Rajeev Namdeo Rana lidhorI

रविवार, 4 अगस्त 2019

-स्व.पन्नालाल जी नामदेव स्मृति में बुन्देली कवि सम्मेलन ने समा बाँधा Tiakamgarh date 4-8-2019
























bundel kavi sammelan
-स्व.पन्नालाल जी नामदेव स्मृति में बुन्देली कवि सम्मेलन ने समा बाँधा

डाॅ. राज गोस्वामी दतिया को मिला स्व.पन्नालाल जी नामदेव स्मृति सम्मान- 
सीताराम राय ‘सरल’ को मिला स्व. रुपाबाई नामदेव स्मृति सम्मान
(‘रांग प्वाइन्ट’’ एवं ‘‘‘आराधना’’ पुस्तक का हुआ विमोचन’)

टीकमगढ़/ स्व.पन्नालाल जी नामदेव स्मृति छटवाँ सम्मान समारोह एवं साहित्यिक संस्था म.प्र.लेखक संघ जिला इकाई टीकमगढ़ का ‘वार्षिक उत्सव’ एवं बुन्देली कवि सम्मेलन ‘आकांक्षा’ पब्लिक स्कूल,नई चर्च के पीछे,शिवनगर कालोनी, टीकमगढ़ में सम्पन्न हुआ, जिसमें ग्यारह सौ रूपए सम्मान राशि का ‘स्व.पन्नालाल जी नामदेव छटवाँ स्मृति साहित्य सम्मान-2019’ दतिया के प्रसिद्ध कवि डाॅ. राज गोस्वामी को प्रदान किया गया एवं स्व.रूपाबाई नामदेव स्मृति सम्मान-2019 टीकमगढ़ के गीतकार श्री सीताराम राय ‘सरल’को दिया गया।
इस अवसर पर श्री यदुकुल नंदन खरे बल्देवगढ़ के उपन्यास ‘रांग प्वाइंटं’ एवं श्री भारत विजय बगेरिया की पुस्तक ‘‘आराधना’’ का विमोचन किया गया। संयोजक राना लिधौरी ने बताया कि इस अवसर पर बुन्देली कवि सम्मेलन भी आयोजित किया गया। 
कवि सम्मेलन का शुभारंभ नदनवारा से आये गीतकार शोभाराम दांगी‘इन्दु ने सरस्वती बंदना के बाद पढ़ा-
पेट में बेटी कै रइ अपने बाप मताई सें मारौं ने मोय दवाई से।
ललितपुर से आये गीतकार रामस्वरूप नामदेव ‘अनुरागी’ ने पढ़ा- दिल में दर्द हुआ दर्द को छुपाया न गया,
   कोई मरहम लगाया न गया।।
दतिया से पधारे बुन्देली कवि’ डाॅ. राज गोस्वामी ने पढ़ा-  उनके बंगले का करे का कायार बखार,
बैठक में मैडम मिली चैके में श्रीमान।।
जतारा के महेन्द्र चैधरी ने पढ़ा- इंन्द्र लोक के देव विधाता भी अभिमानी भूल गये, 
राजगुरु सुशदेव भगत सिंह जग फाँसी पर झूल गये।
पृथ्वीपुर के पवन नामदेव ने पढ़ा- कभी कोई धर्म राष्ट्र से बड़ा नहीं हो सकता,
                           ये देश मेरा कभी टूट नहीं सकता।
म.प्र.लेखक संघ के अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी ने ‘गर्मी’ पर कविता पढ़ी- 
गर्मी ऐनई पर रई पसीना देय चुचाय,बिन ऐसी बिन कूलरे कछू न देह दिखाये।।
ललितपुर से आये हास्य कवि काका ललितपुरी ने पढ़ा- अंतर तो है चूहा और बिल्ली में,लखनऊ और दिल्ली में।
दतिया से पधारे बुन्देली कवि’ डाॅ.हरि कृष्ण हरि ने पढ़ा- नैनन में नैना मिलाय के, गोरी धना चली अपने मायके।
