Rajeev Namdeo Rana lidhorI

रविवार, 3 जून 2018

‘पर्यावरण’ हुई म.प्र.लेखक संघ की 236वीं गोष्ठी














tikamgarh rajeev namdeoDate 3-6-2018 Tikamgarh
वो दिन दूर नहीं जब पानी इंजेक्शन से मिलेगा...........राना लिधौरी

‘पर्यावरण’ हुई म.प्र.लेखक संघ की 236वीं गोष्ठी

टीकमगढ़// डे केयर राजमहल परिसर के सभागार में साहित्यिक संस्था म.प्र. लेखक संघ जिला इकाई टीकमगढ़ की 236वीं मासिक गोष्ठी ‘पर्यावरण’ पर केन्द्रित आयोजित की गयी। जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार बी.एल. जैन ने की जबकि मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार सियाराम अहिरवार, विशिष्ट अतिथि के रूप में लखौरा से पधारे बुन्देली कवि गुलाब सिंह यादव ‘भाऊ’ रहे।
गोष्ठी का शुभारंभ सीताराम राय ‘सरल’ ने सरस्वती वंदना कर यह कविता पढ़़ किया-
पैदल नहीं है जाना वाहन को है जमाना।
पाल्यूशन बढ़ रहा है, हल्ला है क्यों मचाना।।
ग्राम पलेरा के रविन्द्र यादव ने पढ़ा- आओ पर्यावरण बचाएँ,नित नये वृ़क्ष लगाये।
देवे हवा उर दवा फूल फल जे पानी बरसाये।।
म.प्र.लेखक संघ के जिलाध्यक्ष राजीव नामदेव ‘‘राना लिधौरी’ ने अपनी ‘पानी’ पर व्यंग्य कविता पढ़ी-
वो दिन दूर नहीं जब पानी इंजेक्शन से मिलेगा, पोलियो ड्राॅप की तरह बस दो बूंद ही मिलेगा।
गुना के मातादीन यादव ‘अनुपम’ ने पढ़ा-वृक्षों से सारे सुख लइयौ।ऊँचे है जिनके भाग जनम लव भारत में
पं.हरि विष्णु अवस्थी ने दोेहे पढ़े- जन जमीन अरन जानवर जल जंगल ये पाँच।
जो हित चाहों सृष्टि कर, इन्हें न आवे आँच।।
वीरेन्द्र चंसौरिया ने गीत सुनाया- पर्यावरण संतुलन बिगड़ा तो जीना होगा मुश्किल।
सोचो,समझो और विचारो रहे सुरक्षित अपना कल।।
ंपरमेश्वरी दास तिवारी ने पढ़ा-जिन्दगी है छोटी सी हर पल में खुश हूँं।
 दुखों का समुंदर है फिर भी खुश हूँ।।
डी.पी. शुक्ला ने कविता पढ़ी-धरती का श्रंृगार,कर मिटाया प्रहार।
सियाराम अहिरवार ने कविता पढ़ी-प्रकृति से खिलवाड़ करने लगे है लोग।
तभी तो बेमौत मरने लगे है लांग।।
ग्राम लखौरा के गुलाब सिह भाऊ ने पढ़ा-धरती के है बेटा पेड़ सूदे होय चाय टेढे।
एन.डी.सोनी- प्रकृति को मान चुनौती दे रहा है आफतें भी मोल खुद ही ले रहा।।
प्रभुदयाल श्रीवास्तव ने कविता पढ़ी-पर्यावरण नसा नई जाबै, जाँ ताँ बिरछ लगा लइयौ,जेइ बात सबसें कइयौ
प्रमोद गुप्ता ने सुनाया- विद्या दान के बिना स्वागत मान के बिना,जो जीवन है अधूरो जल जंगल के बिना।।
अजीत श्रीवास्तव ने व्यंग्य- ‘बा बरसात का’ सुनाया।
इनके अलावा आर.एस शर्मा, बी.एल जैन,भारत विजय बगेरिया,एन.डी.सोनी,डी.पी.यादव, धर्मदास साहू, बालमुकुंद प्रजापति, सहित अनेक कवियों ने भी रचना पढ़ी।
कार्यक्रम का संचालन डी.पी.शुक्ला’ ने किया तथा
सभी का आभार परमेश्वरीदास तिवारी ने माना।
रपट-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी‘‘
अध्यक्ष-म.प्र.लेखक संघ टीकमगढ़
मोबाइल-9893520965
E-Mail- ranalidhori@gmail.com

मंगलवार, 1 मई 2018

व्यंग्य-‘‘उपवास में छोले भटूरेे’-’राजीव नामदेव ‘‘राना लिधौरी’

