Rajeev Namdeo Rana lidhorI

बुधवार, 21 अक्टूबर 2015

जिला पुस्तकालय टीकमगढ़ के 85वें स्थापना दिवस‘ संचालन करते ‘राना लिधौरी’ दिनांक 18.10.2015

जिला पुस्तकालय के 85वें स्थापना दिवस‘ संचालन करते ‘राना लिधौरी’

  टीकमगढ़//‘ जिला पुस्तकालय के दिनांक 18.10.2015 को 85वें स्थापना दिवस पर विभिन्न प्रतियोगिता आयोजित की गई एवं विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किये गये। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वीरेन्द्र बहादुर खरे रहे तथा अध्यक्षता डाॅ.ऊषा सिंह ने की एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में व्यंगकार रामस्वरूप दीक्षित रहे। कार्यक्रम का संचालन राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने किया एवं कार्यक्रम का संयोजन पुस्तकालय प्रभारी विजय मेहरा ने किया।सभी का आभार प्रदर्शन परमेश्वरी दास तिवारी ने किया।

रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’,
अध्यक्ष म.प्र.लेखक संघ,टीकमगढ़,
मोबाइल-9893520965,   


rajeev namdeo rana lidhori

शनिवार, 17 अक्टूबर 2015

Blogg up date-18-10-2015

आपको सभी को दिल की गहराईयों से धन्यवाद..........
फेसबुक एवं ‘‘ब्लाग’’ की दुनिया के मेरे प्रिय मित्रों आप सभी के स्नेह और प्यार से आज मेरे ‘‘ब्लाग’’ पढ़ने वाले मित्रों की संख्या 3000 पार कर गयी है। आज दिनांक 18.10.2015 को सुबह 9 बजे जब मैने अपना ‘‘ब्लाग’’ खोला तो पाठकों की संख्या 3017 थीं साथ ही एक और देश (37वाँ देश) मंगोलिया के एक नये पाठक भी आज मेरे साथ जुड़ गये। मैं आप सभी भारत के साथ-साथ उन सभी 37 देशों के पाठकों को दिल से धन्यबाद देता हँू। जिन्होंने मेरा यह ‘ब्लाग’ दिल से पढ़ा औरमेरा हौंसला बढ़ाया ।
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‘‘निर्दलीय’’ सा.पत्र (भोपाल) वर्ष-44, .अंक- 11-17 अक्टूवर 2015 में पेज-06 पर हिन्दी ग़ज़ल-कैसे बिठाते पास में’’

‘‘निर्दलीय’’ सा.पत्र (भोपाल) संपादक-कैलाश श्रीवास्तव ‘आदमी’
वर्ष-44, .अंक- 11-17 अक्टूवर 2015 में पेज-06 पर
राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ टीकमगढ़  (म.प्र.)की
प्रकाशित हिन्दी ग़ज़ल-कैसे बिठाते पास में’’rajeev namdeo rana lidhori



बुधवार, 14 अक्टूबर 2015

‘‘शब्द शिल्पियों के आसपास’’भोपाल से प्रकाशित मासिक पत्रिका के अक्टृवर 2015 अंक


धन्यवाद संपादक श्री राजुरकर राज जी
‘‘शब्द शिल्पियों के आसपास’’भोपाल से प्रकाशित मासिक पत्रिका के अक्टृवर 2015 अंक में प्रकाशित मेरे ग़ज़ल संग्रह  ‘राना के नज़राना’ की सचित्र विमोचन रपट

‘‘अट्ट्हास’’ के अंक अक्टूवर 2015 में राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’,टीकमगढ़ का व्यंग्य ‘शिक्षक बेचारा काम का मारा।

लखनऊ उ.प्र.से प्रकाशित
 हास्य व्यंग्य की पत्रिका ‘‘अट्ट्हास’’ के अंक अक्टूवर 2015
 में मेरा राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’,टीकमगढ़ का
 पेज 46-47 में प्रकाशित
 एक व्यंग्य ‘शिक्षक बेचारा काम का मारा"


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सोमवार, 12 अक्टूबर 2015

संचालन करते राना लिधौरी- Date-11-10-2015

संचालन करते राना लिधौरी
.दिनांक-11.10.2015 जनाब पार्षद रामकुमार रैकवार जी के दौलतखाने में ‘तंज़ीम बज़्में अदब’ की मासिक नशिस्त का संचालन करते युवा शायर राजीव नामदेव राना लिधौरी’टीकमगढ़ । प्रोग्राम की सदारत जनiब हाजी ज़फ़रउल्ला खां ‘ज़फ़र ने की एवं खुसूशी मेहमान जनाब हाजी हनीफ साहब रहे।
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शनिवार, 10 अक्टूबर 2015