पलेरा के रविन्द्र यादव ने पढ़ा-भाषा बुन्देली सी नइयाँ, मानत काये नइयाँ।
बल्देवगढ़ के कवि कोमल चन्द्र बजाज ने पढ़ा- प्रेम की बातें है करता,झाँसा देता प्रेम का,
बलात्कार करता फँसाकर कितना गंदा आदमी।
लखौरा से पधारे कवि गुलाब सिंह यादव‘भाऊ’ ने पढ़ा- दादा खबर करें ओली की,प्यारी बोली की।
बाल कवि वेद पस्तोर ने पढ़ा- आजकल आजकल के पापा भी गजब ढा रय,
                          मम्मी से नई बतिया रय,गर्लफ्रेंड से चोंच लड़ा रय।
पृथ्वीपुर  से आये कवि दीक्षित राज घनघौरिया’ ने सुनाया-हँसकर झूल गये फाँसी पर उनको नमन हमारा है।
परमेश्वर दास तिवारी ने पढ़ा-सेवा निवृत हो गये,बदला अब किरदार, नौकर से अब हो गये खुद ही जागीदार।
हाजी जफरउल्ला खां जफर ने गजल पढ़ी- वो तो बदरावन उड़ जाते खूबई मौज में रातें।
अनवर खान ‘साहिल’ ने गजल पढ़ी-नर्म नर्म हाथों में जाने कैसा जादू है,जब भी माँ बनाती रोटियाँ महकती है।
सुधा खरे ने कविता पढ़ी- धर्म मानते बात ध्यान में रखो, पूजा जन्म की नहीं कर्म की करो।
शायर जाबिर गुल ने पढा-आई वन सँवरके वो कह दो जरा उसे टहला न कर अकेले कुँवारों के बीच में। 
रामेश्वर राय ‘परदेशी’ ने सुनाया-जात हो बलम कमावे दिल्ली, तुम बिन जो जी न माने।
गीतिका वेदिका ने पढ़ी- मैं गजल होने का दावा तो नहीं करती, इक शेर हूँ बस प्यार से सुनते रहिये।।
सियाराम अहिरवार ने सुनाया- बिन सींगन के नटवा हो गया अपने खो पैचानत नइयां।
दयाली विश्वकर्मा ने सुनाया- मोरे मन भावे बुन्देली बोली, घर घर जाके डोली।।
पूरन चन्द्र गुप्ता ने सुनाया- बदरा बरसत काये नइयाँ चले जात कुडकइयाँ।
शकील खान पढ़ा- फूल के बदले काँटे लाये कुछ जाने पहचाने लोग,
               वक्त पड़ा तो काम ना आये कुछ जाने पहचाने लोग।
इनके अलावा यदुकुल नंदन खरे बल्देवगढ़, हरिविष्णु अवस्थी,परमेश्वरीदास तिवारी,डी.पी.शुक्ला, प्रभूदयाल श्रीवास्तव,राजेन्द्र बिदुवा,वीरेन्द्र चंसौरिया ,उमा पाराशर,राज पाराशर, भारत विजय बगेरिया,डी.पी.यादव,जी.पी.शुक्ला,मनमोहन पांडे,प्रमोद गुप्ता ‘मृदुल’,अवध विहारी श्रीवास्तव आदि भी अपनी रचनाएँ एवं विचार प्रस्तुत किये। कवि सम्मेलन में राजेन्द्र अध्वर्यु, ओमप्रकाश दीक्षित, कौशल किशोर भट्ट,सरमनलाल पुरोहित,सुधीर जैन,एम.एल.पाल,महेन्द्र पोतदार,डा.नरेन्द्र जैन, सहित सैकड़ों साहित्यप्रेमियों की गरिमामय उपस्थिति रही। गोष्ठी का संचालन उमाशंकर मिश्र ने किया तथा सभी का आभार संयोजक व अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने माना।

