो गब, गाँव में हल्ला हो गब,।।
ग्राम बल्देवगढ़ से पधारे कोमल चन्द्र बजाज ने पढ़ा- आदिनाथ के मुख से निकली यही हिन्दी भाषा है,
                            ऊँ नमःसिद्धेम्यः से पूजित आदि ब्राम्ह्नी ही भाषा है।।
ग्राम लखौरा से पधारे कवि गुलाब सिंह यादव ‘भाऊ’ ने पढ़ा- हिन्दी भाषा हिन्दुस्तान की जासे हिन्द महान है।
                                हिन्दी भाषा राष्ट्र बना दो हम सबकी जा जान है।।
लेखक संघ के जिलाध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने हिन्दी पर कविता सुनायी
                                हमारी शान है हिन्दी,हमारी जान है,हमारे देश की यही तो पहचान है हिन्दी।
                        हम हिन्दू है हमारा देश हिन्दुस्तान है हिन्दी।।
ग्राम बल्देवगढ़ से पधारे युवाकवि जय हिन्द ‘स्वतंत्र’ ने पढ़ा-चीखें गूंज रही क्रंदन हर ओर सुनाई देता है।
                            चलो पार्थ गाण्डीव घार,फिर कौरव दल का नाश लिखें।
मुख्य अतिथि शायर इकवाल फ़जा ने कमाल पढ़ा- शहीदों के लहु का रंग है ये,बुलंदी पर जो परचम हो गया है।।
उमाशंकर मिश्र तन्हा’ ने पढा-था प्यार अगर मुझसे इकबार तो कह देते,जज़्बात कभी दिल के मेरे यार तो कह देते।
अमिताभ गोस्वामी ने सुनाया-नेक राहों पे बस चला कीजिए,दुश्मनों से भी न जला जाए।।
दीनदयाल तिवारी ने कविता पढी-हिन्दी कर भाषा की बनी एक ही जानी मानी।
सियाराम अहिरवार ने पढ़ा-जिसकी अभिव्यक्ति में सौन्दर्यबोध का होता है,जिसके शब्द भंडार का निरंतर शोध होता है।
संगीतकार भान सिंह श्रीवास्तव ने पढ़ा-श्याम बिन मोहें न आवैं चैंन।
विजय मेहरा ने-‘भारत माता की जय’ व्यंग्य पढ़ा। सीताराम राय ने पढ़ी-हिन्दुस्तान की जीवन रेखा,हिन्दी भूल ना जईयो।
इनके आलावा प.हरिविष्णु अवस्थी,वीरेन्द्र बहादुर खरे,डाॅ.अनिता गोस्वामी,शांतिकुमार जैन,अभिनंदन गोइल,आर.एस.शर्मा, पूरनचन्द्र गुप्ता, वीरेन्द्र चंसोरिया,बी.एल.जैन, हरेन्द्रपाल सिंह,हाजी अनवर,मास्टर उम्मेद खां,सत्यम श्रीवास्तव,देशरत्न भट्ट,अवध बिहारी श्रीवास्तव,रघुवीर आनंद,अजीत श्रीवास्तव,लालजी सहाय श्रीवास्तव, आदि ने आलेख व रचनाएँ पढ़ी। गोष्ठी संचालन उमाशंकर मिश्र’ ने किया एवं सभी का आभार प्रदर्शन परमेश्वरीदास तिवारी ने किया।
  
रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’,अध्यक्ष म.प्र.लेखक संघ,टीकमगढ़,मोबाइल-9893520965,   

सोमवार, 31 अगस्त 2015

‘राना लिधौरी’ की चैiथी पुस्तक ‘राना का नज़राना’ का होगा विमोचन 6-9-2015

‘म.प्र.लेखक संघ’ की 201वीं कविगोष्ठी 6 सितम्बर को ‘राजभाषा’ पर केन्द्रित
(‘राना लिधौरी’ की चैiथी पुस्तक ‘राना का नज़राना’ का होगा विमोचन)