साहित्य क्रांति (गुना) जुलाई 2015



^साहित्य क्रांति* ¼गुना½ 
जुलाई 2015 में
 श्री भारत विजय बगेरिया की पुस्तक ^आत्म मंथन* की 
मेरी(राजीव नामदेव ^राना लिधौरk*द्वारा लिखी गयी समीक्षा 
प्रकाशित हुई है।rajeev namdeo rana lidhori
पुस्तक समीक्षा-‘आत्म मंथन (आध्यात्मिक निबंध)       
लेखक- भारत विजय बगेरिया
समीक्षक:- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’(टीकमगढ़)   
प्रकाशन वर्षः- सन् 2015
प्रकाशन-मिथिला प्रकाशन,गुना (म.प्र.)
मूल्यः-100रु.        पेज-88
बच्चों के लिए उपयोगी-‘‘आत्म मंथन’‘

        टीकमगढ़ जिले के चर्चित बाल साहित्यकार श्री भारत विजय बगेरिया की यह आठवीं पुस्तक ‘आत्म मंथन’ प्रकाशित होकर आयी है। इसके पूर्व उनकी काव्य कलश,काव्य सरिता,108 चालीसा,ग़ज़ल संध्या,बाल साहित्य कहानियाँ,बाल साहित्य कविताएँ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है। वैसे बगेरिया जी ने अपनी पहचान एक बालकवि के रूप बनायी है।
        इस संग्रह में भी बच्चों के प्रति उनका लगाव उभरकर सामने आया है तभी तो उन्होंने बच्चों के लिए बहुत ही छोटे-छोटे से आध्यात्मिक निबंध (जिन्हें हम यदि आलेख कहे तो उचित होगा) इस पुस्तक में लिखे है। इन निबंधों के विषय भले ही गंभीर है ,लेकिन है बहुत उपयोगी ‘गागर में सागर’ को समेटे हुए। भाषा सरल है शब्द एवं भाषा शैली भी एकदम सपाट है जो बच्चों को आसानी से समझ में आ जायेगी।
        श्री बगेरिया जी की इस पुस्तक ‘आत्म मंथन’ में कुल 88 पेज है जिसमें 48 पेजों में 48
निबंध दिये गए है जो कि बहुत ही संक्षिप्त में है तथा विभिन्न विषयों पर है। कुछ विषय बहुत गंभीर है तो कुछ आधुनिकता से ओतप्रोत है। सभी निबंधों में नीचे ‘सार संक्षेप’ दिया है जो कि बहुत अच्छा और उपदेशात्मक हैं। यही इस पुस्तक का सबसे उपयोगी भाग है जिससे पाठक कुछ प्रेरणा ले सकेगे।
        पेज 26 पर ‘मौत’ शीर्षक से अपने आलेख में लेखक लिखते है कि मौत हमेशा शानदार होनी चाहिए अर्थात यादगार होनी चाहिए जिसे लोग हमेशा याद रखे सुंदर भाव है। पेज 54 पर ‘भूख’ शीर्षक से अपने आलेख में लेखक लिखते है कि भूख दो प्रकार की होती है एक पेट की भूख और दूसरी पैसो की भूख। बिलकुल सही बात कही है आज लोग पैसो की भूख के आगे पेट की भूख को भूल गये। पेट की भूख तो शांत हो जाती है किंतु पैसों की भूख कभी शांत नहीं होती है। इसी प्रकार पेज 55 पर ‘प्यास’ आलेख में भी वे प्यास के दो प्रकार बताते हुए लिखते है कि पहली प्यास मानव शरीर के लिए आवश्यक है, तो दूसरी प्यास ईश्वर मिलन की प्यास अनंत होती है जो कि धार्मिक लोगों संत महात्माओं आदि में होती है।
        दूसरे भाग में श्री भारत विजय बगेरिया जी को मिले सम्मानों की छायाप्रति एवं उनकी उप-
लब्धियों के चित्र दिये गए है चित्र यदि रंगीन होते तो पुस्तक की सुंदरता में चार चाँद लग जाते। प्रकाशक व मुद्रक बधाई के पात्र है।
        पुस्तक का आवरण पृष्ठ बहुत ही आकर्षक है तथा पुस्तक के शीर्षक से पूरी तरह मेल खाता है। छपाई भी बहुत बढि़या है। कुछ व्याकरण संबधी त्रुटियों एवं कला पक्ष को नज़रअंदाज़ कर दिया जाये तो भावपक्ष काफी प्रबल है तथा हरा भरा है। चूंकि भाषा बहुत सरल एवं साधारण है इसलिए आसानी से सभी के समझ में आ जायेगी, इस दृष्टि से यह पुस्तक बच्चों एवं पाठकों के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगी ऐसा हम विश्वास से कह सकते है।  इस आठवीं कृति के प्रकाशन पर श्री बगेरिया जी को हार्दिक बधाई।
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        समीक्षक-/ राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
        संपादक ‘आकांक्षा’ पत्रिका
        अध्यक्ष-म.प्र लेखक संघ,टीकमगढ़
        शिवनगर कालौनी,टीकमगढ़ (म.प्र.)-472001
         मोबाइल-09893520965
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