Rajeev Namdeo Rana lidhorI

सोमवार, 12 दिसंबर 2022

गिगयात (गिड़गिड़ाना) ई बुक संपादन राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'

[12/12, 7:29 AM] Amar Singh Rai Nowgang: बुन्देली दोहे, विषय - गिगयात
            दिनाँक - 12/12/2022

मदद  मँगाबो  दीन  बन, कर बिनती-सी बात।
झुक कैं करवे आजिजी,ऊखाँ कत गिगयात।।

कम करलो  कछु दायजो, इत्ती  नइँ  औकात।
मोड़ी को  दद्दा  विकट, समदी  से  गिगयात।।

करत थराई  बीनती, घिग्घी  बँध - बँध  जात।
चोरी करतन  गौ पकर, चोर  रहो  गिगयात।।

मतलब सें  गिगयात  हैं, गधा  बनाउत  बाप।
स्वारथ  के  संसार  में, सँभरे  रहियो  आप।।

चित्रकूट  आए  भरत, नर - नारी  सँग  मात।
वापस  चलने  राम सें, गिगयाने  बहु  भाँत।।

हरिश्चंद्र  राजा  बिके,  हती  सत्य  की बात।
घरनी से कर मांग की, रइ तारा  गिगयात।।

भरी  सभा  में  द्रोपदी, सबसे  रइ  गिगयात।
मोहन लज्जा राखियो,अब नइँ केउ दिखात।

मौलिक /
                       अमर सिंह राय
                        नौगांव, म. प्र.
[12/12, 8:14 AM] Pradeep Khare Patrkar Tikamgarh: *बिषय.. गिगयात*
12-12-2022
*प्रदीप खरे, मंजुल*
💐💐💐💐💐💐
1-
भुनसारे सैं रोज तौ, 
भीख माँगबे जात।
रोटन के काजैं इतै,
 द्वारे में गिगयात।
2-
जब माँ अपने लाल खौं,
खाबै खौं नहिं देत।
लाल लिपट जै माइ सैं,
गिगया पुटया लेत।।
3-
मीठी मौं निसरी घुरी,
बा के बाँके बोल।
गिगयाकें मौ सें कहै,
बाइ गाँठ जा खोल।।
4-
छाती पै फौजी सुनौ,
तुबक धरी जब तान।
 परै पाँव गिगयात रय, 
आज बगस दो जान।।
5-
गरे लिपट गिगयात ते,
कान्हा माखन चोर।
माई माखन दै दियौ, 
भूख लगी बढ़ जोर।।
*प्रदीप खरे, मंजुल*
टीकमगढ़
[12/12, 9:18 AM] Promod Mishra Just Baldevgarh: सोमवार बुंदेली दोहा दिवस
विषय ,,गिगयात,,
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गइया गिर गिरधर चरन , गिड़गिड़ात गिगयात
अब प्रमोद तांसन लगे ,नाथ जिओ नहि जात
********************************
बागेश्वर दरबार में , दीन दुखी गिगयात
भरत पैंड़ पिरमोद गय ,सुनियो बाबा बात
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ऐंड़ ठूंस दइ बखत ने ,अब प्रमोद गिगयात
सूदें हेरत ना हते , करकें विश्वा घात
******************************
नेता जी कर जोरकें, दोरन में गिगयात
धरेँ मूंढ़ गोड़न कहेँ, तुमइ पिता जी मात
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चापेँ चरन चुनाव में ,चमचा चक्कर खात
चाची चम्मच पै खड़ी ,कत प्रमोद गिगयात
******************************
भौत जलत तो काउ सें ,सब नै गव गरराट
अब प्रमोद गिगयात हैं , गुड़मुड़यानों खाट
*******************************
        ,, प्रमोद मिश्रा बल्देवगढ़,,
        ,, स्वरचित मौलिक,,
[12/12, 9:25 AM] Bhagwan Singh Lodhi Anuragi Rajpura Damoh: *बुन्देली दोहे*
भिक मंगा जब भीक खों, अनुरागी गिगयात।
दया लगत है देखकें, मन भारी हो जात।।

दुर्योधन सें पाण्डवा,उर केशव गिगयात।
पांच गांव दै दो हमें, फिर नै करबी बात।।

परे पांव  गिगयात रय, अनुरागी बन दीन।
गिनती की वोटे कड़ी,दो पोलिंग में तीन।।

जौन आदमी राम ढिंग, दोइ जौर गिगयात।
मीरा ध्रुव प्रह्लाद सी,गेल उये खुल जात।।

भगवान सिंह लोधी अनुरागी हटा दमोह
[12/12, 10:57 AM] Subhash Singhai Jatara: विषय - गिगयात 

राम नाम सब  भूल कैं , सुख में  सब  मुस्कात |
दुख की डिबियाँ जब जलै , ईसुर लौं गिगयात ||

पूत न  हौबै जौन घर  , पूरौ   घर  घबरात |
सतरा पूजत चौतरा , फिरत रात गिगयात ||

पौलें पट्टी जान गय‌  , जिनकी तनक सुभास  ||
बै  रातइ  गिगयात   हैं , आतइ  मौरे    पास ||

जौन   रुपैया लै गयै , मुड़ी  धरैं गिगयात | 
देती बेरा शेर  बन  , टरका रय  दिन रात ||

ढला चला सब दो चलन , काहै खौं गिगयात |
रखौ भरोसा राम पै , मन  से  रओ  मुस्कात ||

सुभाष सिंघई
[12/12, 11:29 AM] Rajeev Namdeo Rana lidhor: *बुंदेली दोहा-गिगयात*
*1*
#राना  तकबै  हर जगाँ ,   घुसत  मुड़ी में बात |
जीकौ परतइ काम है , बौइ   फिरत  गिगयात ||
*2*
बीदत है  जब   गट्ट तौ , निपटातइ  गिगयात |
#राना गट्ट  निनौर कैं   , फिर सेरा  बन जात ||
*3*
कामी भड़या अरु चुगल , जब-जब पकरै जात |
#राना मौखों   छोड़   दो , हात  जौर  गिगयात ||
*4*
दीन   हीन   जब  माँगतइ , फैलातइ  है  हात |
#राना  जितनौ  बन सकै , उतनौ  बै गिगयात ||
*5*
हाट बजारै जब  भडूँ  , धुतिया   तरै   दुकात |
#राना पकरी जात तब , हा -हा कर  गिगयात ||
***
*© राजीव नामदेव "राना लिधौरी" टीकमगढ़*
           संपादक- "आकांक्षा" पत्रिका
संपादक- 'अनुश्रुति' त्रैमासिक बुंदेली ई पत्रिका
जिलाध्यक्ष म.प्र. लेखक संघ टीकमगढ़
अध्यक्ष वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
नई चर्च के पीछे, शिवनगर कालोनी,
टीकमगढ़ (मप्र)-472001
मोबाइल- 9893520965
Email - ranalidhori@gmail.com
Blog-rajeevranalidhori.blogspot.com
[12/12, 12:11 PM] Dr. Devdatt Diwedi Bramlehara: 🥀 बुंदेली दोहे 🥀
     (विषय गिगयात)

अमल करें जो दौर कें,
    मानें उड़ती बात।
बे सब कच्चे कान के,
   फिर पाछें गिगयात।।

दबो हाँत पथरा तरें,
   बैठो है गिगयात।
मुखिया यैसौ कोंतकी,
    सुनें न एकउ बात।।

हीरा बाँदें गाँठ में,
 नाँय मायँ गिगयात।
मन मंदिर कौ देवता,
  काय न तोय दिखात।

ठगुवन के कय सें करी,
   सब अपनन सें घात।
जब अक्कल मारी गई,
    अब रो- रो गिगयात।।

डॉ देवदत्त द्विवेदी सरस
बड़ामलहरा छतरपुर
[12/12, 12:53 PM] Ram Sevak Pathak Hari Kinker Lalitpur: बुन्देली दोहा 
प्रदत्त विषय-गिगयात।
करत लुगाई नौकरी,तौ भौतइ इतराते।
पाॅंव दबाबै खसम तब, पइसन खौं गिगयात।।१।।
भिक मंगौं की भीर तौ, रोजउं बढ़ती जात।
हर तीरथ पै सैकरन, हात उठा गिगयात।।२।।
ठिठरें कैऊ ठंड सें, चिथरन खौं गिगयात।
कारन सें ढूॅंकें धनी, देखत औ मुस्कात।।३।।
कैऊ भूखे रो रये, कोरा बीनत खात।
फेर लेत मौं  अरबपति, जब उनसें गिगयात।।४।।
शासन तौ कत देश में, भूखौं मरत न कोउ।गिगयारय भूखे कई,कौरा मागत सोउ।।५।।
काये तुम गिगयात हौ, बिन माॅंगेंं प्रभु देत।
कीखौं का का चाउनैं, पैलउ सें लख लेत।।६।।
भिक मंगे कैऊ फिरत, गलिन गलिन गिगयात।
तौउ पेट नइं भरत है, दाॅंत काड़ रै जात।।७।।
आकें ई संसार में,धनी न सब हो जात।
मिलत नईं गिगयाय सें,ईश देत लै पात।।८।।
राम अकल दइ सबइ खौं,ऊकौ रात कमाल।
गिगयाबे पै नइं सुनत,करतइ अंत संसार।।९।।
जो ठगतइ हैं काउ खौं, जेल अंत में जात।
मार घलत जब पुलिस की, तब रोउत गिगयात।।१०।।
"हरिकिंकर" भारतश्री, छंदाचार्य
[12/12, 12:55 PM] Param Lal Tiwari Khajuraho: 1जो कोउ कर्जा लेत है, और  चुका  नहि पात!
वे मानुस गारी सुनत, औ  पाछे  गिगयात!!
2बोलत नहीं विचार कै, बिन सोचे  बक जात!
वे बेइज्जत होत हैं, औ  पाछे गिगयात 
3मानी मात पिता नहीं, जीवन  में इक बात!
द्वारे द्वारे फिर  रहे, अब मांगत गिगयात!!
4अपराधी शातिर रहे, जुरम करें दिनरात!
थाने  में ठाड़े  रहें, हाथ  जोर गिगयात!!
5पुरखन की इज्जत सकल, धूरा  में मिल जात!
चोरी  में पकरे पिटे , छूटे  हाँ गिगयात!!
परम लाल तिवारी
खजुराहो
[12/12, 2:06 PM] Jai Hind Singh Palera: #गिगयात पंर दोहे#

                    #१#
गेर गेर गिगयात बे,ऐसी करबें बात।
हर्रा लगै न फटकरी,रंग चोखौ हो जात।।

                    #२#
मूरख यार न ढूड़िये,करिये कभ‌उं न संग।
चड़ै न कारी कामरी,दूजौ कौन‌उ रंग।।

                    #३#
मूसर सें बिनती करौ,काहे खों गिगयात।
जब‌इ लेंन पै आंय बे,खांय पनैयां लात।।

                    #४#
कड़ ना पाबें गैल सें,गिर गिर कें गिगयात ।
ठगिया सनकी कांइयां,जो मांगें खैरात।।

                    #५#
बेर बेर गिगयांय जो,हस कें लेबें प्रान।
बचियौ ऐसे संग सें,पक्कौ ठगिया जान।।

#जयहिन्द सिंह जयहिन्द# 
#पलेरा जिला टीकमगढ़# 
#मो०-६२६०८८६५९६#
[12/12, 2:22 PM] Aasharam Nadan Prathvipur: पौराणिक आधार पर बुंदेली दोहे
विषय ---- गिगयात ( गिड़गिड़ाना)
(१)
छोड़ देव  लाला  हमैं , प्रान कड़े अब जात ।
बहिन कंस की पूतना  ,मोहन सैं  गिगयात।।
(२)
चौंच सिया खौं मार कैं ,जब जयंत भग जात।
माफ करौ  ना कोउ नें , खूब फिरौ  गिगयात ।।
(३)
चरण पकर  कैं  राम  के , बाली  है  गिगयात ।
सुत अंगद  के आप ही , गुरू पिता अरु मात ।।
(४)
जगत पिता  रघुनाथ जी , केवट नों  गिगयात ।
भइया  पार  उतार  दो , हो  रइ  हमें  उलात ।।
(५)
देख  रूप  हनुमान  कौ ,  लंकापति  घबरात ।
पूॅंछ- पूॅंछ  कैं  मारबैं ,  रावण दल  गिगयात ।।