रपट-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
संपादक- ‘आकांक्षा’ पत्रिका
जिलाध्यक्ष- म.प्र. लेखक संघ
संयोजक-पन्नालाल नामदेव स्मृति स.समिति,टीकमगढ़
टीकमगढ़ (म.प्र.)मोबाइल-9893520965
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बुधवार, 31 जुलाई 2019

स्व.पन्नालाल जी नामदेव स्मृति सम्मान समारोह 4 अगस्त 2019 को- कवि सम्मेलन

kavi sammelan Tikamgarh
स्व.पन्नालाल जी नामदेव स्मृति सम्मान समारोह 4 अगस्त 2019 को- 
कवि सम्मेलन में दतिया,झाँसी,ललितपुर से आयेगें कवि-
यदुकुल नंदन खरे की कृति ‘रांग प्वाइन्ट’’ एवं 
भारत विजय बगेरिया की पुस्तक ‘‘आराधना’’ का होगा विमोचन’
टीकमगढ़// स्व.पन्नालाल जी नामदेव स्मृति छटवाँ सम्मान समारोह एवं साहित्यिक संस्था म.प्र.लेखक संघ जिला इकाई टीकमगढ़ का ‘वार्षिक उत्सव’ एवं कवि सम्मेलन रविवार दिनांक 4 अगस्त 2019 समय दोपहर 2 बजे से ‘आकांक्षा’ पब्लिक स्कूल,नई चर्च के पीछे,शिवनगर कालोनी, टीकमगढ़ में होकर सम्पन्न होने जा रहा है। जिसमें ग्यारह सौ रूपए सम्मान राशि का ‘स्व.पन्नालाल जी नामदेव छटवाँ स्मृति साहित्य सम्मान-2019’ दतिया के प्रसिद्ध कवि डाॅ. राज गोस्वामी को प्रदान किया जायेगा एवं स्व.रूपाबाई नामदेव स्मृति सम्मान-2019 टीकमगढ़ के गीतकार श्री सीताराम राय ‘सरल’को प्रदान किया जायेगा।
इस अवसर पर श्री यदुकुल नंदन खरे बल्देवगढ़ के उपन्यास ‘रांग प्वाइंटं’ एवं श्री भारत विजय बगेरिया की पुस्तक ‘‘आराधना’’ का विमोचन किया जायेगा। सयोजक राना लिधौरी ने बताया कि इस अवसर पर कवि सम्मेलन भी आयोजित किया जा रहा है जिसमें डाॅ. राज गोस्वामी ‘दतिया’, श्री राम स्वरूप नामदेव ललितपुर, श्री बृजभूषण दुवे बक्स्वाहा, श्री हरिकृष्ण हरि दतिया, श्री शोभाराम दांगी नदनवारा, श्री महेन्द्र चैधरी जतारा, श्री के.के पाठक ललितपुर, श्री यदुकुल नंदन खरे बल्देवगढ़, श्री मातादीन यादव गुना, काका ललितपुरी ललितपुर,रविन्द्र यादव पलेरा को आमंत्रित किया है इनके अलावा स्थानीय कविगण भी अपनी प्रस्तुति देंगे। यह जानकारी कवि सम्मेलन के संयोजक व लेखक संघ के अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘‘राना लिधौरी’ ने जारी प्रैस विज्ञप्ति में दी है। 