व्यंग्य-‘‘उपवास में छोले भटूरेे’’
(राजीव नामदेव ‘‘राना लिधौरी’’)
भारत में उपवास रहने के सैंकडों तरीके हंै, ठीक उसी प्रकार उपवास को अनेक तरीको से रखा जाता है। कहा भी गया है कि-‘‘ जितनी भक्ति उतनी शक्ति’’ इसीलिए आधुनिक युग में  पहले की तरह निरा आहार एवं बिना जल पिये निर्जला व्रत (निर्जला एकादशी) भी रहने की परम्परा है जो कि धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है। समय के साथ-साथ इसमें अनेक बदलाव आये हैं। अब पहले viyangजैसे के ऋषि-मुनि एवं भक्त नहीं रहे और ना ही उनकी भक्ति अब तो दिखावा अधिक हो रहा है।
वर्तमान में जहाँ कुछ महिलायें ‘तीजा’ (हरतालिका व्रत) एवं ‘करवाचैथ’ रहती हैं उनमें से अधिकांश तो नई साड़ी की लालच में रहती है। तो कुछ अपना वजन कम करने के चक्कर में व्रत रहकर एक तीर से अनेक शिकार करती है पहला वे उपवास रहकर कुछ प्रतिशत पुण्य कमा लेती हैं। दूसरा एक मंँहगी सी साड़ी पति से जबरन खरीदवा कर ही दम लेती है। तीसरा उस नयी साड़ी को पहनकर पडौसनों का जलाने में असीम सुख की अनुभूति प्राप्त करती हैं।
नव दुर्गा में नौ दिन सुबह से नयी-नयी साड़ियाँ पहनकर देवी जी को जल चढ़ाने के बहाने दूसरी औरतों का जलाने में परम आनंद की प्राप्ति करती हैं।  पाँच-दस मिनिट के इसी क्षणिक सुख से लिए वे दिनभर भूखे रहकर व्रत का पुण्य कमा लेती है हाँ रात में भी वे इस दिन अन्न ग्रहण नहीं करती और शाम होते हुए दर्जनभर केले,एक-आध किलो मौसमी फल,एक-दो पाव दूध, एक बडे कटोरा में सबूदाने की खीर, एक प्लेट साबूदाने की खिचड़़ी आदि कुल मिलाकर बस जरा सा फलाहार कर लेती हंै और अगले दिन कौन सी साड़ी पहनेगी इस पर गहन शोध करती हैं कुछ सास-ननदों एवं अपने बच्चों से ही उनकी राय पूंछ लेती है लेकिन पहनती वहीं साड़ी हैं जो स्वयं की पहले से ही पसंद कर रखी है।
भारतीय पुरूष उपवास बहुत कम रखते है। कुछ लोग नवदुर्गा, गणेश चतुर्थी, सोमवती अमावस्या, शिवरात्रि, राम नवमीं, कृष्ण जन्माष्टमी आदि विशेष अवसरों पर व्रत रखते है। उपवास लोग रख तो लेते है किन्तु कहा गया है कि-‘‘ भूखे पेट न होय भजन गोपाला’’ की तर्ज पर वे फलाहार अपने स्वादुसार ही ग्रहण करते हैं। चााहे वह आलू-गाजर का हलवा हो या साबूदाने की खिचड़ी,खोवे से बनी सभी मिठाइयाँ खा लेते है सब चलती है भले ही उसमें सबकुछ मिला हो गया। बस थोड़ा सा भगवान को भोग लगाया और फिर कम से कम पाव भर या आधा किलो तो पेट के हवाले कर ही देते है।
अब ऐसे में जिन्हें शुगर की बीमारी हो वे तो मिठाई खा ही नहीं सकते मजबूर है। इसीलिए वे मिठाई को यह कहते हुए हाथ तक नहीं लगाते कि आजकल कहाँ शुद्ध खोया मिलता है? वे नमकीन चीजों को पंसद करते है अब चूंकि नमक खाना उपवास में निषेध है लेकिन इसका तोड़ भी हमारे पूर्वज दे गये है कि उपवास में 
...................2
समुद्री नमक के स्थान पर सेंधा नमक खाया जा सकता है। कुछ लोग सिंघाड़े के आटे की पुरियाँ तक खाते और अब तो हद ही हो गयी एक प्रसिद्ध राजनेता ने हाल ही में उपवास रखा और फलाहार के रूप में छोले-भटूरे तक खा लिये। उनके प्रशंसक बहुत खुश है कि चलो अब वे जब भी उपवास रखेगे तो हम भी उनके साथ उपवास रहेगे,कम से कम छोले भटूरे खाने का आनंद तो मिल ही जायेगा।
हो सकता है आगे चलकर मुंबई की कोई हीरोइन पानी पूरी खाकर भी व्रत रखने लगे या हो सकता हैं कि मद्रास कि कोई हीरोइन इडली-दौसा खाकर उपवास रहने लगे। नया जमाना है। सब स्वतंत्र है। कोई कुछ भी कर सकता है कोई कुछ भी खा-पी सकता है। लोग तो उपवास रहकर भी झूठी कसमें खा लेते है और जब नेता कोयला, चारा तक खा कर पचा सकते है ये भी एक नेता है फिर इन्होंने तो मात्र छोले भटूरे ही खाये है। वो भी उपवास में तो क्या गजब हो गया। भई विदेशों में तो कोई उपवास रहता नहीं है फिर वे क्या जाने उपवास में क्या-क्या खाया जा सकता है और क्या नहीं। 
खैर वे अभी बच्चे है शादी हो जाने तो सब समझने लगेगे। लेकिन सवाल यह है कि वे शादी कब करेंगे तो उनका है कि- जब अटल जी करेंगे तो उनके बाद करेगें वे हमारे बहुत सीनियर हैं। हम उनका बहुत सम्मान करते हैं हम उनके नक्शे कदम पर ही चल रहे है। शायद इसी बहाने हमारी कुछ इज्जत होने लगे वर्ना लोगो ने तो हमें पप्पू बना दिया है।
अब यह तो स्वभाविक है कि जब हम पप्पू है तो हम पप्पू जैसी हरकतें तो करते ही रहेगंे। वर्ना लोग कैसे फिर हमें याद करेंगे।
---
व्यंग्यकार-    राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
संपादक ‘आकांक्षा पत्रिका
अध्यक्ष-म.प्र लेखक संघ,टीकमगढ़
शिवनगर कालौनी,टीकमगढ़ (म.प्र.) पिनः472001
मोबाइल-9893520965
 E Mail-   ranalidhori@gmail.com
 Blog - rajeev rana lidhori.blogspot.com