आशाराम वर्मा "नादान " पृथ्वीपुर
( स्वरचित ) 12/12/2022
[12/12, 2:33 PM] Sr Saral Sir: बुन्देली दोहा  विषय- गिगयात
*********************************
जनता  के  दरबार  में, नेता  जोरत  हात।
बे दोरन-दोरन  फिरै, वोटन  खौ गिगयात।।
 
जनता ही  भगवान हैं, फुलै फुलै बे कात।
जीते पै सुनते नईं, फिर  जनता गिगयात।।

नइयां कोउ गरीब कौ,फिर रय हैं गिगयात।
नेता  उनखों  देख कै, काट  कनारौ  जात।।

लम्बे  चौड़े   बायदे,  करके  छू  हो  जात।
लाज न नेतन खौ लगें,वोटन खौ गिगयात।।

भूकन  सै  गिगयात  हैं, रये विकास बताय।
अच्छे दिन के राज में,*सरल* दीन  चिल्लाय ।।
*********************************
           एस आर सरल
              टीकमगढ़
[12/12, 2:50 PM] Prabhudayal Shrivastava, Tikamgarh: बुंदेली  दोहे   विषय गिगयात (गिड़गिड़ाना)

करम हीन के काम खों, करबे चलें न हात।
पाछें प‌इसाबांन  के ,   भगत फिरत गिगयात।।

फटफट दैबे की न‌ईं , है   मोरी  औकात।
बिटिया बारौ  आन कें, समदी  नों  गिगयात।।

रो  रो  कें  भाटे  भरे ,  तौउ  बनीं  न‌इँ  बात।
बोटन  खों  गुजरात में,  ओबेसी   गिगयात।।

नाहक परे  कुसंग में ,  चिनवा द‌इ है जात।
सदा तने रय लट्ठ  से , अब फिर रय गिगयात।।

दद्दा  बैठे  खर्च   खों ,  लरका  कब  घर आत।
आ गव बौ सब हार कें,  बाई   नों गिगयात।।

                 प्रभु दयाल श्रीवास्तव पीयूष टीकमगढ़
[12/12, 3:40 PM] Dr. Renu Shrivastava Bhopal: दोहे विषय *गिगयात*

1 रावण मारत लात है, 
  भज्जा है *गिगयात*। 
  दे दो मज्जा सीय खों, 
  बे हैं लक्ष्मी मात।। 
 
2 मोड़ा बारन के घरे, 
    समधी है *गिगयात*। 
    दान दायजो सबइ दौ, 
    मोड़ी काय सतात।। 
   
3 दुपत सुता *गिगयात* है, 
   पाँचो पति सुन लेत।
   मोरी लज्जा लूट रै, 
   दंड काय ना देत।। 

4 कछू उचक्का फिरत हैं, 
   नाय माय लुरयात।
   लगत ठुकाई जब उने, 
   सबरन सें गिगयात।। 


                     डॉ रेणु श्रीवास्तव भोपाल 
                     सादर समीक्षार्थ 🙏
                     स्वरचित मौलिक 👆
[12/12, 4:19 PM] Gokul Prasad Yadav Budera: 🌹बुन्देली दोहे विषय-गिगयात🌹
***************************
पड़बे  के  दिन  जब  हते,
                 नेक  न  मानी  बात।
अब माँगत फिर रय बिटउ,
                घरन-घरन गिगयात।।
***************************
सगी  सास  पै  दाँक  कें,
                बहू  बुजा  रइ  खुन्स।
हांत  जोर  गिगयात मइँ,
                ससुर निखट्टू मुन्स।।
***************************
पथरा  दिल  के  हैं  धनी,
              जग में  मनुस  बिलात।
जिया पसींजत ना तनक,
              जब  गरीब  गिगयात।।
***************************
हा-हा कर गिगयात रव,
                मांग बनी अभिसाप।
असुआ पोंछत लौट गव,
                दीन सुता  कौ  बाप।।
***************************
गिगयाबे  सें  नइँ  मिलत,
               कभउँ  काउयै  हक्क।
हक्क मिलत बिद्रोह सें,
              जा  कै गय  चाणक्य।।
***************************
✍️ गोकुल प्रसाद यादव नन्हींटेहरी
[12/12, 5:14 PM] Kalyan Das Sahu Prithvipur: मौका आत चुनाव कौ , माते  जू  गिगियात ।
फिर जनता गिगियात है,अटा-पटी हो जात ।।

अटक जात जब काउ की , खूब फिरै गिगियात ।
काज सटै बिसरै मनुज , फिर नइं झाँइ दिखात ।।

दुरयोधन  सें  पाण्डव , येंन  फिरै  गिगियात ।
कुलघाती  दुष्टी  बनौं , एक   न   मानी  बात ।।

औलादें गिगियात तीं , कभउँ  न  खाई  मात ।
बदल जमानौं अब गयौ , मात-पिता गिगियात ।।

औघड़दानी नाथ लौं , जो कोऊ गिगियात ।
मंसा  पूरन  होत  है , सुख सें समय बितात ।।

   ---- कल्याण दास साहू "पोषक"
      पृथ्वीपुर जिला-निवाडी़ (मप्र)

          ( मौलिक एवं स्वरचित )
[12/12, 5:57 PM] Shobha Ram Dandi 2: शोभारामदाँगी नंदनवारा जिला टीकमगढ (म प्र)१२/१२/०२२ 
 बिषय--"गिगयात(गिड़गिड़ाना)
 बुंदेली दोहा =(143)
1= पड़ा चोर पकड़े गये ,पाँउन लौ गिगयात ।
"दाँगी" माफ करें उऐ ,सला सूद दइ जात ।। 
 2=चार जनन के बीच में ,करिया जौ गिगयात ।
"दाँगी"  उए न माफ करैं, लट्ट परैं चिचयात  ।।
3= भरी सभा में दोपदी ,हात जोर गिगयात ।
लाज बचालो आनकैं ,किशन तुमइ हो भ्रात  ।।

4=दुखिया दुख में रोत है, "दाँगी" कै रय बात ।
डरौ  प्रभु के  दुआर में, हाँत जोर गिगयात  ।।

5=चरन पखारू आपके,"दाँगी" कै रय बात ।
लज्जा मोरी राखिओ , सेवक ही गिगयात ।।

6=नाक कटी जो बैन की , लाज बचालो  तात ।
भइया  सैं कहने लगी , गइ "दाँगी" गिगयात  ।।
मौलिक रचना
शोभारामदाँगी
[12/12, 6:08 PM] Brijbhushan Duby Baxswahs: दोहे
1-चीर हरन भव जात कउं,
बिगड़ी जा रई बात।
बचा सकत नइ सभासद,
दुरपद सुता गिगयात।
2-राज भरत खों देत हम,
मानत रानी बात।
वन पठवा मत रामजी,
दशरथ जू गिगयात।
3-कर्जा लद गव मूँढ़पे,
अब नई चुकत दिखात।
साव घरी मानत नही,
बृजभूषण गिगयात।
4-फूला फूली धर भगी,
दूला सें नाराज।
बृज दूला पछयात गव,
हरां हरां गिगरात।
5-चीर हरन कर लव किशन ,
मानत नइया बात।
बृज सखियां गिगयात सब,
भारी जोड़त हाथ।

बृजभूषण दुबे बृज बकस्वाहा
[12/12, 6:29 PM] Anjani Kumar Chaturvedi Niwari: बुन्देली दोहा
12 12 2022
विषय- गिगयात
***************

कपट  वेश  रावण  धरें, भीतर नइँ घुस पात।
जनक लली के सामनें,  हाथ  जोर गिगयात।।

घरबारी  के  सामने,  दोइ   टेंम  गिगयात।
हाथ जोर विनती करै,तौउ चिया नइँ पात।।

बीच सड़क पै तान कें,फिटफिटिया सन्नात।
गाड़ी  कुतिया  पै चड़ी, रै  गय  वे  टन्नात।।

चवालीस के पार भव,सबसें बौ गिगयाय।
चइयाँ मइयाँ पार दो, वउ घर में आ जाय।।

पुंगपना  खूबईं  करौ,  कभउँ  ना  गय स्कूल।
अब गिगया रय सबइ सें, माफ करौ जा भूल।।

अंजनी कुमार चतुर्वेदी श्रीकांत निवाड़ी
[12/12, 8:42 PM] Anjani Kumar Chaturvedi Niwari: बुन्देली दोहा
12 12 2022
विषय- गिगयात
***************

कपट  वेश  रावण  धरें, भीतर नइँ घुस पात।
जनक लली के सामनें,  हाथ  जोर गिगयात।।

घरबारी  के  सामने,  दोइ   टेंम  गिगयात।
हाथ जोर विनती करै,तौउ चिया नइँ पात।।

बीच सड़क पै तान कें,फिटफिटिया सन्नात। 
पुलिस जाँच में गय पकर,ठाँडे वे गिगयात।

चवालीस के पार भव,सबसें बौ गिगयाय।
चइयाँ मइयाँ पार दो, वउ घर में आ जाय।।

पुंगपना  खूबईं  करौ,  कभउँ  ना  गय स्कूल।
अब गिगया रय सबइ सें, माफ करौ जा भूल।।

अंजनी कुमार चतुर्वेदी श्रीकांत निवाड़ी

उपलब्धि

#एक_और_उपलब्धि :-

#बुंदेलखंड में #सागर_संभाग के #ग़ज़लकारों का #ग़ज़ल_साहित्य_में_योगदान :-
बिषय पर पी.एच.डी. शोधार्थी श्री अरमान अहमद  जो कि महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, छतरपुर से डां कुंजीलाल जी पटेल के निर्देशन में पूरी है।
             यह मेरा सौभाग्य है कि इसमें उन्होंने टीकमगढ़ जिले से मेरी ग़ज़लों एवं हाजी जफरउल्ला खां जफर की ग़ज़लों का उल्लेख किया है एवं मेरे ग़ज़ल संग्रह #राना_का_नज़राना को संदर्भ ग्रंथ के रूप में स्थान दिया है। आभार शुक्रिया जनाब अरमान अहमद जी
#राजीव_नामदेव #राना_लिधौरी #टीकमगढ़


रविवार, 11 दिसंबर 2022

समर्रा जिला टीकमगढ़ मप्र में सती पत्थर सतीचीरा

समर्रा जिला टीकमगढ़ मप्र में सती पत्थर सतीचीरा 
की मूर्ति के फोटो दिनांक-10-12-2022 को भ्रमण के दौरान मिली कुछ प्राचीन मूर्तियां
साथ में श्री रामगोपाल रैकवार जी एवं श्री विजय कुमार मेहरा जी टीकमगढ़

शनिवार, 10 दिसंबर 2022

बैरा (बहरा) बुंदेली दोहा संकलन ई-बुक संयोजक राजीव नामदेव 'राना लिधौरी, टीकमगढ़ (मप्र)'

91 बुंदेली दोहाप्रतियोगी -91दोहा विषय -बैरा🌹🌹
*संयोजक राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'*
*आयोजक- जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़*
********************************
प्राप्त प्रविष्ठियां :-
*1*
नेता  बोट  बटोरबे, गरौ  फार  चिचयात।
जब गरीब चिचयात सो,बे बैरा बन जात।।
*****
✍️ गोकुल प्रसाद यादव नन्हींटेहरी बुड़ेरा
*2*
बूढ़न की सेवा करौ,सबसै अरज हमाइ।
हस बै अस्सी साल के, बैरा बाप मताइ।।
***
         एस आर सरल,टीकमगढ़
*3*
खैंचत   लाओ  द्रौपदी,  दुस्सासन  सैतान।
अँदरे    गूँगे    राज   में,  बैरा  भए  सुजान।।
***
~विद्या चौहान, फरीदाबाद
*4*
पल्लौं बैरा सैं परौ ,अपनी हाँकैं बात ।
तनक काउ कि सुनैं नही, बातन नई अघात ।।
***
शोभारामदाँगी, नदनवारा
*5*