रपट-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
संपादक- ‘आकांक्षा’ पत्रिका
जिलाध्यक्ष- म.प्र. लेखक संघ
संयोजक-पन्नालाल नामदेव स्मृति स.समिति,टीकमगढ़
टीकमगढ़ (म.प्र.)मोबाइल-9893520965
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सोमवार, 29 जुलाई 2019

वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ की ‘कथा कोश’ पर हुई कथा गोष्ठी’












वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ की ‘कथा कोश’ पर हुई कथा गोष्ठी’
Date-28-7-2019 Tikamgarh (m.p.)

टीकमगढ़// रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय एवं रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वकला एवं संस्कृति केन्द्र भोपाल द्वारा संचालित वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ की ‘‘कथा गोष्ठी’’,‘आकांक्षा’ पब्लिक स्कूल,टीकमगढ़ में आयोजित की गयी। गोष्ठी की अध्यक्षता कथाकारा गीतिका वेदिका जी ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार श्री हरिविष्णु अवस्थी जी रहे एवं विशिष्ट अतिथि के रूप के शायर  हाजी जफरउल्ला खां ‘जफ़र’ रहे।
सरस्वती बंदना कर गोष्ठी का शुभांरभ करते हुए रविन्द्र यादव ने पढा-
तुमसे बहती ज्ञान की गंगा, तुम से तन मन चंगा मंगा। माँ जय हो,मैया जय हो।
सर्वप्रथम वनमाली सृजन पीठ केन्द्र टीकमगढ़ के अध्यक्ष एवं संयोजक राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने बताया कि अब जुलाई माह से 12 साहित्यिक पत्रिकायें वनमाली सृजन केन्द्र में पढ़ने के लिए आने लगी हैं जिसमें प्रमुख रूप से हंस, वागर्थ, कथा देश, तद्भव, अक्षरा,समय के पाखी, रंग संवाद,पहले पहल, इलेक्ट्रिनिकी,आदि के साथ-साथ अनेक प्रसिद्ध लेखकों की पुस्तकंे भी पढ़ने को मिलेगी। इससे पाठकों को और भी अधिक पढ़ने को मिलेगा और वे नया सृजन कर सकेगे। टीकमगढ़ केन्द्र द्वारा एक पुस्तकालय स्थापित किया गया है,जिसमें लेखकों की पुस्तकों के अलावा वर्तमान में प्रकाशित प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकायें भी पढ़ने को मिलने लगी है। 
‘कथा मध्यप्रदेश’ कहानी खण्ड-3 की समीक्षा करते हुए पं.हरिविष्णु अवस्थी जी ने कहा कि-‘म.प्र.कथा कोश’ में संपादक ने कहानियों का चयन बहुत सोच विचार कर किया है संकलन की लगभग सभी कहानियाँ अच्छी है जो पाठकों को बाँधे रखने की शक्ति रखती है कहानियों की भाषा सहज,सरल एवं बोघगम्य है सम्पादक बधाई के पात्र है। मुझे माता चरण मिश्र की कहानी ‘शेरवानी’ बहुत पंसद आयी।
श्री अजीत श्रीवास्वत ने ‘कथा मध्यप्रदेश’ कहानी खण्ड-4 समीक्षा करते हुए कि-इसमें ‘आस पास से उठाई कहानियाँ है। इस खंड में कहानियों में विविधता भी हैं उन्होंने कहा कि महिला कथाकारों पर भी इस प्रकार का कोश निकलना चाहिए। ‘स्वीटी’ कहानी और ‘पन्ना लाल का जूता’ विशेष पसंद आयी है।
‘कथा मध्यप्रदेश’ कहानी खण्ड-4 की पाठकीय प्रक्रिया देते हुए अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने कहा कि- इस खंड में वैसे तो सभी कहानियाँ अच्छी है लेकिन मुझे राजेन्द्र चंद्र कांत राय की कहानी ‘‘गुलामों का गणतंत्र’’बहुत पसंद आयी। इनके अलावा ‘कुतुब एक्सपे्रस’,श्री विलास गुप्ते की कहानी ‘‘ ‘‘पन्नालाल के जूते ’’भी पसंद आयी। कथाआंे पर क्रमिक शोध कार्य हेतु श्री संतोष चैबे जी सहित पूरा संपादक मंडल बधाई का पात्र है।’’ 
गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहीं गीतिका वेदिका ने कहानी ‘नीलू’ कहानी सुनायी। सियाराम अहिरवार ने ‘‘अपने पैरों पर’ कहानी सुनायी। इसमें अलावा परमेश्वरी दास तिवारी,रविन्द्र यादव,विकास नापित,राजेश्वर पाराशर ‘राज’ ,श्रीमती उमा पाराशर, आदि ने भी अपने विचार रखे। गोष्ठी का संचालन अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी ने किया तथा सभी का आभार रविन्द्र यादव ने माना।
गोष्ठी के अंत में म.प्र.लेखक संघ के सक्रिय सदस्य एवं लाइब्रेरियन श्री विजय मेहरा जी के पिता श्री वनवारीलाल मेहरा के आकस्मिक निधन पर दो मिनिट का मौन रखकर सभी ने उन्हंे अपनी श्रृद्धांजलि दी। 
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-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
अध्यक्ष एवं संयोजन-वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
 टीकमगढ़ मोबाइल-9893520965
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सोमवार, 15 जुलाई 2019