 टीकमगढ़//नगर की सर्वाधिक सक्रिय साहित्यिक संस्था ‘म.प्र.लेखक संघ’ टीकमगढ़ की 201वीं गोष्ठी ‘राजभाषा हिन्दी’ पर केन्द्रित होगी। यह कवि गोष्ठी रविवार 6 सितम्वर 2015 को समय दोपहर 2ः00 बजे से परमेश्वरीदास तिवारी के निवास, सराँय मोहल्ला अध्वर्यु मंदिर के पास,़ टीकमगढ़ में आयोजित की जा रही है। म.प्र.लेखक संघ की इस 201वीें गोष्ठी में इस अवसर पर राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ की चैथी पुस्तक ‘राना का नज़राना’ग्ऱज़ल संग्रह का विमोचन भी किया जायेगा तथा नगर के वरिष्ठ साहित्यकार आर एस. शर्मा को उनके यात्रा संस्मरण एवं गद्य लेखन साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया जायेगा। राना लिधौरी ने बताया कि प्रथम दौर 2 बजे से 3 बजे तक ‘संगीत’ का एवं द्वितीय दौर में 3 से 5 बजे तक ‘कवि गोष्ठी’होगी। जानकारी म.प्र.लेखक संघ के जिलाध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ एवं परमेश्वरी दास तिवारी ने जारी एक प्रैस विज्ञप्ति में देते हुए सभी साहित्यकारों से समय पर उपथित होने की अपील की है।
                                   
रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
     अध्यक्ष म.प्र.लेखक संघ,टीकमगढ़,
     मोबाइल-9893520965

शनिवार, 15 अगस्त 2015

‘रेड रोज़ किडूस केयर स्कूल में मनाया गया धमूधाम से स्वतंत्रता दिवस date-15-8-2015

Date-15-8-2015
देश की है शान मेरी जान तिरंगा....................राना लिधौरी

(‘रेड रोज़ किडूस केयर स्कूल में मनाया गया धमूधाम से स्वतंत्रता दिवस)
  टीकमगढ़//‘ देश की है शान मेरी जान तिरंगा,न हिन्दू,इसाई,न मुसलमान तिरंगा। झुकने न देगें हम कभी तन भी निसार है,लाखों हो गये है शाने कुरवान तिरंगा। यह कविता ख्याति प्राप्त कवि एवं म.प्र. लेखक संघ के जिला अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिघौरी’ ने 15 अगस्त को नायको के मोहल्ला के स्थित ‘रेड़ रोज़ किड्स केयर इंग्लिस मीडियम स्कूल’ के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रूप में पढ़ी। इस दौरान विद्यालय के नन्हे मुन्ने बच्चों द्वारा अनेक आकर्षक सास्ंकृतिक कार्यक्रम किये गये दहेज प्रथा पर केन्द्रित एक नाटक का भी मंचन किया गया मुख्य अतिथि राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ द्वारा बच्चों को पुरस्कार स्वरूप नगद राशि देकर उन्हें सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन मीनाक्षी दुवे मेडम ने किया तथा सभी का आभार प्रदर्शन विद्यालय के प्रबंधक राजेन्द्र रजक ने किया। इस अवसर पर पं. प्रदीप तिवारी, दशरथ प्रजापति,सरोज जैकवार,विकास नापित,कंचन सोनवानी,बंदना,प्राची दुवे,सेजल,गीतांजली,कायनात मंसूरी, रजिया खतून, मोहिनी,नीतू द्विवेदी,दीपा हरदासानी,रूचि श्रीवास्तव,मालती सेन, आदि स्टाप सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।।


   रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’,
             अध्यक्ष म.प्र.लेखक संघ,
         टीकमगढ़,मोबाइल-9893520965,   





rajeev namdeo rana lidhori

रविवार, 9 अगस्त 2015

म.प्र.लेखक संघ ने 200वीं गोष्ठी कराकर रचा इतिहास

म.प्र.लेखक संघ ने 200वीं गोष्ठी कराकर रचा इतिहास
          (‘गीत’ पर केन्द्रित हुई 200वीं गोष्ठी)
(‘बक्स्वाहा,चंदेरा,बल्देवगढ़,नदनवारा,लखौरा से पधारे कवि)