बैरा भी सुन लेत है, मन से मन की बात।
जैसे ईसुर है सुनत, भोर, सांझ औ रात ।।
***
सरस कुमार,दोह खरगापुर
*6*
दिना-सनीचर ।बुन्देली दोहा।प्रतियोगिता-९१
दयैं दौंदरा फिर रऔ, जौ बैरा चउॅं ओर।
नैक न सुनतइ काउ की, कुतिया रऔ खचोर ।।
***
-रामसेवक "हरिकिंकर"ललितपुर
*7*
काम   इसारे  में  करै ,  बैरा  समझै   बात ।
सुनबैरा सुन बात खौं,अनसुनती कर जात।।
***
आशाराम वर्मा  "नादान " पृथ्वीपुर
 *8*
बैरा  की  सत  भाँवरी, जब  उमंग  में आय।
अपनें मन की बात खों,आँखन सें समझाय।।
***
अंजनी कुमार चतुर्वेदी श्रीकांत निवाड़ी
*9*

जीवन में पाने कछू, तौ‌ बैरा बन जाव।
मीरा ध्रुव प्रह्लाद सी,नीचट लगन लगाव।।
***
भगवान सिंह लोधी "अनुरागी" हटा दमोह
*10*
मूसर मौरे भाग में,बदो सखी जौ डूँढ़।
बैरौ पा पछता रयी,खा रव मोरौ मूँढ़।
***
*प्रदीप खरे, मंजुल, टीकमगढ़
*11*
नेता सब बैरा भये, बैरी भइ सरकार।
मैंगाई पे मच रओ, घर-घर हाहाकार।।
***
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता इंदु.बडागांव झांसी उप्र.
*12*

जन राहत की रासि सब, नेता जी भर खायँ।
बैरा बौरा गाँव के,कौरा डार रमायँ।।
***
डां देवदत्त द्विवेदी, बडा मलेहरा
-13*
बैरा  सें  बैरा  मिलो,  दूरइ  सें  मुसकात। 
राम-कथा सुनबै चलो, सुख सें दिन कट जात ।।
***
- श्यामराव धर्मपुरीकर गंजबासौदा,विदिशा म.प्र.
*14*
बेरा सगरो जग बनो,बड़वै अत्याचार।
बोलो मों खोलो तनक,तवइ होय परिहार।।
***
आशा रिछारिया जिला निवाड़ी
*15*
करै अनसुनी जान कैं, नेंचे  अँखियाँ  डार।
दफ्तर  को  बाबू  करै, बैरा  सो  ब्योहार।।
***
        अमर सिंह राय, नौगांव
*16*
बैरा बैठो लेंगरें , फिर भी है चिललात।
नईं सुनत है काउ की , अपनी अपनी कात।।
***
वीरेंद्र चंसौरिया, टीकमगढ़
*17*
गूँगन के दरबार में,बैरा हूँका देत।      
रखबैया है आँदरो,ढोर उजारें खेत।।
    ***    
*संजय श्रीवास्तव* मवई ,(दिल्ली)
*18*
जितै धिगानौं हौ मचौ  , हौवें  बत बड़़याव |
बैरा बनकै  तब उतै  , तनक  चिमाने  राव ||
***
-सुभाष सिंघई, जतारा

*19*
बहुतक बैरा हम सुने ,देखें सुने अनेक।
 गौरा पति सम जगत में, बैरा मिलो न एक ।
***
डॉक्टर आर बी पटेल "अनजान" छतरपुर
*****
*बुंदेली दोहा बिषय- बैरा*

*1*
#राना बैरा हम तकैं ,  मुसकी   पूरी   देत |
धीमीं  कैतइ  बात खौं  , पूरी बें गुन  लेत ||

*2*
#राना बैरा   जानकैं ,  करैं  जौर   से  बात |
मुड़ी हिला कै  बें  गुने , हौठन से  मुसकात ||

*3*
#राना बैरा जानकै , राज न  दइयौ  खोल |
अपनै हौठन खौ पढ़ै , और  करै   बें तोल  ||

*4*
गूंगा - बैरा  दौउ‌   हौ , तब   ईसुर  दै  ज्ञान |
नजर परखवों जानतइ , #राना कैसी तान ||

*5*
#राना ई   संसार   में ,   सब   बैरा   बन   जात |
जितै  बुलउवाँ  दै  धरम  , तनक लिगाँ ना आत ||
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
*यह निम्न तीन दोहे 👇 , सिर्फ हास्य मनोरंजनार्थ है  🙏*
*6*
बौरू से   बैरा  कहै , करैं  कजन  हम  प्यार |
#राना   बौरू  ल्याइ है   ,तब उरदन की दार ||

( कजन खौ उरदन समझा गया है ) 🥰🙏

*7*
बौरू   से  बैरा  कहै  , मौखौ   तौसे  काम |
#राना    बौरू दे   गई , उयै  चूसवै  आम ||

( काम खौ आम समझा गया है )🥰🙏
*8*
कछू  सुनत ये कछु गुनत  ,  #राना हँसतइ  रात |
बौरा  कत  क्या बात   है  ,  बौरू    परसै   भात ||

(बात  को  भात समझा गया है ) 🥰🙏
****10-12-2022
*© राजीव नामदेव "राना लिधौरी" टीकमगढ़*
           संपादक- "आकांक्षा" पत्रिका
संपादक- 'अनुश्रुति' त्रैमासिक बुंदेली ई पत्रिका
जिलाध्यक्ष म.प्र. लेखक संघ टीकमगढ़
अध्यक्ष वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
नई चर्च के पीछे, शिवनगर कालोनी,
टीकमगढ़ (मप्र)-472001
मोबाइल- 9893520965
Email - ranalidhori@gmail.com
Blog-rajeevranalidhori.blogspot.com

बैरालौ बैरू गई, 
हंसकै बोली बैन;
कछु की कछु सुन बौ हंसो,
रिसा गई  बा ऐन।
        (बिन प्रतियोगी दोहा)
-गुण सागर सत्यार्थी कुण्डेश्वर

[10/12, 11:42 AM] Ram Sevak Pathak Hari Kinker Lalitpur: दिन-शनिवार। बुन्देली दोहा प्रतियोगिता- ९१
बैरा तौ हो जात कइ,सुन डीजे कौ शोर।
बजवाउत तौ हमइं हैं, देबैं कीखौं खोर।।१।।
हल्ला हो भौतइ जितै , बैठौ उतै न भूल।
बैरे झट हो जात हैं, शोर बनत हैं सूल।।२।।
जो बैरे हैं जनम में, बेई गूॅंगे होत।
पर बे भूखन नइं मरत, जो धीरज नइं खोत।।३।।
बैरे गूॅंगे ऑंधरे,कैउ होत विद्वान।
रामभद्राचार्य कौ,कित्तौ है सम्मान।।४।।
कइ बैरे पढ़ लिख बनत, अफसर औ आचार्य।
दिव्यांग हम कत तिनै, करत खास बे कार्य।।५।।
कछु सुन बैरा होत हैं, सुनन न चाउत बात।
पनी पनी से बकत हैं, सुन मन में मुस्कात।।६।।
सुन बैरा लेतइ मजा, होत भौत चालाक।
सुन कें बेई बाद में,गजब उड़ात मजाक।।७।।
उमर ढले पै कैउ जन,बैरा भी हो जात।
चिल्लाउत हम जोर सें,तबइ बात सुन पात।।८।।
अब तौ बैरा सुनत हैं, कानन लगा मसीन।
बलिहारी जा बकत की,लिखत नइं गमगीन।।९।।
बैरै गूॅंगे कर रये, अब तौ कैउ कमाल।
सासन सें पेंसन मिलत, अब नइयाॅं बेहाल।।१०।
स्वरचित/मौलिक
"हरिकिंकर"भारतश्री, छंदाचार्य
[10/12, 1:45 PM] Pradeep Khare Patrkar Tikamgarh: बैरौ पबरत ससुर कौ,
सुनत न कौनउ बात।
कैबैं जय गोपाल की,
कय भोपालै जात।।
2-
बतियानें है जोर सैं,
बढ़े अजब हैं ढंग।
बैरै सैं तो जिन करौ,
भैया कबहूँ संग।
3-
साँसी कत तोसैं सखी,
का का तुमें सुनायैं।
बैरौ घर सैं मिल गयौ,
सला करइ न पायैं।
4-
कंडा माँगे तै सुनौ,
 डंडा वौ लै आव।
बैरौ बरतइ का कबैं,
कानौ मैं चिचयाँव।।
5-
बैरे बन गय आज के,
सबरे लंबरदार।
काम सटैं जै भूल जैं,
बढ़े बनैं हुशयार।।

*प्रदीप खरे, मंजुल*
[10/12, 2:04 PM] Brijbhushan Duby Baxswahs: अप्रतियोगी दोहे
1-चिचया चिचया हार गय,
सुनत नहीं सबयार।
गुरगुरात अब सबई घर,
बोलत बृज ललकार।
2-बृज बुराई बड़बाइ अब,
लग रइ एक समान।
कानन नहीं सुनात  जब,
बैरा लव अनुमान।
3सुनत गुनत नैया कभउ,
झनक परत नइ कान।
बृजकिशोर किलकिल बड़ी,
मची रहत घमशान।
बृजभूषण दुबे बृज बकस्वाहा
[10/12, 2:23 PM] Subhash Singhai Jatara: अप्रतियोगी दोहे 

बैरा भी बन जाव जू , जितै गलत हौ  दाव  |
लबरा दौदा हौं जुरै , करै  कपट  बतकाव  ||

बैरा बनकै   ना  सुनौ , जितै  धरम  पै चोट |
सामूँ छाती दो अड़ा , जितै दिखत हौ खोट ||

जान   बूझ बैरा  बनौ , ऊखौं   का समझाँय |
ऐं-ऐं   हैं -हैं   वौ करैं , हम  चिल्ला मर जाँय ||

सूदै बैरा भी तकै , रखत काम से काम |
दंद फंद में ना परै , मन में भजतइ राम ||

बैरा कछु    टैड़े  मिलै , करैं  उबाड़ै  काम |
जौन काम खौ रौकतइ , बौइ लैत वें थाम ||

सुभाष सिंघई
[10/12, 2:41 PM] Rameshver Prasad Gupta Jhanshi: अप्रतियोगी दोहे.