म.प्र.लेखक संघ की ‘बुंदेली’’एवं पावस पर 250वीं गोष्ठी हुई Date- 14-7-2019

म.प्र.लेखक संघ की ‘बुंदेली’’एवं पावस पर 250वीं गोष्ठी हुई   Date- 14-7-2019
( परमेश्वरीदास तिवारी का हुआ सम्मान)   

टीकमगढ़// साहित्यिक संस्था म.प्र. लेखक संघ जिला इकाई टीकमगढ़ की 250वीं गोष्ठी ‘‘बुंदेली एवं पावस’ पर केन्द्रित कवि गोष्ठी ‘आकांक्षा’ पब्लिक स्कूल,शिवनगर कालोनी,टीकमगढ़ में आयोजित की गयी। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रभुदयाल श्रीवास्तव ‘पीयूष’ ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में छतरपुर से पधारे डाॅ.जगदीश रावत रहे एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में बुंदेली के सुप्रसिद्ध कवि श्री राजेन्द्र विदुआ व श्री परमेश्वरीदास तिवारी रहे।
इस अवसर पर म.प्र.लेखक संघ द्वारा श्री परमेश्वरीदास तिवारी की सेवा निवृति पर उनका शाल श्रीफल एवं सम्मान पत्र से प्रदान कर सम्मान किया गया।
सरस्वती बदंना के पश्चात वरिष्ठ गीतकार सीताराम राय ‘सरल’ tikamgarh kavi smmelanपढा-
नभ में उठी धटा घनघोर, वन में नाचे खूबई मोर। टर्र टर्र टर्राये मिइरवा पंछी करत किलोर।।
बुंदेली कवि राजेन्द्र विदुआ ने पढ़ा- हमाई कविता हमई खौ सुनार रय।बंुदेली की कविता हिन्दी में सुना रय।
म.प्र.लेखक संघ के अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी ने ‘गर्मी’ पर कविता पढ़ी- 
गर्मी ऐनई पर रई पसीना देय चुचाय,बिन ऐसी बिन कूलरे कछू न देह दिखाये।।
नदनवारा से पधारे गीतकार शोभाराम दांगी‘इन्दु’ ने पढ़ा-  एक दिन मुलिया सें कइती जब वा स्यानी भइती।
पानु की अब बचत जरूरी भरवे जब वा गइती।।
पलेरा के रविन्द्र यादव ने पढ़ा-भाषा बुन्देली सी नइयाँ, मानत काये नइयाँ।
गीतिका वेदिका ने पढ़ी-भिंजा रहा सब लोगों को बरखा वाला छंद,घर पर फिर से पड़े बहाना,हमको नहीं पंसद।
छतरपुर से पधारे वरिष्ठ कवि डाॅ. जगदीश रावत ने पढ़ा- बुन्देली बोली अनबोली, भात सबई की झोली।
ब्रज की बैन अवध की बिटिया, हिन्दी की हमजोली।।
लखौरा से पधारे कवि गुलाब सिंह यादव‘भाऊ’ ने पढ़ा- पावस रितु जा आ रई, जल की धारा अबै कहा गई।
रामेश्वर राय ‘परदेशी’ ने सुनाया-जात हो बलम कमावे दिल्ली, तुम बिन जो जी न माने।
दयाली विश्वकर्मा ने सुनाया- मोरे मन भावे बुन्देली बोली, घर घर जाके डोली।।
पूरन चन्द्र गुप्ता ने सुनाया- बदरा बरसत काये नइयाँ चले जात कुडकइयाँ।
हाजी जफरउल्ला खां जफर ने गजल पढ़ी- औढे है जफर कंबल और दांत किट की,
कश्मीरी हवा ओंसे  शबनम निकल रहा हूँ।
सियाराम अहिरवार ने पढ़ा- एकांत भाव की अंतर पीड़ा कविता में दर्शाते हैं।
चिंतन की चेतना चिड़िया के नये पंख उग आते है।
अनवर खान साहिल’ ने गजल पढ़ी- की की कि बताये तुमे तसवीर भौत हैं।
शकील खान ने पढ़ा- फिजाओं में किसने ये घोला जहर फिर जलने लगा देखो सारा शहर।
डी.पी.शुक्ला ने सुनाया- कहिना कहे कदरा तुम जईयों, जी गैलन जावे भैया वीर।
एस.आर.‘सरल’ ने सुनाया- पर्यावरण से गहरा रिस्ता मानव की समृद्धि से।
समृद्धि की खुश्बू आती मेरे वतन की मिट्टी से।।
प्रभूदयाल श्रीवास्तव ने सुनाया-ब्रज की बडी बैन बुंदेली, जैसे गुर की भेली।।
इनके अलावा परमेश्वरीदास तिवारी,रामगोपाल रैकवार, वीरेन्द्र चंसौरिया ,उमा पाराशर,भारत विजय बगेरिया भी अपनी रचनाएँ सुनायी। गोष्ठी का संचालन रामगोपाल रैकवार ने किया तथा सभी का आभार अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ने माना।