  टीकमगढ़//‘ म.प्र.लेखक संघ’ टीकमगढ़ ने 200वीं गोष्ठी आयोजित कराकर टीकमगढ़ के साहित्यिक इतिहास में एक मील का पत्थर स्थापित कर दिया है इसका सारा श्रेय संस्था के अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी एवं सचिव रामगोपाल रैकवार को जाता है जिन्हांेने संस्था को इतनी ऊँचाईयाँ प्रदान की आज टीकमगढ़ इकाई की मिशाल प्रादेशिक इकाई भोपाल द्वारा दी जाती है। यह विचार उमा शंकर मिश्र‘तन्हा’ ने व्यक्त किये।
इस अवसर पर दोहा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए म.प्र लेखक संघ ने वरिष्ठ कवि अवध बिहारी श्रीवास्तव ‘दाऊ’ को ‘दोहाश्री’ की सम्मोनोपाधि से विभूषित किया गया।
 200वीं गोष्ठी गीत’ पर केन्द्रित गायत्री शक्तिपीठ बानपुर दरवाजा में आयोजित की गयी, जिसके मुख्य अतिथि रामगोपाल रैकवार रहे व अध्यक्षता प.मनमोहन पाण्डेय ने की जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में नदनवारा से पधारे गीतकाऱ शोभाराम दांगी व वीरेन्द्र चंसौरिया रहे।
सर्वप्रथम भान सिंह श्रीवास्तव ने सरस्वती वंदना‘ की और गीत सुनाया-छैला छलिया छलन बृजनार बन गये’’
 ग्राम चंदेरा से पधारे कवि देवकी नंदन शुक्ला’ ने पढ़ा-
   भोल बम बम बम,भोले बम बम बम,
  भ्रष्टाचार की कालिख लगा गया व्यापम।।
ग्राम बक्स्वाहा से पधारे कवि बृजभूषण दुवे ’बृज’ ने सुनाया- लोक परलोक की साथ देती है गऊ माता।
ग्राम बल्देवगढ़ से पधारे कवि कोमलचन्द्र बजाज’ ने पढ़ा-
 न हम हिन्दू सिख ईसाई न जैन बौेद्ध न मुसलमान।
हम सब मानव ,मानव जाति,एक ईश्वर की है संतान।।
ग्राम नदनवारा से पधारे गीतकार शोभाराम दांगी ‘इन्दु’ ने गीत पढ़ा-
 झाँसी की रानी ने होंसला दिखाया है,
उमर की है बारी सोते को जगाया हैै।।
ग्राम लखौरा से पधारे कवि गुलाब सिंह यादव ‘भाऊ’ ने पढ़ा- मोदी मौढा भूख नंगे रये,रोटी नईयां काल खाँ।।
ग्राम बल्देवगढ़ से पधारे युवाकवि जय हिन्द ‘स्वतंत्र’ ने पढ़ा-
 जिन लोगो को अमर तिरंगा भारत का स्वीकार नहीं।
उनको भारत की धरती पर रहने का अधिकार नहीं।।
वीरेन्द्र चंसौरिया ने गीत गाया-   
प्राणों से प्यारे देश हमारे कगरने न देगे तेरी शान हम।।
रामगोपाल रैकवार ने गीत सुनाया-
पथ पे पद चिह्न कोई अभी लिखा भी नहीं,
 लक्ष्य संकेत कोई अभी दिखा भी नहीं।
लेखक संघ के जिलाध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने व्यंग्य कविता सुनायी-‘‘झण्डा ऊँचा रहे हमारा’’
    बिना नोट के काम चले न बिना सोर्स के दालगले न।
    रिश्वत का है खेल सारा झण्डा ऊँचा रहे हमारा।।
गीतकार मनमोहन पाण्डेय ने गीत पढ़ा- वह सुबह कभी तो आयेगी,जब हरियाली की साडी पहने धरती माँ मुस्कुरायेगी।।
अवध बिहारी श्रीवास्तव ने पढा -दुनिया भूल न जाना भारत के उपकारों को।
हाजी ज़फ़रउल्ला खां जफ़र ने ग़ज़ल पढी-
करता है फक्र मुल्क मिसाइलमेन के नाम पर,
उस जैसा नेक दिल तो अब इंसाल नहीं है।।
उमाशंकर मिश्र तन्हा’ ने ग़ज़ल पढ़ी-
सफेद रंग ने केशरिया,हरे व नीले रंग से कहा-
आओ हम सब मिलकर तिरंगे का  निमार्ण करे
 और सभी काले रंगों का मुँह काला करे।।
सियाराम अहिरवार ने कविता सुनायी-
हिन्द हमारा देश प्यारा हम इसकी बगिया के फूल।
दीनदयाल तिवारी ने कविता पढी-
तड़क भड़क की चकाचैंध में दौड रहे सब बेधड़क।
 पूरनचन्द्र गुप्ता ने कविता पढ़ी-
बढे चलो तुम वीरो तुम आगे भारत भूमि पुकारती।
अभिनंदन गोइल ने बुंदेली लोक कथा ‘जकडे पंख और पीर घनेरी’ सुनायी।


rajeev namdeo rana lidhori सीताराम राय ने पढा-भारत माता बुला रही।
इनके आलावा परमेश्वरीदास तिवारी,शिवचरण उटमालिया, बाबूलाल जैन, विजय कुमार मेहरा, आर.एस.शर्मा,रघुवीर आनंद,वेद प्रताप पस्तोर आदि ने भी रचनाएँ पढी।
 गोष्ठी संचालन राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने किया एवं सभी का आभार प्रदर्शन अजीत श्रीवास्तव ने किया।
 
 रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’,
अध्यक्ष म.प्र.लेखक संघ,
टीकमगढ़,
मोबाइल-9893520965,