बैरे गूंगे आंदरे,फिर सें हो गय यार/
नेता जिनकी बन गई, मौका पा सरकार//

बैरा बन कें कुछ रहत, सुनकें सबकी बात/
सार -सार कों गै रओ, अच्छौ - अच्छौ खात//

बैरा बन कें बे रये, करत रये सब काज/
कुर्सी से चिपके रये, करो न कौनउ काज//

बैरा सकल समाज है, सबकों खुद पे नाज/
उल्लू सीदो कर रये, उनें न आवै लाज//

मूक तीव्र स्वर गात है, बैरा थामें साज/
अंधा लाठी ले करे, जा कलजुग में राज//

रामेश्वर प्रसाद गुप्ता इंदु.
बडागांव झांसी उप्र.
[10/12, 2:43 PM] Promod Mishra Just Baldevgarh: शनिवार बुन्देली दोहा दिवस
                विषय ,, बैरा,,
*****************************
सुन बैरा भओ मंत्री , सुन बौरू सरकार 
अब प्रमोद भटकत फिरो ,इनके भड़क किवार
*******************************
नगर निगम भोपाल में ,बैरा गढ़ कहलात 
जितै वैर वैरन लगत , पइसा खूब सुहात
****************************
बैरा बौरू सौ कहें , मोय बतादे गैल
बोल कछू पनवेश्वरी , तोय दिखानो बैल
*****************************
चिमा जात टेरत रहो , सुन बैरा कहलात
थूतर सें ऊतर नहीं , गुन प्रमोद रय बात
*****************************
बैरा सें बैरा लरें ,गारी बकै बिलात
पुरा भरो भारी हंसे, गय प्रमोद शरमात
******************************
तनक इशारो दै करो ,बैरा समझत ऐंन
यह प्रमोद भाषा सरल , हाव भाव भर नैन
******************************
       ,, प्रमोद मिश्रा बल्देवगढ़,,
       ,, स्वरचित मौलिक,,
[10/12, 2:56 PM] Bhagwan Singh Lodhi Anuragi Rajpura Damoh: बुंदेली दोहे
विषय:-बैरा
गूॅंगा बैरा हो गये, भीष्म करन अरु दोन।
नगन द्रौपदी खों करत,धरम राज हैं मोन।।

आज काल सरकार में,गूॅंगा बैरा ऐंन।
वोटे लैकें हैंरखत ,दो बन्नी कौ पेंन।।

ईसुर की संतान सब, बैरा लगड़ा सूर।
भेद भाव मत कीजिए,इक दिन मिलना धूर।।

बैरा ओंठ चलाय सें,समझ लेत सब बात।
टूट परत ऐंगर गसें, अब कव कैंसी कात।।

ध्वनि प्रदूषण सें सुनो,क‌इ बैरा हो‌ जात।
शोर गोल में आज कल,बात समझ न‌इॅं पात।।

भगवान सिंह लोधी "अनुरागी" हटा दमोह
[10/12, 3:34 PM] Asha Richhariya Niwari: 🌹
बैरा कौ जीवन कठिन,बात नहीं कह पाय।
हे विधना ऐसो समय,काहू खों न दिखाय।।
🌹
बैरा पन दिव्यांगता,नहि कोनउ अपराध।
उनखों ईसुर देत है,समझ विशेष एकाध।।
,,🌹
सैनन से बातें करें,नैनन सें हमझाय।
हाव भाव प्रगटित करें,बैरा बात बताय।।
आशा रिछारिया जिला निवाड़ी 🙏🏻
[10/12, 4:29 PM] Shobha Ram Dandi 2: अप्रतियोगी दोहा 
शोभारामदाँगी  नंदनवारा जिला टीकमगढ (म प्र)१०/१२/०२२ 
बिषय--बैरा (बहरा) बुंदेली दोहा 
१=सुनवै ऊचौं कानसैं ,चित्त न बैरा देत ।
जब तक निंगा परै नही,ध्यान कछू नइ लेत ।।
२=जो को बैरा होत सो,निंगा पसारैं तेज ।
हाव भाव सैं लेत हैं ,झटपट डारें सेज ।।
३=बीन बजालो भैंस नौं,कछू सुनत नइ बोल ।
सुना न परवै कानसैं, "दाँगी"कावै खोल ।।
मौलिक रचना
शोभारामदाँगी
[10/12, 4:47 PM] Gokul Prasad Yadav Budera: मंच को सादर नमन 🙏🙏
🌹अप्रतियोगी दोहे, विषय-बैरा🌹
***************************
जनम-जात  बैरा  मनुस, 
                  गूँगौ  भी  रत  यार।
कहन लगे दिव्याँग अब,
                मदद करत सरकार।।
***************************
बैरा  पै  करिऔ  दया,
              बिधि कौ मान बिधान।
सुनबैरा  जो  भी  बनें,  
                ऊके   खेंचौ   कान।।
***************************
बैरा  सीकत  देख  कें,
                सबइ  काम  व्योहार।
जो ना सीकै देख सुन,
                 ऊखों  है  धिक्कार।।
***************************
नेता-नेता  खेंच  रय,
                 इक  दूजे  की  टाँग।
बैरे  कानन  पै  परत,
                जनता की सब मांँग।।
***************************
सबकी सुनबै ध्यान सें,
                मन कौ भोज खबात।
अटपट दुनिया ओइ खाँ,
                बैरा--बैरा       कात।।
***************************
✍️ गोकुल प्रसाद यादव नन्हींटेहरी
[10/12, 7:55 PM] Sr Saral Sir: बुन्देली    दोहा 
     विषय    बैरा
******************************
बैरा सुनें न काउ की,बात सुनें चकवात।
सुन बैरा सबकी सुनें, बनों सुट्ट  सौ रात।।

बैरा डंडे खौ समझ ,अपनें कान  चढ़ाय।
पनी समझ बैठार कै,मन ही मन गुस्साय।।

बन गव बैरा बाप कौ, लरका  थानेदार।
शान बढ़ाई गाँव की,तरगव सब परिवार।।

बैरा  लरका  हुन्नरी, खूब कमा रव नाम।
मात पिता बब्बा बऊ,मानत चारइ धाम।।

बैरा  सूदों  जान  कै, घरवारी  चिल्लाय।
किस्मत में बैरा बदौ,सबरों काम नशाय।।
********************************
    एस आर सरल
       टीकमगढ़

मंगलवार, 6 दिसंबर 2022

किन्नर (हिंदी दोहा संकलन ई-बुक) संपादक-राजीव नामदेव राना लिधौरी, टीकमगढ़

[06/12, 8:00 AM] Jai Hind Singh Palera: #किन्नर पर दोहे#

                    #१#
किन्नर गणिका अप्सरा,तानें सुर गंधर्व।
राजमहल साकेत में,बजा बधाई  सर्व।।

                    #२#
उत्सव जन्म विवाह का,किन्नर नाचें गांय।
जो इनका आशीष  ले,मनबांछित फल पांय।।

                    #३#
रनिवासन श्री  राम को,किन्नर लेत उठाय।
बजा बधाई  नाचते,मन की मौज मनाय।।

                    #४#
किन्नर कुदरत से कहे,चाह न प्रभू अथाह।
देह अधूरी क्यों रही,दो जीने की राह।।

                    #५#
किन्नर में नर की नहीं,है नारी की चाह।
एक अधूरी देह जो,मांगे जीवन राह।।

                    #६#
कोई जब संतान हो,देह अधूरी होय।
किन्नर सब उसको कहें,दिल ममता को रोय।।

                    #७#
किन्नर जब मर जाय तो,देख पाय ना कोय।
गुप्त रूप से बे करें,अंत क्रिया अस होय।।

#जयहिन्द सिंह  जयहिन्द#
#पलेरा जिला टीकमगढ़# 
#मो०-६२६०८८६५९६#
[06/12, 10:21 AM] Brijbhushan Duby Baxswahs: दोहा
1-ब्यानो कर कर बता दव,
भैया रखियो ध्यान।
बृजभूषण करहें सबइ,
पाइ पाइ भुगतान।
2-ब्यानो दव बतकाव भव,
बृज कयें फुरसत पाय।
काम समय पे निपट हैं,
करो जू चिंता काय।
3-बृजभूषण ब्यानो करत,
टिया बता दव जाय।
काम काज बन जात सब,
कभऊं बिलर न पाय।
बृजभूषण दुबे बृज बकस्वाहा
[06/12, 11:31 AM] Shobha Ram Dandi 2: शोभारामदाँगी नंदनवारा जिला टीकमगढ (म प्र)०६/१२/०२२ 
बिषय--"किन्नर" हिन्दी
दोहा (१४२)7610264326 
1=नाग किन्नरों देवता , का गाते गुणगान  ।
कहते  "दाँगी" आपसे, गाते वेद पुराण  ।।
  
2=कथा  किन्नरों की कही, अजब गजब  है  बात ।
राम  भरोंसें  ये रहैं  ,"दाँगी" लौ मुस्कात  ।।

3=लगे किन्नरों की दुआ, जो     किन्नर कह देत ।
मांगे पर जो देव ना , पर "दाँगी"सें   लेत  ।।

4= व्याह काज के होत ही , किन्नर  पहुँचें  दोर ।
 दुल्हा दुल्हिन लेत हैं , दुआ इन्दु  ही  भोर  ।।

5= नाच गान दोरें करें ,किन्नर  भजन सुनाँय  ।                    नारि सी देहिया सजा , "दाँगी" मन बहलाँय  ।।

6= जग में किन्नर बहुत हैं , गाऐं वेद पुरान  ।
 जन्म होय गर पुत्र का , आकर दै वरदान  ।।
मौलिक रचना 
शोभारामदाँगी
[06/12, 11:44 AM] Subhash Singhai Jatara: विषय - किन्नर 

किन्नर   सदा   समाज से ,  पाते   है अपमान |
फिर भी घर-घर पर करें , शुभ गीतों का गान ||

किन्नर   आकर   दें   दुवाँ , लेते  अपना  नेंग |
नाचें   गाएँ   द्वार   पर  , लेकर अपनी‌   गेंग ||

नर - नारी से कुछ अलग , किन्नर की पहचान |
वृहनिल्ला इतिहास में , मिलता नाम   सुजान ||

सिर्फ विधाता जानता , इनका क्या   है राज |
नर-नारी से कुछ अलग,किन्नर बना  समाज ||

नाम शिखंडी का सुना , था किन्नर में   शान  |
अर्जुन जैसे वीर  भी  , स्वयं  बने   प्रतिमान ||