रपट-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
जिलाध्यक्ष-म.प्र. लेखक संघ,टीकमगढ़
टीकमगढ़ (म.प्र.) मोबाइल-9893520965
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शुक्रवार, 21 जून 2019

‘आकांक्षा’ वार्षिक पत्रिका अंक-14 वर्ष-14 सन्-2019 (जल विशेषांक) समीक्षक:- अजीत श्रीवास्तव


गुणात्मक समीक्षा- ‘आकांक्षा’ वार्षिक पत्रिका 

 अंक-14 वर्ष-14 सन्-2019 (जल विशेषांक)
संपादक:-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
समीक्षक:- अजीत श्रीवास्तव
प्रकाशन वर्षः- सन् 2019
प्रकाशन-म.प्र.लेखक संघ,टीकमगढ़
       सहायोग-100रु. पेज-64
निरंतर म.प्र.लेखक संघ टीकमगढ़ की संस्था द्वारा यह पत्रिका श्री राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ के संपादन में कीर्तिमान बनाये हुए है, नव अंक ‘जल विशेषांक’’ के है, यह इस जून 2019 में विमोचित होकर जल चेतना देता अंक सिद्ध हुआ है। इस कृति का समग्र अध्ययन बहुत कुछ बताता है, जो जल के गुणों का ही अद्भुद बखान काव्य एवं गद्य में हुआ है।
जल महत्व- पानी है अनमोल, कुदरत का उपकार, जल,जल तो जल है, जल महिमा, जल बिन को है, जल ही जीवन है जैसी कविताएँ रेखांकित करती है तो सवाल उठता है कि जल तत्व है क्या, इस पर भी नजर आवश्यक है-
जल तत्व क्या है-  जल जीवन की आन, जल को आज बचाना है, पानू की बचत, दो ग़ज़लें, जल क्या है?, जल की आशा, पानी की परेशानी, अगली सदी में पानी, जलाधार जैसी कवितायें खूबी से बखान करती एवं समझाईस देती हैं। जो पुरा महत्व पर पानी के लिए श्रेष्ठ रचनायें भी आई है। 
जल का शास्त्रीय रुप- पानी रखता है पानी, मानव शरीर में जल, जल का महत्व, जमुना जल, पावस गीत, बरसे अबीर, पानी,गंगा बेतवा, बदरा बरसे, जैसी श्रेष्ठ रचनायें बहुत सुंदर ढंग से इस पंचतत्व में के ‘जल’ का शास्त्रीय कार्यो का निरूपण करती हैं।
जल संरक्षण- जल को संरक्षित रखने के कई कवियों ने नूतन भावभरी रचनायें दी हैं, ‘कनक’ की ग़ज़ल, दूषित गंगा, बुन्देली गीत, दोहे पानीदार, मुक्तक जल रेत नदी बचाओ, जल संरक्षण, पर्यावरण पानी की त्रासदी, व्यंग्य पानीदार पानी, जैसी सुंदर शब्दावलियाँ हमें चेतावनी देती हुई सतर्क करती हैं।
नव जल चिंतन-  ऐसा भी नहीं है कि इस पर लोग बेखबर हो जल चिंतन हो भी रहा है तो पत्रिका में जल 
प्रबंधन के पुराधा बुन्देलखण्ड जल परियोजना, चेतावनी,बुंदेली गीत, जलावाद विश्वासघात, हम आरेछा के, राज जी का गीत,धरा,वसंत, ऐसी रचनायें जल पर चिंतन और चिंता प्रकट कर पाठकों को झंझकोरती व प्रेरित करती हैं।
स्पुट रचनायें- पत्रिका में अन्य रचनायें भी है डाॅ. रूखसाना सिद्दीकी गज़ल,हायकू, पानी, शहीदों के प्रति,धूप के टुकड़े,देशप्रेम गीत,नशा मुक्ति, गजल-गीत श्री के.के पाठक के जो पाठकों का मनोरंजन एवं जल से पृथक ध्यान  खींचतीं है। उन्हें एक रस से बाहर खींच राहत देने का भी कार्य करती हैं, यह संपादन का कौशल है।
विशिष्ट रचनायें- श्री सीताराम राय ‘सरल’ जी की 25 रचनाओं का एक परिशिष्ठ भी है जो कि एक कवि का समग्र मस्तिष्क पठन कराता है, यह बानगी लेखक/कवि का समग्र प्रस्तुत करने में सक्षम होता है। कवि की गायकी,ज्ञान, चिंतन एवं विषय प्रवेश, सोच, विशालता सब बताता है। वंदना से शुरू हो प्रकृति चित्रण, शृंगार के गीत, होरी,गणेश कँुवरि (इतिहास), बेटी बचाओ (समस्या), बुन्देलखण्ड धरती से जुड़ी रचनाओं के साथ आशावादी दृष्टिकोण की तमाम रचनायें है जो जीवन जीने की प्रेरणा देती हैं।
यह अंक तारीफे काबिल बन पड़ा है, कलेवर प्रकृति से (पत्थरों) से जीवन मुख्य पृष्ट पर बहुत कुछ कहता है, पूरी टीकमगढ़ ईकाई, सपंादक मंडल इस पत्रिका के जल अंक के लिए बाधाई के पात्र है। ऐसे अंक संग्र्रहणीय होने से दस वर्ष से अधिक उम्र तक तो संरक्षित होते ही हैं। गुणों से, सोच से, चिंतन से, गेम, संगीतिक काव्य किसे श्रेष्ठ नहीं लगता, या मन को नहीं लुभाता।
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  समीक्षक-  अजीत श्रीवास्तव
राजीव सदन, नायक मोहल्ला,
टीकमगढ़(म.प्र.) मोबाइल-8827192845

मंगलवार, 11 जून 2019

समीक्षा- ‘आकांक्षा’ वार्षिक पत्रिका अंक-14 वर्ष-14 सन्-2019 (जल विशेषांक)संपादक:-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ समीक्षक:- हरिविष्णु अवस्थी