प्रमाण पत्र:-
प्रमाणित किया जाता है कि मेरे उपरोक्त व्यंग्य अप्रकाशित,अप्रसारित एवं मौलिक है।
(राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’)

सोमवार, 30 अप्रैल 2018

शनिवार, 14 अप्रैल 2018

बड़ा मलहरा में गुप्तेश की 8वीं पुण्यतिथि हुआ ‘कवि सम्मेलन’ Date 13-4-2018










bundeli kavi sammelan बड़ा मलहरा में गुप्तेश की 8वीं पुण्यतिथि हुआ ‘कवि सम्मेलन’  Date 13-4-2018

(आयोजक म.प्र.लेखक संघ तहसील इकाई बड़ामलहरा)

बड़ा मलहरा़// स्व. श्री बाबू लाल गुप्त ‘गुप्तेश’ जी की 8वीं पुण्य तिथि पर म.प्र. लेखक संघ की तहसील इकाई बड़ामलहरा द्वारा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया देर रात तक श्रोताओं ने कवि सम्मेलन का आनंद लिया।
अध्यक्षता  नरेन्द्र असाटी जी ने की जबकि मुख्य अतिथि के रूप में श्री सीताराम जी असाटी एवं, विशिष्ट अतिथि के रूप में नंद किशोर जी शुक्ला रहे।
कवि सम्मेलन में 
 बुन्देली श्रंृगार के सुप्रसिद्ध कवि डाॅ. अवध किशोर जड़िया हरपालपुर,
 हास्य व्यंग्य के कवि राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ टीकमगढ़ ,
ओज के कवि शिवभूषण गौतम छतरपुर,
 बुन्देली कवि गुलाब सिंह यादव लखौरा,
गजलकार वी.के. गुप्ता लवकुशनगर, शायर अनवर खान साहिल टीकमगढ,
 डाॅ.बहादुर सिंह परमार छतरपुर,
बुन्देली कवि डाॅ. देव दत्त द्विवेदी एवं भरत अग्रवाल ‘अनुज’ बड़ामलहरा ने अपनी कविताओं से खूब रस बर्षा की।
 इस अवसर पर लेखक संघ की बड़ा मलहरा इकाई कवियों का शाल श्रीफल से सम्मान किया।
 कवि सम्मेलन का संचालन मनोज तिवारी ने किया तथा सभी का आभार संयोजक एवं तहसील अध्यक्ष भरत अग्रवाल ‘अनुज’ ने माना।
रपट-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी‘‘
अध्यक्ष-म.प्र.लेखक संघ टीकमगढ़
मोबाइल-9893520965
Mail- ranalidhori@gmail.com