सुभाष सिंघई 
~~~~~~~~~~~~~
[06/12, 11:51 AM] Rajeev Namdeo Rana lidhor: *हिंदी दोहे बिषय:- किन्नर*
*1*
#राना किन्नर देखकर , मत  जाना  यह  भूल |
सहकर यह सब शूल भी , देत दुवाँ  के  फूल ||

*2*
#राना किन्नर की  दुवाँ , ईश्वर    करे    कुबूल |
शिशु जन्म पर  बाँटते  , खुशी   भरे यह  फूल  ||

*3*

किन्नर जब  भी   नाचते , गीत  बधाई  गान |
बुरी बला इनसे डरें , #राना को   यह  भान ||

*4*
किन्नर सब  वंचित रहे , #राना मिला न प्यार  |
अब सरकारों   ने दिए ,   मतदानी  अधिकार ||

*5*
किन्नर मानव  मानिए  ,  इन्हें  न  दीजे   खेद |
संरचना #राना   समझ , बना लिंग बस  भेद ||

*6*
किन्नर आए द्वार पर , मत   करना   अपमान |
#राना जो कुछ दे सको ,  देना  उनको   दान ||
***दिनांक- 6-12-2022
*© राजीव नामदेव "राना लिधौरी" टीकमगढ़*
           संपादक "आकांक्षा" पत्रिका
संपादक- 'अनुश्रुति' त्रैमासिक बुंदेली ई पत्रिका
जिलाध्यक्ष म.प्र. लेखक संघ टीकमगढ़
अध्यक्ष वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
नई चर्च के पीछे, शिवनगर कालोनी,
टीकमगढ़ (मप्र)-472001
मोबाइल- 9893520965
Email - ranalidhori@gmail.com
Blog-rajeevranalidhori.blogspot.com
🥗🥙🌿☘️🍁💐🥗🥙🌿☘️🍁💐
[06/12, 12:06 PM] Dr. Devdatt Diwedi Bramlehara: 🥀 हिंदी दोहे 🥀
     (विषय- किन्नर)

नर मादा कोई नहीं,
     अलग तीसरा रूप।
दुनिया में किन्नर सरस,
     एक प्रजाति अनूप।।

किन्नर औ गंधर्व गण,
     यक्ष, अप्सरा आदि।
ये सब ही उप देवता,
      मानें जायँ अनादि।।

जन्म, छठी, मुंडन, लगन,
       उत्सव और विवाह।
किन्नर नाचें गायँ तो,
       बढ़ जाये उत्साह।।

संस्कार के समय पर,
      किन्नर गीत सुहायँ।
हँसी खुशी से दान ले 
       आशीषें बरसायँ।।

डॉ देवदत्त द्विवेदी सरस
बड़ामलहरा छतरपुर
[06/12, 12:43 PM] Promod Mishra Just Baldevgarh: राना किन्नर देखकर , खुशी भरे यह फूल
किन्नर जब भी नाचते, मनवा जाए झूल
आदरणीय बहुत सुंदर रचना
[06/12, 1:14 PM] Anjani Kumar Chaturvedi Niwari: हिंदी दोहे 
 दिनांक- 6 दिसंबर 2022
 विषय- किन्नर

 जग में जितने जीव हैं, किन्नर उनमें एक।
 स्वयं सदा अपमान सह,दें आशीष अनेक।।

 किन्नर अब गफलत करें, सबको बहुत सतायँ।
 मुँह मागा धन चाहते, दादागिरी बतायँ।।

 नहीं  देखते  हैसियत, माँगे  धन भरपूर।
 घुमा घुमा कर घाघरा,किन्नर मद में चूर।।

 नियम धर्म सब छोड़ कर, काम करें विपरीत।
 कितना कोई दीन हो, किन्नर धन के मीत।।

 जो किन्नर देते दुआ, होती तुरत कबूल।
इन्हें सताने की कभी, करे न कोई भूल।।

सरकारों ने दे दिया, इनको मताधिकार।
अब समाज करने लगा,किन्नर को स्वीकार।।

अंजनी कुमार चतुर्वेदी श्रीकांत निवाड़ी
[06/12, 1:39 PM] Ram Sevak Pathak Hari Kinker Lalitpur: दि०६-१२-२०२२ प्रदत्त शब्द -किन्नर।
रूप मिला है मनुज का, पर वह नर न नारि।
दण्ड मिला यह क्यों उसे, बतलाओ त्रिपुरारि।।१।।
लखने  में पूर्णांग है, फिर भी कम एकांग।
कहलाता किन्नर नहीं,बोलो क्यों दिव्यांग।।२।।
 चार पुरुषारथ जगत में, माॅंगत प्रभु से लोग।
पर किन्नर को त्रय मिलें,कैसा बना कुयोग।।३।।
उभय लिंग जग कह उसे, पर किन्नर गुण से हीन।
हैं मयूर इससे भला, रहे नृत्य प्रवीन।।४
रूप जनाना रख सदा, रहे समाज से दूर।
किन्नर नाचें द्वार पर,  कैसा यह दस्तूर।।५।।
"हरिकिंकर" भारतश्री, छंदाचार्य
[06/12, 2:23 PM] Dr. Renu Shrivastava Bhopal: दोहे - विषय *किन्नर*
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
1 किन्नर की भगवान ने, 
 अलग बनाई देह।
 जिसके खुशियांँ होत हैं, 
 जाते उसके गेह।। 

2 जाते किन्नर द्वार पे, 
   माँगे नोट हजार।
   उनकी है ये जीविका, 
   नहीं करो इंकार।। 
  
3 वेद पुराणों में रहा, 
    किन्नर का गुणगान। 
    नर नारी फिर रूप का, 
    क्यों करते अभिमान।। 

4 दे देते आशीष जो, 
   किन्नर दिल से जान। 
   सुख वैभव मिलता सदा, 
   सच्ची है ये मान।। 

5 किन्नर का जो जन्म ले, 
   किस्मत को बो रोय। 
   इज्जत नहीं समाज में, 
   कैसे जीवन ढोय।। 
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️

                  डॉ रेणु श्रीवास्तव भोपाल 
                  सादर समीक्षार्थ 🙏
                  स्वरचित मौलिक 👆
[06/12, 3:42 PM] Prabhudayal Shrivastava, Tikamgarh: हिन्दी  दोहे    विषय   किन्नर

नर नारी ये  हैं नहीं  ,  किन्नर   अलग  समाज।
नाच गान  करते सदा, जब हो  कोई  काज।।

फलीभूत होती  सदा ,  किन्नर  की  आशीष।
दे दो  जो भी  मांगते ,  रहे न मन में टीस।।

अपने मन को मार के, सबके  हिय  हरसायँ।
बजा बजा के तालियां, किन्नर  नाचें  गायँ।।

मान अगर ना दे सको,  मत  करना अपमान।
किन्नर  मनुज समाज को,अति आवश्यक मान।।

किन्नर रूपी  पार्थ ने ,  दिया  नृत्य का ज्ञान।
पुत्र वधू बन उत्तरा  ,  ने  पाया  सम्मान।।

           प्रभु दयाल श्रीवास्तव पीयूष टीकमगढ़
[06/12, 4:10 PM] Vidhaya Chohan Faridabad: हिंदी दोहे
~~~~~~
विषय- किन्नर
~~~~~~~~

१)
नर नारी के बीच भी, होता इक इंसान।
किन्नर ताली पीट कर, देता है पहचान।।

२)
होती है मंगलमुखी, किन्नर की समुदाय।
फलीभूत होती दुआ, मिले न इनकी हाय।।

३)
अर्जुन बने वृहन्नला, धारण किन्नर रूप।
गायन वादन नृत्य में, सेवक गुप्त अनूप।।

४)
किन्नर को श्रीराम का, मिला दिव्य वरदान।
शुभ  मंगल हर काज में, करते कृपा प्रदान।।

५)
जीवन किन्नर जाति का, कब होता आसान।
कुंठा, लज्जा, भर्त्सना, मिलता है अवमान।।

~विद्या चौहान
[06/12, 4:59 PM] Amar Singh Rai Nowgang: हिंदी दोहे, विषय- किन्नर

किन्नर का घर आगमन, माना जाता ठीक।
बुध ग्रह होता है प्रबल, देते दुआ सटीक।।

गीत  बधाई  गायकर, किन्नर  दें  आशीष।
नाचें  गाएं  दें  दुआ, खुशी रखे जगदीश।।

किन्नर नर-नारी नहीं, धर्म  ग्रंथ  में  ख्याति।
क्षेत्र हिमालय में बसे,नर की है इक जाति।।

किन्नर घर आते तभी, जब होता शुभ काम।
जन्मोत्सव  हो  शादियाँ,  ले  जाते  ईनाम।।

किन्नर दे यदि आपको, रुपया सिक्का एक।
कहते रखो सँभालकर, बरकत होती नेक।।

किन्नर अब अड़ियल हुए,कम दिखता है नेह।
धंधा  के  उद्देश्य  से,  आते  केवल  गेह।।

मौलिक/                 अमर सिंह राय
                            नौगांव मध्यप्रदेश
[06/12, 5:34 PM] Kalyan Das Sahu Prithvipur: किन्नर नारी-सम सजें , तन सुन्दरता सोह ।
बजा-बजाकर तालियाँ , लेते मन को मोह ।।

शुभ अवसर पर नाच-गा , पाते नगद इनाम ।
चलती उनकी जीविका , किन्नर वर्ग अकाम ।।

पुरुष नहीं महिला नहीं , उभयलिंग पहचान ।
किन्नर जाति समाज में , खोज रही सम्मान ।।

वर्तमान  में  हो  रहे , किन्नर गण बदनाम ।
बेदर्दी  से  ऐंठते , अड़कर जबरन दाम ।।

घुस जाते कुछ रेल में , धर किन्नर का रूप ।
बेहूदी  हरकत  दिखा , लेते  रुपया  तूप ।।

जोड़ रहे दौलत बहुत , तोंद बढा़ते बैठ ।
किन्नर भी करने लगे , राजनीति में पैठ ।।

   ---- कल्याण दास साहू "पोषक"
      पृथ्वीपुर जिला-निवाडी़ (मप्र)

        ( मौलिक एवं स्वरचित )
[06/12, 6:37 PM] Sr Saral Sir: हिंदी  दोहा  विषय -किन्नर 
*******************************
ब्याह भये  आई बहू, किन्नर  नाचें द्वार ।
मांग रहे  बे  नैग में, रूपया पाँच हजार।।

माँगत हैं वर पक्ष से,किन्नर अपनी फीस।
फीस मिली छाई खुशी,देन लगे आशीष।।

राजनीति  में कूद  के, किन्नर  माँगे वोट।
बे चुनाव  को  जीतनें, बाँटत फिरते नोट।।

किन्नर अब गुंडा भये, मांगत चौखे दाम।
जो उनको  देते नहीं, करते  बे  बदनाम।।

नाच  करें  गाते  फिरें, चौखी  बातें  देत।
बजा बजा के तालियाँ,किन्नर रुपया लेत।।
********************************
        एस आर सरल
           टीकमगढ़
[06/12, 7:44 PM] Pradeep Khare Patrkar Tikamgarh: किन्नर आये द्वार पै,
 होये जब शुभ काज।
वर पाये प्रभु राम से,
करहूँ कलियुग राज।।
2-
होय जनम जब लाल कौ,
करते उस पर नाज।
किन्नर जब आशीष दे,
होते पूरन काज।
3-
कलियुग में पद पा रहे,
किन्नर जीत चुनाव।
बने विधायक देख लो,
महापौर बन आव।।
4-
किन्नर की बोली अलग,
अलग चाल अरु ढाल।
जा यौनी में होत है,
भैया खूबयी माल।।
5-
ढोलक लैकैं आ गयै,
किन्नर गाबै गीत।
दुआ देत घर आन कैं,
बढ़ै रात दिन प्रीत।।
*प्रदीप खरे, मंजुल*
टीकमगढ़
[06/12, 7:57 PM] Geeta Devi Orya: किन्नर

सदा सदन फूले-फले,बने कार्य आसान।
किन्नर के आशीष से,पाओ जग में मान।।

जन्म हुआ है लाल का,खुश है सब परिवार।
किन्नर नाचे धाम में,पडी़ नेक भरमार।।

नर-नारी के सम दिखे,करते सब श्रृंगार।
भारी-सी आवाज है,पहचानो सब यार।।

नित विवाह में देखिए,किन्नर नाचे रोज।
वर-वधु को देते दुआ,चमके मुख पर ओज।।

अतिथि समझ देना सभी,इनको बहु सम्मान।
खुश होते किन्नर सभी,दे जाते वरदान।।

गीता देवी
[06/12, 7:58 PM] Dr R B Patel Chaterpur: दोहा  किन्नर
              01