tikamgarh
समीक्षा- ‘आकांक्षा’ वार्षिक पत्रिका 
अंक-14 वर्ष-14 सन्-2019 (जल विशेषांक)
संपादक:-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
समीक्षक:- हरिविष्णु अवस्थी
प्रकाशन वर्षः- सन् 2019 प्रकाशन-म.प्र.लेखक संघ,टीकमगढ़
मूल्यः-100रु.  पेज-64
हम हमारा विश्व समाज जल की निरंतर कम होती उपलनब्धि के विषय में चिंतित तो है किन्तु उसका ध्यान इसके कारण और निवारण की ओर नहीं है। ‘‘आकांक्षा’’ के ‘‘जल विशेषांक’’ का उद्देश्य इसी दिशा में जन मानस का ध्यान आकृष्ट करने का एक प्रशंसनीय कदम है। डाॅ. मीनाक्षी पटेरिया ने अपने लेख में ‘मानव शरीर हेतु जल की आवश्यकता’ पर अच्छा प्रकाश डाला है। 
            श्री सी.एल.नामदेव से.नि.एस.डी.ओ.जल संसाधन विभाग ने जलापूर्ति हेतु शासन द्वारा क्रियान्वित योजनाओं की असफलताओं पर प्रकाश डालते हुए परियोजनाओं के निर्माण उनके क्रियान्वयन का श्लाघनीय ब्लू प्रिंट प्रस्तुत किया। ‘जल पुरुष’ के नाम से देश-विदेश में विख्यात श्री राजेन्द्र सिंह जी द्वारा  इस दिशा में किए जा रहे कार्यो का लेखा-जोखा श्री आर.एस.शर्मा जी ने कुशलता पूर्वक प्रस्तुत किया है।
आलेख के माध्यम से किसी विषय पर कलम चलाना, आसान कार्य नहीं है। विषय के संकलन हेतु विभिन्न लेखकों/प्रकाशकों की पुस्तकों का अध्ययन,फिर उन्हें सलीके से लेख में यथा स्थान रखना, श्रम साध्य कार्य है। इसके साथ ही लेख स्थान भी अधिक घेरता हैं सरसरी से पढ़ना आज के पाठक की आदत सी बनती जा रही है। फलस्वरुप लेखक का श्रम सही अर्थो में सार्थक नहीं हो पाता। जबकि कविता के माध्यम से कम से कम शब्दों में अपनी बात पाठक के समक्ष रखी जाती है और सरसरी निगाह से पढ़ने वाले उसे सहजता से पढ़ लेते है। वह गृहण कितना करते हैं या कर पाते हैं? यह पाठक की मानसिक स्थिति पर निर्भर करता है। संभवतः इसी बात को ध्यान में रखते हुए, पत्रिका के यशस्वी सम्पादक श्री राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने पत्रिका में लिखों की तुलना में कविताओं को अधिक स्थान दिया है।
वरिष्ठ शायर हाजी ज़फ़रउल्ला खां ‘ज़फ़र’ ने अपनी कलम से सृजित ग़ज़ल के माध्यम से प्रश्न उठाते हुए पूछा है-‘‘किसी सोचा था तरसेंगे लोग पानी को। सुना रहा हूँ, मैं इस दौर की कहानी को’’ और अंत में चेतावनी देते हुए उन्होंने लिखा-‘‘आज तक समझे नहीं आब (पानी) की कीमत क्या है। देखना ताले में रक्खेंगे ‘जफर’ पानी को।’’ श्री रामगोपाल रैकवार जल संरक्षण का संदेश देते हुए कहते हैं-‘जल संरक्षण कीजिए जल जीवन का आधार’’।
 डाॅ. ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेदी लिखते-‘‘जल संरक्षण करलो प्यारे, जल को आज बचाना है। शुल्क धरा हो गयी अन्न का क्षीण हो रहा दाना है।’’ देवेन्द्र कुमार मिश्रा की प्रस्तुति-‘‘आदमी को बेपानी देखकर, पानी-पानी हो गया है पानी’’ आँखें खोलने वाली है।
  इसी प्रकार कृष्ण कुमार:‘कनक’ आवाज दे रहे है कि-‘‘जब से जल हम बहाने लगे है,ग़म स्वयं मुस्कुराने लगे है।’’ उमाशंकर मिश्र ‘तन्हा’ कहते है कि- ‘जीवन का अधार है पानी कुदरत का उपहार है पानी।’’ श्री यदुुकुल नंदन जी खरे, श्री सियाराम अहिरवार, श्री डाॅ.यू.एस.‘आनंद’, रामानंद पाठक ‘नंद’,रामनारायण साहू, गंुलाब सिंह ‘‘भाऊ’’,मातादीन यादव ‘अनुपम’,शोभाराम दांगी ‘इन्दु’,मानाराम बेनीबाल ‘सिणधरी’,आर.एस.शर्मा,राम सहाय राय,प्रमोद कुमार गुप्ता ‘मृदुल’, बी.एल. जैन‘सलिल’, शीला तिवारी, डी.पी.शुक्ला ‘सरस’, प्रेमनारायण शर्मा, सीताराम राय ‘सरल’,कोमल चन्द्र बजाज,दयाली विश्वकर्मा, की जल संबंधी रचनाएँ भी अच्छी बन पड़ी है। विस्तार भय से उनके उद्धहारण प्रस्तुत नहीं किये गए हैं।
राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ का व्यंग्य ‘अगली सदी में पानी’ आँखें खोल देने वाला है। डाॅ.रुखसाना सिद्दीकी की ग़ज़ल ‘वो मेरी नींद यार,चुरा कर चले गए’, अवध बिहारी श्रीवास्तव की शहीदों को श्रद्धांजलि, महेन्द्र चैधरी की रचना ‘गंगा की पावनता’, भूमि कुमारी विश्नोई की ‘ऋतुराज बसंत, डाॅ. राज गोस्वामी का गीत ‘आसमान में सूखे बादल, धरती, जंगलहीन’, डाॅ. आशा तिवारी की रचना ‘विश्वासघात’,भारत विजय बगैरिया का लेख सभी एक से बढ़कर एक हैं।
परिशिष्ट में सीताराम राय ‘सरल’ का संक्षिप्त परिचय एवं उनकी विभिन्न विषयों पर केन्द्रित 27 रचनाएँ दी गई है। श्री ‘सरल’ नवोदित रचनाकार हैं उन्होंने अल्प समय में ही अपनी लेखनी को पुष्टता प्रमाणित की है और काव्य जगत में अपना स्थान बनाया है। बधाई।
विभिन्न आस्वादों से परिपूर्ण ‘आंकाक्षा’ का ‘जल विशेषांक’ मननीय एवं संग्रहणीय है। पत्रिका टाइटिल पृष्ठ आकर्षक है। मुद्रण में शुचिता आकर्षक साज सज्जा आदि सभी दृष्टियों से पत्रिका उत्तम बन पड़ी है। कुशल संपादन हेतु श्री राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ बधाई के पात्र हैं इतिशुभम्।
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-हरिविष्णु अवस्थी
अध्यक्ष श्री वीरेन्द्र केशव साहित्य परिषद्
स्टेट बैंक के पास, टीकमगढ़ (म.प्र.)