 किन्नर करतब करत ना, बिन मेहनत क खात भये ब्याहे खबरें सुन, नाचत गावत जात ।
               02
 नेता अब इस धरा में, करते किन्नर कर्म। 
पद कुर्सी उन्हें चाहिए ,चाहे होय अधर्म ।
                03
 दूल्हा-दुल्हन भांवरे ,ब्याहे की है रीति ।
 किन्नर आ धमके तभी ,पैसे से है प्रीति ।
 
स्वरचित 
डॉ आर बी पटेल "अनजान"
 छतरपुर।
मंगलवार हिंदी दोहा दिवस
विषय , किन्नर,
****************************
चित्रकूट जाकर मिले ,भरत लखन श्री राम
नर नारी लौटे अवध,किन्नर बैठे धाम
****************************
वृहन्नला अर्जुन बने ,लेकर किन्नर रूप
लगे पढ़ाने उत्तरा , श्राप प्रमोद अनूप
****************************
इरावान से ब्याह कर , एक रात की आस
किन्नर विधवा हो चले ,कर प्रमोद विश्वास
******************************
खड़ा शिखंडी बन रथी , चकित हुए कुरु वीर
किन्नर कंधे पार्थ के ,लगे बरसने तीर
********************************
हिजड़ा किन्नर खोजवा ,छक्का नाम तमाम
देहिक विकृति से हुए ,आ सम्मानित नाम
******************************
बहिष्कार से जूझते , किन्नर सहे अभाव
कौशल शिक्षा की कमी , फिर भी मृदुल स्वभाव
*********************************
कह प्रमोद इस जगत में , किन्नर कभि ना होय
आशिष दे हँसता सदा , रहता हिरदय रोय
*********************************
      ,, प्रमोद मिश्रा बल्देवगढ़,,
      ,, स्वरचित मौलिक,,

सोमवार, 5 दिसंबर 2022

बयानौ (अग्रिम राशि) ई-बुक संकलन राजीव नामदेव 'राना लिधौरी' टीकमगढ़

[05/12, 8:35 AM] Pradeep Khare Patrkar Tikamgarh: 1-
ब्यानौ दव भ्यानैं हतौ,
आज दऔ बिसराय।
लाबर लबरी कै रऔ,
को ईखौं समझाय।
2-
ब्यानौ दऔ मकान कौ,
लागो मोखों ठीक। 
हाथै ना मोये कछू,
माँगत फिर रव भीक।।
3-
बेमानी है खून में,
लोभी लंपट लोग।
ब्यानौ तक खा जात जै,
बुरऔ भऔ जौ रोग।।
4-
ब्याऔ जब बिटिया करो,
दऔ बियानौ बाँट। 
डेरा, शैनाई करी, 
देखकें रै गय ठाट। 
5-
धाक रबै ऊकी सदाँ,
खूब बिकै सामान।
ब्यानौ कभउँ न खाइयौ,
जौ है जहर समान।
*प्रदीप खरे, मंजुल*
[05/12, 8:55 AM] Ram Sevak Pathak Hari Kinker Lalitpur: एक भेंसिया तै करी, बिऑंनौ भी दै आव।
लैवे जब में गव उतै,ऊनैं मार भगाव।।
"हरिकिंकर"
[05/12, 9:15 AM] Bhagwan Singh Lodhi Anuragi Rajpura Damoh: बुंदेली दोहा
विषय:-बिऑंनो
लेत बिऑंनौ काय खों, पंजाबी कौ आय।
प्रानन की परहै तुमे,जौ न अगर  कर पाय।।

आज काल के आदमी,सांसी नहीं बतांय।
काम करें न काऊ कौ, लेत बिऑंनौ रांय।

लेत बिऑंनौ कोउ कौ, वोट कौउ खों देत।
भ‌ओ सामनो जब कभ‌उॅं,सो तुरत‌इॅं भग लेत

 बिऑंनौ ख ल‌व कुल्ल कौ, कर लबरौ बतकाव।
अब तौ अनुरागी बचौ,देख परख कें बाव।।

भगवान सिंह लोधी "अनुरागी" हटा दमोह
[05/12, 9:26 AM] Jai Hind Singh Palera: #ब्यानौ पर दोहे#

                    #१#
कौन‌उ पूजा होय तौ,पैलां पुजें गनेश।
ऐस‌इ होत खरीद में,पैलां ब्यानौ पेश।।

                    #२#
ब्यानों चलन समाज कौ,करें सब‌इ सम्मान ।
बैंचन बारौ लेय ना,तौ ग्राहक हैरान।।

                    #३#
जैसें चलता ब्याव कौ,सबरी जान चड़ाव।
बैस‌इ ब्यानौ होत है,पूरौ पक्कौ भाव।।

                    #४#
ब्यानौ है इक पेशगी,पै ऊंची  है बात।
बदलै ब्यानौ लै कभौं,पूरौ उतरा जात।

                    #५#
मोल भाव पक्कौ करौ,ब्यानौ है संकेत।
भले रकम हलकी रहै,वजन बात में देत।।

#जयहिन्द सिंह जयहिन्द# 
#पलेरा जिला  टीकमगढ़# 
# मो०-६२६०८८६५९६
[05/12, 10:05 AM] Aasharam Nadan Prathvipur: बुंदेली दोहा विषय --   बिआँनों (अग्रिम राशि)
(१)
अपने घर  परिवार  में,  पैल  सला  कर लेव।
बड़ी रकम की चीज कौ, तनक बिआँनों देव ।।
(२)
लऔ  बिआँनों हाॅंत में , फिर लालच में आय ।
लेवा  देवा  कोउ  हो ,  कै  बदला  कहलाय  ।।
(३)
बात  बाय की  बात तौ , होत  बिआँनों  बात ।
पानी  रबै  बजार  कौ ,  हाल नगद  दै जात ।।
(४)
सौदा कर  लइ भैंस की , दऔ  बिआँनों हाल ।
बोले  गदिया   पै  धरैं ,  नगद  रुपइया  काल ।।
(५)
अपनों  नइॅंयाॅं  रोम जौ , न बिआँने  कौ काम ।
धंदे  अरु  व्यापार में ,  नगद  चलत  हैं  दाम ।।

आशाराम वर्मा "नादान " पृथ्वीपुर
(  स्वरचित ) 05/12/2022
[05/12, 10:17 AM] Rajeev Namdeo Rana lidhor: ब्यानौ दंयं बरसै कडी,
लग्गा नइ लग पाऔ;
उमर बीत गयि राधई,
गट्ट बिदी सरझाऔ।
       *(गुण सागर सत्यार्थी,कुण्डेश्वर)*
[05/12, 10:22 AM] Rajeev Namdeo Rana lidhor: *बुंदेली दोहा:-बिआँनौ*

जितै बिआँनौ लग चुकै , #राना पक्की बात |
नईं  बदलने आत   है , बूड़े  बुजरक   कात ||

जगाँ -तगाँ  #राना तकत , देत  बिआँनौ  लोग |
टेम -टिया खौ  हैं धरत , तकतइ  इतै‌    प्रयोग ||

लगौ   बिआँनौ   हौ  जितै , लोग न  डारै  हात  |
#राना  सौदा हौ  गयौ , अब ना   पसरै   भात ||

लेत  बिआँनौ  ही  कहत , दे   दइ‌  तुमै  जुवान |
#राना मुकरै ना कभउँ , चलै  जाँय‌  चय‌  प्रान ||

जितै   बिआँनौ  लील कै ,  मुकरैं    दईं जुवान  |
#राना    पूरौ    हौत   ना ,  उनखौं   खानागान ||
*** दिनांक-5-12-2022
*© राजीव नामदेव "राना लिधौरी" टीकमगढ़*
           संपादक- "आकांक्षा" पत्रिका
संपादक- 'अनुश्रुति' त्रैमासिक बुंदेली ई पत्रिका
जिलाध्यक्ष म.प्र. लेखक संघ टीकमगढ़
अध्यक्ष वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
नई चर्च के पीछे, शिवनगर कालोनी,
टीकमगढ़ (मप्र)-472001
मोबाइल- 9893520965
Email - ranalidhori@gmail.com
Blog-rajeevranalidhori.blogspot.com
[05/12, 10:29 AM] Subhash Singhai Jatara: बुंदेली दोहा , विषय‌ - बियाँनौ 

दैव  बियाँनौ  राम खौं  , भजन सुना के चार |
चानै   चरनन  धूर   है  , करवें   खौं  उद्धार  ||

भजन बिआँनौ लौ प्रभू  , आगें खौ दो गैल |
सेवा करवै  आपकी  , पौचें  हम तो   पैल ||

हमखौ   चानै  आपकी , छाया   हरदम राय |
नाम  रटत हैं  आपको , जौइ  बियाँनौ आय  ||

लयैं  बियाँनौ   घूमतइ , राम   नाम  उच्चार |
अगर बियाँनौ लग गयौ,   हौजे   बेड़ा  पार ||

विषय   बियाँनौं  है  मिलौ ,    करें चूक ना  भूल |
येइ  बियानै  में  खिलैं   , राम   नाम   के   फूल ||

(हम अपनौ बियाँनौ राम जू के चरनन में लगान चाऊत है ) 🙏

सुभाष सिंघई
[05/12, 10:45 AM] Promod Mishra Just Baldevgarh: सोमवार बुंदेली दोहा दिवस
विषय ,, बिआँनौ ,,
*****************************
मोल भाव भव भैंस को ,रकम टिया पै आय
भरो बिआँनौ चल पड़े , सँग भैंस डुरयाय 
*******************************
बिआँने कि मिट गइ प्रथा , रओ थोरो इमान 
बड़ रय लबरा दोगला ,चुगला बेईमान
*******************************
दियो बिआँनौ हाँक लइ , पड़िया तर की भैंस 
रकम टिया पै आइ ना , गय प्रमोद अब ठेंस 
********************************
अबतो बिआँनौ मूर कि , दर पै हनो कलंक
केउ थूंक खुद चाट रय , टुचचत फिररय डंक
********************************
लेत बिआँनौ मेंट तइ , थुका थुको करवाय
काँलौं पित ऐसें पलें , ज्वांन प्रमोद नसाय
********************************
हत्या बिआँने सें भइ , कैरय जिये सुपाइ
नाश होय ऊ ससुर की ,जीने रीत चलाइ
******************************
हते जमाने पैल के ,बात बाप था एक
दै बिआँनौ प्रमोद नै , नोनी राखी टेक
********************************
          ,, प्रमोद मिश्रा बल्देवगढ़,,
          ,, स्वरचित मौलिक,,
[05/12, 10:53 AM] Ram Sevak Pathak Hari Kinker Lalitpur: दिन- सोमवार ।प्रदत्त शब्द-बिऑंनौं।
देंय बिऑंनौं  सोचकर, सब न ईमानदार।
कैऊ धोकौ खातई,ठगे जात लाचार।।१
बिना जान पहचान कें, नहीं बिऑंनौ देउ।
पछतातइ हैं बाद में, करौ तुमइ फिर सेउ।।२
कैऊ ब्यानौ का गये,रैगय बाद डफात।
पैलै अपनी चीज लो, फिर नइं रउ पछतात।।३
कैउ बिऑंनौं दै गये, में
[05/12, 11:16 AM] Ram Sevak Pathak Hari Kinker Lalitpur: कैउ बिऑंनौ दै गये,चीज न लैवै आय।
जो लउ तौ दैनैं परौ, और का हतौ उपाय।।४
लेउ  बिऑंनौ कभउॅं नइं, नाइं काउखौ देउ।
नईं लराई मोल लो,ब्यानौ देउ न लेउ।।५
[05/12, 11:42 AM] Saras Kumar (Doh, Kargapur): दोहा - 🙏🙏

बिआंनो देके लोट रय, आने भर दय दाम
आने - जाने में गये, अपनो बखत तमाम

सिया बिआंनो दे ग‌यी, घोड़ा नचने आज
घोड़ा बारो खुश भ‌औ, टरे न माता काज



©️सरस कुमार
दोह खरगापुर
जिला टीकमगढ़ मध्यप्रदेश 
2️⃣0️⃣2️⃣2️⃣
[05/12, 1:01 PM] Amar Singh Rai Nowgang: बुन्देली दोहे विषय - बिआँनो

तय  होबे  के  बाद  में, तुरत  बिआँनों देत।
बातें पक्की मान कें, फिर  सुसंत हो लेत।।

पैल  बिआँनों ती  जुबाँ, दै  राखत  ते  मान।
अब तो कइयक पेशगी, खाय जात इंसान।।

अगर बिआँनों हो गओ,समझो पक्की बात।
पलट जात जो बात सें, ऊखाँ सबै लजात।।

लरका छेंकत आज भी, जेइ बिआँनों आय।
तय जितने में होत है, रकम  देत  पहुँचाय।।

अमर बिआँनों मत लिओ,जो नइँ बसको होय।
आफत ऊपर आत जब, साथ देत नइँ कोय।।

मौलिक 
                            अमर सिंह राय 
                                 नौगांव