सोमवार, 3 जून 2019

म.प्र.लेखक संघ की ‘पर्यावरण’’पर 249वीं गोष्ठी हुई









rajeev namdeo rana lidhori
म.प्र.लेखक संघ की ‘पर्यावरण’’पर 249वीं गोष्ठी हुई 
 ‘आकांक्षा’ पत्रिका के अंक-14 का हुआ विमोचन 

टीकमगढ़//2-6-2019 साहित्यिक संस्था म.प्र. लेखक संघ जिला इकाई टीकमगढ़ की 298वीं गोष्ठी ‘‘पर्यावरण’ पर केन्द्रित कवि गोष्ठी ‘आकांक्षा’ पब्लिक स्कूल,शिवनगर कालोनी,टीकमगढ़ में आयोजित की गयी। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार श्री हरिविष्णु अवस्थी जी ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में नदनवारा से पधारे गीतकार श्री शोभराम दांगी ‘इन्दु’ जी रहे एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में कवि सीताराम राय ‘सरल’ जी रहे।
इस अवसर पर राजीव नामदेव ‘‘राना लिधौरी’’ के संपादन में विगत 14 वर्षो से प्रकाशित होने वाली पंित्रका ‘आकांक्षा’ के नवीन अंक का विमोचन किया गया। ‘आकांक्षा’ की समीक्षा पं.हरिविष्णु अवस्थी ने पढ़ी।
वीरेन्द्र चंसौरिया ने सरस्वती वंदना कर गोष्ठी के शुभारंभ में गीत सुनाया- 
हरे पेड़ पौधे मत काटो ये धरती का शृंगार है, यही जीवन का आधार है।
वरिष्ठ गीतकार सीताराम राय ‘सरल’ ़पढा- जल बिन जा सूनी जिन्दगानी, सबने लई पहिचानी।
म.प्र.लेखक संघ के अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी ने ‘पानी’’ पर कविता पढ़ी- 
अभी तो पानी बोतलों में मिलता हंै,वो दिन दूर नहीं, जब वह इंजेक्शन से मिलेगा।
तब मेहमानों को पानी भी,पोलियो ड्रॅाप की तरह,बस दो बँूद ही मिलेगा।।
नदनवारा से पधारे गीतकार शोभाराम दांगी‘इन्दु’ ने पढ़ा- पर्यावरण प्रदूषण कठिन दौर में।
बडे़-बड़े रो रहे बीमार पौर में।।
बल्देवगढ़ से पधारे साहित्यकार’ यदुकुल नंदन खरे ने पढ़ा- लू की चपेट में झुलस रहे है।
  जीव जन्तु प्यासे मर रहे है।।
पलेरा के रविन्द्र यादव ने पढ़ा-बडे-बड़े शहरों में बड़ी  परेशानी है।
न कहीं पै छाया है, न  कहीं पे पानी है।।
गीतिका वेदिका ने पढ़ी- एक अंजुरि भर जीवन बचा है, हो न सचेत हम,कितने अचेत हम।।
लखौरा से पधारे बुंदेली कवि गुलाब सिंह यादव‘भाऊ’ ने पढ़ा- पेड़ लगाव प्रदूषण बचाओ रसवारी।
 हरि भूमि धरती भारत की बनाओ रसवारी।।
रामेश्वर राय ‘परदेशी’ ने सुनाया-घामन तपत जात गैलारै, हते रूख पैलां रे।।
दयाली विश्वकर्मा ने सुनाया- औढ़ चुनरिया लेके गगरिया जा रइ गोरी पनिया खों।
गढ़कुईया में गागर धर के हैंडपंप लगी चलावे खो।।
एस.आर.‘सरल’ ने सुनाया- पर्यावरण से गहरा रिस्ता मानव की समृद्धि से।
समृद्धि की खुश्बू आती मेरे वतन की मिट्टी से।।
प्रभूदयाल श्रीवास्तव ने सुनाया-पर्यावरण नसा नइ जावै जाँताँ बिरछा लगा लइयो।। 
इनके अलावा परमेश्वरीदास तिवारी, अजीत श्रीवास्तव,उमा पाराशर व अनुश्रुति नामदेव ने भी अपनी रचनाएँ सुनायी।
गोष्ठी का संचालन वीरेन्द्र चंसौरिया ने किया तथा सभी का आभार अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ने माना।
 
- रपट-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
जिलाध्यक्ष-म.प्र. लेखक संघ,टीकमगढ़
टीकमगढ़ (म.प्र.) मोबाइल-9893520965
                                                  E Mail-   ranalidhori@gmail.com
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