[05/12, 1:11 PM] Shobha Ram Dandi 2: शोभारामदाँगी नंदनवारा जिला टीकमगढ (म प्र) 05/12/022 
बिषय--"बिआँनौ"( पहले से राशि देना )मोबा=7610264326 
1=दओ बिआँनौं भैंस कौ,दस लीटर है दूध ।
एक लाख की भैंस है, "दाँगी" परखैं  खूब ।।

2=बिआँनौं  पक्कि  बात है, कछू चीज  कौ   होय  ।
खेत खरीदौ चाय जो, "दाँगी" कहँ सब  कोय  ।।

3=आपुस  कौ सब होत है ,व्आनौं  "दाँगी"  देत ।
कछू  जनैं  कुछ लेत हैं ,कछू जनैं नइ  लेत  ।।

4=ब्आँनौं  दैकैं मैंटते ,ज्आन दार नइ होत ।
"दाँगी" ऐसी बात कौ ,
[05/12, 1:11 PM] Shobha Ram Dandi 2: 5="दाँगी"ब्आँनौं दीजिये, समजो पककी बात ।
लेनदेन सब साफ हो ,कभऊ  होय न घात  ।।
मौलिक रचना
शोभारामदाँगी
[05/12, 1:12 PM] Shobha Ram Dandi 2: शोभारामदाँगी नंदनवारा जिला टीकमगढ (म प्र) 05/12/022 
बिषय--"बिआँनौ"( पहले से राशि देना )मोबा=7610264326 
1=दओ बिआँनौं भैंस कौ,दस लीटर है दूध ।
एक लाख की भैंस है, "दाँगी" परखैं  खूब ।।

2=बिआँनौं  पक्कि  बात है, कछू चीज  कौ   होय  ।
खेत खरीदौ चाय जो, "दाँगी" कहँ सब  कोय  ।।

3=आपुस  कौ सब होत है ,व्आनौं  "दाँगी"  देत ।
कछू  जनैं  कुछ लेत हैं ,कछू जनैं नइ  लेत  ।।

4=ब्आँनौं  दैकैं मैंटते ,ज्आन दार नइ होत ।
"दाँगी" ऐसी बात कौ ,
[05/12, 1:19 PM] Dr. Preeti Parmar Tikamgarh: [05/12, 11:31] डॉ प्रीति सिंह परमार:
 नफा और नुकसान से, 
 ब्याने कौ का काम।
माटी सो जीवन रहो
करौ राम के नाम।।
बयानों  घरे जब  भयो
पक्की पक्की बात
जुबा  तुमहि पलटो अबे
कोउ ना देय साथ ll
[05/12, 1:54 PM] Dr. Renu Shrivastava Bhopal: दोहे - विषय *ब्यानौ*
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
1 ब्यानो हो गौ ढोल को, 
  द्वारे बजत बधाइ। 
  सब रत है विश्वास पे, 
  ब्याने को कत शाइ।। 
 
2 ब्यानौ दै दौ रात में, 
   भोर बदल गौ साव।
   ईसुर को बो ना डरै, 
   मुतको कर रौ न्याव।। 

3  हो गौ ब्यानौ बैंड को, 
    दूल्हा जू मुस्कात।
    सज कें कब बन्ना बनैं, 
    कबलों कड़ै बरात।। 

4 टिया धरैं ब्यानो करैं, 
    जा जुवान की बात। 
    बदल जात जो बात सें, 
    लबरा बेउ कहात।। 

5 ब्याने से जो बदल गौ, 
    पक्को है बेईमान। 
    बड़ी रकम के लोभ में, 
    खो रौ  है ईमान।। 

✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
                       डॉ रेणु श्रीवास्तव भोपाल 
                       सादर समीक्षार्थ 🙏
                       स्वरचित मौलिक 👆
[05/12, 2:15 PM] Dr. Devdatt Diwedi Bramlehara: 🥀 बुंदेली दोहा 🥀
     ( विषय ब्यानों )

जब पक्की हो जाय सब,
           लेंन-देंन की बात।
साई,ब्यानों,पेसगी,
       फिर पाछें दय जाता।

नसाखोर, लोबी, लटे,
      सेंटा औ सेंतान।
ब्यानों लौ खा जायँ जे,
     इनकौ का ईमान।।

तन मन के बेभार में,
     पर गइ बड़ी खटाइ।
ब्यानों दव तो भजन कौ,
     काय खबर बिसराइ।।

कौंनउ सौदा के कभउँ,
        होंय न पूरे दाम।
ब्यानों भर दैकें सरस,
      बना लेत हैं काम।।

फसलें दोई बिगर गइँ,
       कैसें चुकै उधार।
ब्यानों दैकें ल्याय ते,
       भूरी भैंस दुदार।।

डॉ देवदत्त द्विवेदी सरस
बड़ामलहरा छतरपुर
[05/12, 4:10 PM] Dr R B Patel Chaterpur: दोहा - बिआंनो

बिआंनो दे बदल रहे,
नेता नियत नितांत ।
थूंक चाटते नइ शरम,
राजनीति को आंत।
          02,
टिकट बांटते मंत्रिगण,
ले ब्याने में नोट ।
बोट मिलें या ना मिले,
नोटों में ना खोट ।
          03
जायदाद बिकती जबै,
ब्याने में हो नोट ।
पक्की बात कहात है,
इसमें नाही खोट ।
          04

ब्हाये की शुरुआत में,
ब्यानो पक्को होत ।
तैयारी फिर करत हैं,
दूल्हा दुल्हन भोत।
           
स्वरचित
डा आर बी पटेल "अनजान"
छतरपुर
[05/12, 4:50 PM] Rama Nand Ji Pathak Negua: दोहा ब्यानों
                      1
नन्द ब्यानों दै दऔ,बैलन करी खरीद।
देतइ दाम टिया धरें,पाछें कटै रसीद।
                        2
नन्द ब्यानों दै दऔ,हो गइ पक्की बात।
लौटे घरै टिया धरा,वे खटकें सो जात।
                        3
ब्यानें को एकइ टका,रखै लाख कौ मान।
जैसइ असली मर्द की,होवै ऐक जवान।
                         4
पैंला ब्यानों देत हैं,है पुरखन सें रीति।
ब्यानों लँय बदलै नइ बनी पैल सें नीति।
                          5
नन्द ब्यानों दै दऔ ना दय पूरे दाम।
तीरथ करवे हम चले, सबको सीता राम।
रामानन्द पाठक नन्द
[05/12, 5:29 PM] Rama Nand Ji Pathak Negua: दोहा बियाँनों 
                   1
नन्द बियानों दै दऔ,बैलन करी खरीद।
दाम टिया देतइ धरें,पाछें कटै रसीद।
                  2
नन्द बियाँनों दै दऔ,हो गइ पक्की बात।
धरौ टिया लौटे घरै,वे खटकें सो जात।
                    3
पैल बियाँनों देत हैं, है पुरखन सें रीति।
बियाँनों लँय बदलै नइ, बनी पैल सें नीति।
                       4
बियाँनें कौ एकइ टका,रखै लाख कौ मान।
जैसइ असली मर्द की,होवै एक जवान।
                         5
नन्द बियानों दै दऔ,ना दय पूरे दाम।
तीरथ करवे हम चले, सबको सीता राम।
रामानन्द पाठक नन्द
[05/12, 5:47 PM] Subhash Singhai Jatara: संजय भाई जी ,व्यान उर्दू शब्द है जो जगन्नाथ मिश्र जी ने अदालतों में फ्यूजन भाषा के रुप में प्रचलित किए ( फ्यूजन = हिंदू उर्दू को मिलाकर ) 
तलवाना मुचलका जमानत व्यान इत्यादि ऐसे ही कई शब्द है 
बुंदेली अपनी मुख सुख की बोली से भाषा बनी है , मास्टर साहव को मास्साव , तहसीलदार को तासीलदार इत्यादि 
व्यान को भी बुंदेली में मुखसुख से ( पक्की जुबान करने हेतु , एक औपचारिक रस्म बना दी है ) यही तो बुंदेली शब्दों की कला है 
 बियाँनों इसी कला से बना है  , ब्यानों भी उच्चारण में ध्वनित होता है    , लेकिन देखा जाए तो , व्यान का बहुबचन ब्याँनों है 
जैसे उसने अपने ब्याँनों में कहा कि हमने नहीं देखा है  , 
पर बुंदेली में ब्याँनों   पेशगी का पर्यायवाची भी बन गया है 
बुंदेली मुखसुख  की यही कला तो बुंदेली बोली भाषा बन गई है
दरअसल बुंदेली में अभी शुद्ध अशुद्ध शब्दों पर काम नहीं किया गया है , सब चल रहा है 
ब्याँनों तो  नवजातों  को भी कहा जाता है 
जैसे - यह अभी हाल का ही ब्याँनों पिल्ला है
[05/12, 6:00 PM] Sr Saral Sir: बुन्देली दोहा  विषय- बियानों 
 ********************************
दऔ बियानों काम कों,भइ ठेका पै बात।
ठेका  में टोटों परौ, *सरल* मनें सकुचात।।

दऔ बियानौ पान सौ, चाने  उएँ हजार।
दोइ जनन क़े बीच में,होन लगी तकरार।।

काम करौ नइयाँ शुरू,दऔ बियानों फेर।
कत कै पैसा और दो, रये काय तुम पेर।।

आँखे  लगे  तरेर बे,  इक  दूजे  पै  भाइ।
लगों बियानों फेर दव ,होतन बची लराइ।।

दऔ बियानों राइ कौ,आइँ बिड़नियाँ चार।
दमचौरों भव रात भर, खुश रय रिश्तेदार।।
*********************************
       एस आर सरल
          टीकमगढ़
[05/12, 6:07 PM] Kalyan Das Sahu Prithvipur: साइ  बिआँनौं  पेसगी , अग्रिम अरु इडवान्स ।
सौदा  पटवे  पै  कछू , देत रुपइया मान्स ।।

सौदाबाजी जब करौ , तुरत बिआँनौं देव ।
दो गवाइ बैठार कें , लिखन-पढ़न कर लेव ।।

लालच में पर जात जो , डुगा निंअत खों लेत ।
सौदा  करकें  मेंटवें , फेर  बिआँनौं  देत ।।

मौखिक सौदा जिन करौ , बाद फिरौ पछतात ।
होत मुसरया कछु जनें , हड़प बिआँनौं जात ।।

बातदार  इंसान  की , पक्की  होत  जुबान ।
उनें बिआँनौं दो! न दो , रखें बात कौ मान ।।

उतै बिआँनौं रत सफल , जाँ हो जान-चिनार ।
मइं  येंगर  के  दो  जनें , बनें  गवाई  दार ।।

   ---- कल्याण दास साहू "पोषक"
      पृथ्वीपुर जिला-निवाडी़ (मप्र)

          ( मौलिक एवं स्वरचित )

शनिवार, 3 दिसंबर 2022

बजरी (दोहा संकलन ई-बुक) संपादक-राजीव नामदेव 'राना लिधौरी', टीकमगढ़

बजरी (दोहा संकलन ई-बुक) संपादक-राजीव नामदेव 'राना लिधौरी', टीकमगढ़
बजरी (दोहा संकलन ई-बुक) संपादक-राजीव नामदेव 'राना लिधौरी', टीकमगढ़

90-बुंदेली दोहा प्रतियोगिता -९०
प्रदत्त शब्द -बजरी (रेत)
संयोजक राजीव नामदेव राना लिधौरी टीकमगढ़ 
आयोजक- जय बुन्देली साहित्य समूह टीकमगढ़
प्राप्त प्रविष्ठियां :-
*1*
भवन गगनचुम्बी बने, नदियाॅं बनगइं खाइ।
बजरी खुदरइ रात में, बढ़गइ पुलिस कमाइ।।
***
"राम सेवक "हरिकिंकर " ललितपुर
*2*
बजरी-सी  है  जिंदगी, मुट्ठी  में  नइँ  आय।
रोके सें रुकबे नहीं, खिसक हराँ से जाय।।
****
                         अमर सिंह राय, नौगांव
*3*
सब कुतका पै बे धरें,सरकारी कानून।
सबरी बजरी बेंच कें,नेता पी गय खून।।
***
#जयहिन्द सिंह  जयहिन्द,पलेरा जिला टीकमगढ़# 
*4*
छान छान बजरी भरी, खूब करौ श्रमदान ।
राम लला कौ बन गऔ, मंदिर आलीशान।।
***
     एस आर सरल,टीकमगढ़
*5*
पंच तत्व की ईंट में, गारा भजन लगाय।
बजरी पै बाखर बना,बिधि नै द‌ई गहाय।।
***
भगवान सिंह लोधी "अनुरागी" हटा दमोह
*6*
बजरी, पथरा बैंचकें,डाँग करी वीरान।     
देख लालची आदमी,  कुदरत भी हैरान।।
  ***     
-संजय श्रीवास्तव, मवई (दिल्ली)
*7*
 ढोवे तसला  माइ जब, बनें इमारत तुंग।
बजरी पै खेलै लला,घरघूलन के संग।।
***
-आशा रिछारिया जिला निवाड़ी
*8*

बजरी  गंगा घाट की , मलमल  आंग  लगांय।
दाद खाज छाजन मिटै ,कोटि पाप कट जांय ।।
***
आशाराम वर्मा  "नादान" पृथ्वीपुर
*9*
बजरी भौतउ कीमती,सबके बनैं मकान ।
देखत में साजे लगैं ,नइ नइ बनैं डिजान  ।।
***
-शोभारामदाँगी नदनवारा
*10*
बजरी  ईंटा  जोर  कैं,  बन  रव  नओ  मकान।
नईं   ठिकानों  आज   को, जोरत  हैं  सामान।।
***
~विद्या चौहान, फरीदाबाद
*11*
नाम लिखौ ना रेत पै,हाथ कछू ना आय ।
आएगी जब इक लहर, नाम सकल मिट जाय।।
***
डा, एम, एस, श्रीवास्तव, पृथ्वीपुर
*12*
 ढूँडें  बजरी  ना मिलै, भई चील कौ मूत।
महँगाई यैसी बड़ी, सबखों पर गव कूत।।
***
अंजनी कुमार चतुर्वेदी श्रीकांत निवाड़ी
*13*
 कला लखी खजराव की, है बैकुंठ समान।
बिन बजरी गारे बिना, पुतरिन पारे प्रान।।
****
डॉ. देवदत्त द्विवेदी ,बडा मलेहरा
*14*
करत दलाली ठग रहे,बजरी बैंचें ठोक।
कोऊ रोकत है नहीं,भलै लगी है रोक।।
***
प्रदीप खरे मंजुल टीकमगढ़
*15*
बजरी कैसो टेम जो,थुबतइ नइ दिखाय। 
उम्रर हमाई देख लो, सबरी सरकत जाय ।।
***
- श्यामराव धर्मपुरीकर ,गंजबासौदा,विदिशा म.प्र.
*16*                 
 हीरा सी बजरी सुनो, नेता रहे चुराए ।
 रात दिन धंधो करें ,कोठी रहे बनाए 
                 ***
डा आर बी पटेल "अनजान', छतरपुर
*17*
आँग  भिड़ाकर गिलहरी , रइ बजरी   है डार |
कर रय  जित है नील नल , राम  सेतु  तैयार  ||
***
-सुभाष सिंघई, जतारा

[03/12, 8:14 AM] Ram Sevak Pathak Hari Kinker Lalitpur: प्रतियोगिता -९०
प्रदत्त शब्द -बजरी
भवन गगनचुम्बी बने, नदियाॅं बनगइं खाइ।
बजरी खुदरइ रात में, बढ़गइ पुलिस कमाइ।।१
दिन में बजरी नइं दिखत, लगत रात में ढेर।
रातइ रातै ढोऊत हैं, हो नइं पाय सबेर।।२
बजरी कौ ठेका मिलत,जो हो पउआदार।
पुलिस पकरतइ बस उनैं, जो हैं लट्ठ गवांर।।३
जो नइं बजरी लेत हैं,कैसें घर बन जात।
जा गलती सरकार की, पतौ न काय लगात।।४
अब क्रैसर की आरई, बजरी सबरी आज।
दोरें डरी दिखाउत बस, की बेरां इजात।।५
मौलिक/स्वरचित
"हरिकिंकर " भारतश्री, छंदाचार्य
[03/12, 12:56 PM] Amar Singh Rai Nowgang: अप्रतियोगी बुंदेली दोहे - बजरी
      दिनांक 03/12/2022

बजरी  से  बन  गय  कई, कर ई  को ब्यापार।
कटत खूब उनकी मजा, है जिनकी सरकार।।

कीमत  जांगा  की  रहे, वरना  रय  बे-मोल।
बजरी नदिया में डरी, मिलत शहर में तोल।।

बजरी में  घर नै बनै, कितनउँ  करौ  प्रयास।
मेनत मिट्टी में मिलत, मुफत मिलै अकरास।।

तस्कर  बजरी  ढो  रहे, दिन भर  सारी रात।
थाने  पैलउँ  से  बँधे, नेतन  हिस्सा  जात।।

मौलिक 
                            अमर सिंह राय 
                                 नौगांव
[03/12, 1:01 PM] Bhagwan Singh Lodhi Anuragi Rajpura Damoh: बुंदेली प्रतियोगी दोहा
विषय:- बजरी
सब नेतन नै कर ल‌ओ, बजरी पै अधिकार।
"अनुरागी" झूॅंकत फिरत,सब‌इ जबर के यार।।

नदियां कर रय खोखलीं,बजरी हींचत रात।
नेता माला माल भय, करें न सूदें बात।।

भब्य भवन पुल बांध अरु, गैल सड़क वा घाट।
बिन बजरी के न‌इॅं बनत,होदी पुंगा पाट।।

नाम चलत गुलगंज कौ, बजरी ग‌ई बिलाय।
महानदी‌ की रेत में,बजरा रहें मिलाय।।



भगवान सिंह लोधी "अनुरागी" हटा दमोह
[03/12, 1:11 PM] Rajeev Namdeo Rana lidhor: *बुंदेली दोहा:- बजरी (रेत)*

जितै  मिलत सीमेंट कौ , #राना  थौरौ   प्यार  |
बजरी गुम्मा  एक  हौं   , चुनत   रात   दीवार ||

बजरी कत #राना सुनो  , रूखड़  है  तकदीर |
सबने   कै  दइ तू   लगै   ,चूना के   सँग  हीर ||

बजरी हौ  नदिया   तरै , डली   रयै   बेकार |
#राना  ऊकौ  मौल उत, भवन  जितै  तैयार ||

नदिया में ना मोल है , ढड़तक  -लुड़कत जात |
निकरत  है  जब बायरै , #राना  कीमत   पात ||

#राना  बजरी  ना बने  , ना  नदिया  में  राँय | 
राम   नाम  सीमेंट   से , मिलबैं  बाहर  आँय ||
                  ***
*© राजीव नामदेव "राना लिधौरी" टीकमगढ़*
           संपादक- "आकांक्षा" पत्रिका
संपादक- 'अनुश्रुति' त्रैमासिक बुंदेली ई पत्रिका
जिलाध्यक्ष म.प्र. लेखक संघ टीकमगढ़
अध्यक्ष वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
नई चर्च के पीछे, शिवनगर कालोनी,
टीकमगढ़ (मप्र)-472001
मोबाइल- 9893520965
Email - ranalidhori@gmail.com
[03/12, 2:14 PM] Anjani Kumar Chaturvedi Niwari: अप्रतियोगी दोहे
*************
03 12 22
 विषय बजरी
*************

बजरी ईंट सिमिंट सें, घर मकान बन जात।
बनवै मानव देह जब,पंच तत्व मिल जात।।

ढूढें  बजरी  ना मिलै, भई चील कौ मूत।
महँगाई यैसी बड़ी, सबखों पर गव कूत।।

मूँगफली  बजरी  भुंजै, बडै  स्वाद  भरपूर।
 गुरु के संगै खाव तुम,खुश हो जैव हजूर।।

चोरी  सें  बजरी  बिकै,  लगवें दूनें दाम।
माँगौ सब सामान भव,परै राम सें काम।।

बालू  बजरी  रेवता,  सबइ  रेत के नाव।
अपनी अपनी हुनर सें, दोहा खूब बनाव।।

अंजनी कुमार चतुर्वेदी श्रीकांत निवाड़ी
[03/12, 2:33 PM] Subhash Singhai Jatara: भइया  बजरी को  महल , ई जीवन खौं  जान  |
आतइ  आँदी  मोत की , गिरतइ  धूर‌   समान ||

बजरी जैसै पल यहाँ , देखौ   खिसकत जात |
परो  चिमानो  आदमी ,  देखत  है    ऊँगयात ||

सुभाष सिंघई
[03/12, 2:48 PM] Promod Mishra Just Baldevgarh: शनिवार बुंदेली दोहा दिवस
            विषय ,,बजरी,,
*****************************
बजरी बिकी बजार में ,मिल गय पिया सुमन्ट
पानी पीकें भींट में ,चिपके कौशल जन्ट
******************************
सेतबंध पुल बांधवै,बंदरा लगे तमाम
बजरी गिल्लू डारवै , कत प्रमोद हे राम
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नदिया सें बजरी कड़ी ,माटी सें भइ ईंट
मिलगय सबइ सुमन्ट सें , कौशल बनगइ भींट
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माटी पथरा की सुनत , भइ बजरी सन्तान
लोहा मिलो सिमन्ट सँग ,बने प्रमोद मकान
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बजरी बजी बजार में , माँगी बिक रइ भौत
पक्के घर के भय चला , कच्चन की भइ मौत
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बजरी बज गइ जगत में ,जम गइ जमकें धाक
बजरी के बिन घरन की ,इज्जत होरइ खाक
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              ,, प्रमोद मिश्रा बल्देवगढ़,,
              ,, स्वरचित मौलिक,,
[03/12, 3:58 PM] Vidhaya Chohan Faridabad: बुंदेली दोहे
विषय- बजरी (रेत)

१)
कित्तो   नौनों  बचपनों, बजरी  महल  बनाय।
लहर बिगारत खेल कौ, बालक तउँ मुस्काय।।

२)
बजरी  बैठ  किनार  पै, देखत  जमना  धार।
कब  आ  हैं  घनश्याम जू, कब हूँ  है  उद्धार।।

३)
केवट  जू   की  नाव  में, सीता  राम  सवार।
बजरी  ने  भगवान  के, ले  लै  चरन  पखार।।

४)
जीना छत  दालान  घर, सब  चाहैं  आधार।
बिन बजरी कौनउ भवन, लेतइं नइं आकार।।

५)
मुठिया भर की जिंदगी, का ई की औक़ात।
सुखी  बजरी  हात से, तन तन छूटत जात।।

~विद्या चौहान
[03/12, 5:55 PM] Shobha Ram Dandi 2: अप्रतियोगी दोहा दि०-०३/१२/०२२ 
शोभारामदाँगी नंदनवारा 
बिषय--"बजरी"(रेत ) 
१=बजरी सिमंट से बना, महल अटारी  मोइ ।
गुम्मा जमा जमाय कैं, दस खंडा है  सोइ  ।।

२="दाँगी"बजरी काँ गई ,नरवा नाले साफ  ।
नदियन तकलौ  ना बची, नेता करैं न  माफ ।।
३-मन्दिरआलीशान है ,अवधनगर में  आज ।
बजरी पथरा की कला,  लख  "दाँगी" मुहताज  ।। 

४=दस दस खंडा के अटा, बजरी सैं बन जात  ।
कारीगर कि कला सभी,"दाँगी" लख भै खात  ।।

५=ढूँड़ै रेत मिलै नही ,कर वै चोरी भौत  ।
 "दाँगी" पकरे जाय तौ,समजो हो गइ मौंत  ।।
मौलिक रचना 
शोभारामदाँगी
[03/12, 6:22 PM] Brijbhushan Duby Baxswahs: बुंदेली दोहे
विषय -बजरी
1-बजरी की अटका परी,
मगा मगा   गय हार।
सस्ती मांगी मिलत रय,
चिंता नई सबयार।
2-बजरी भारी कीमती ,
लगा रव बृज संसार।
अगर समय पर नइ मिलत,
काम सबई बेकार।
3-नदियन सें बजरी मिलत,
बजरी धरी अपार।
बृजभूषण भारी बिकत,
भरो धरौ भण्डार।
बन गई अब रोजगार।
4-घर मकान जब जब बनत,
बजरी लेव मगवाय।
बृजभूषण बजरी बिना,
सबरी काम नशाय।
बृजभूषण दुबे बृज बकस्वाहा
[03/12, 6:34 PM] Prabhudayal Shrivastava, Tikamgarh: बजरी  अप्रतियोगी दोहे

बांदें   हैं  कसकें  मुठी  , बजरी  रिरक न जाय।
जीवन रिरकत जात है, कोऊ पकर न पाय।।

नफा और नुकसान सें, हतो न कोंन‌उँ  काम।
बेर  बेर  लिख देत  ते,  बजरी   पै  बौ नाम।।

बजरी  की भरमार ती,  भरे  नदी  के घाट।
ढूंढ़  ढूंढ़  छिपनी  धरी , करे  कैउ  गर्राट।।

बजरी की बखरी बनी,  भौत‌इ  आलीसान।
तनक‌इ सौ धक्का लगो,मिटगव  नाम  निसान।।

जोर जोर बजरी धरी  ,उर  सिमंट  मँगवाव।
कारीगर की  का  कबें ,  कै कें  फिर न‌इँ आव।।

             प्रभु दयाल श्रीवास्तव पीयूष टीकमगढ़