तसव्वुर ने तिरी तस्वीर हर जानिब सजा दी है........
*बज्में अदब की 273वीं माहना नशिस्त-*
टीकमगढ़// दिनांक -18.4.2026शहर की उर्दू अदब की एकमात्र संस्था ब़ज़्में अदब की 273 वीं माहना नशिस्त शकील खान के दौलत कदे में आयोजित की गयी। तन्जी़म बज़्में अदब के मीडिया प्रभारी राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि तन्ज़ीम बज़्में अदब में इस बार कर्वी चित्रकूट से मशहूर शायर शायर हाजी सैयद अख़्तर साहब की सदारत में नशिस्त हुई।
इस माह की दी गई मिसरह तरह-‘तसव्वुर ने तिरी तस्वीर हर जानिब सजा दी है’ पर शानदार क़लाम पढ़े।
हाजी सैयद अख़्तर ने ग़ज़ल कही- मुसलसल कर रहे हो तुम छुपाने की जिसे कोशिश।
तुम्हारी आँखों ने वो बात पहले ही बता दी है।।
इकबाल फ़ज़ा ने ग़ज़ल कही- समंदुर ने मेरी कश्ती कनारे पर लगा दी है
न जाने किसने साहिल से मिरे हक में दुआ दी है।।
राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने ग़ज़ल कही-जरा सी उसने ताकत अपनी दुनिया को दिखा दी है
के दुश्मन आ गया है फर्श पर ऐसी सज़ा दी है।
वफ़ा शैंदा ने ग़ज़ल कही- बहुत रोते हैं वो आँसू भी रोके से नहीं रुकते।
हमारी दास्ताने ग़म उन्हें किसने सुना दी है।।
खांलिद वेग’ ने सुनाया- उन्हें खालिद बताओ कैसे फिर हम भूल पायेंगे।
वतन के वास्ते जिस जिसने जां अपनी लुटा दी है।।
शकील खान ने ग़ज़ल कही- तुम्हारी याद हमने इस तरह दिल से भुला दी है।
ग़ज़ल जैसे किसी ने रेत पर लिखकर मिटा दी है।।
अनवर खान साहिल ने शेर कहे-तुम्हारी बज़्म ने सच बोलने की ये सज़ा दी है।
ज़रा सी झोपड़ी थी गाँव में वो भी जला दी है।।
सलीम खान ने ग़ज़ल कही- चलो आओ ऐ दीवानों ऐ परबानों चले आओ।
किसी ने शाम से पहले यहाँ शमां जला दी है।।
इनके अलावा कारी मोहम्मद अखलाक साहब,जाबिर गुल’, पूरनचन्द्र गुप्ता ने भी अपने कलाम पढ़े। नशिस्त की निजामत अनवार खान साहिल ने की व सभी का शुक्रिया अदा कारी मोहम्मद अखलाक साहब ने किया
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*रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’*
मीडिया प्रभारी-तन्जीम ‘बज़्में अदब’
टीकमगढ़ (म.प्र.) मोबाइल-9893520965
सफ़र ज़िन्दगी का बहुत मुक्तसर है ...बज्में अदब की माहना नशिस्त-
टीकमगढ़// दिनांक -14-2-2026 नगर की उर्दू अदब की एकमात्र संस्था ब़ज़्में अदब की माहना नशिस्त शकील खान के दौलत कदे में आयोजित की गयी। नशिस्त की सदारत म.प्र.साहित्य अकादमी द्वारा एवार्ड प्राप्त साहित्यकार एवं शायर राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने की एवं निजामत शायर इकबाल फ़ज़ा ने की। तमाम शायरों ने दी गयी मिसरह तरह-‘सफ़र ज़िन्दगी का बहुत मुक्तसर है’ पर अपने-अपने शानदार क़लाम पढ़े।
बुजुर्ग शायर कारी अख़लाक़ साहब ने कलाम पढ़ा-
वो अहले खिरद हैं हम अहले जुनूं हैं।
मेरी उनसे अनबन इसी बात पर है।।
राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने ग़ज़ल कही -
मुहब्बत की खुशबू अगर चे उधर है।
मेरे दिल की बेताब हालत इधर है।।
वफा शैदा ने कलाम पढ़ा- गुनाहों से भूला हुआ हर बशर है।
रहे याद रब को मगर सब खबर है।।
शकील खान ने ग़ज़ल कही- मिरे प्यार का पहला-पहला असर सफ़र है
नई मंज़िलें है नई हर डगर है।
इकबाल फ़ज़ा ने ग़ज़ल कही- कभी तो गुलामी का समरा मिलेगा।
तिरा आस्ताना है उर मेरा सर है।।
चांद मोहम्मद ‘आखिर’ ने ग़ज़ल कही- नफरतों की यकीनन जलेगी।
हमारी वफाओं में इतना असर है
कभी तो गुलामी का समरा मिलेगा,
आस्ताना है उर मेरा सर है।।
शायरा सबरा सिद्दीकी ने पढ़ा- है सदियों का सामां न पाल की खबर है।
तसव्वुर अय नादान तेरा किधर है।
अनवर साहिल ने शेर कहे-कई पंछियों का यही एक घर है। इसे मत गिराओ पुराना शजर है।।
सलीम खान ने ग़ज़ल कही-
सलीम अपना रखना क़दम देखकर तुम।
ये राहे मुहब्ब बहुत पुरख़तर है।।
शायरा गीतिका वेदिका ने ग़ज़ल कही-
जो बीती है हम पे किसे क्या खबर है।
दुआ जो भी की थी हुई बेअसर है।।
युवा शायर जाबिर गुल ने शेर कहे-
ये तक़रार कुछ और ही कह रही है।
मुहब्बत से कहदो मुहब्ब अगर है।।
इनके अलावा पूरन चन्द्र गुप्ता एवं रविन्द्र यादव ने भी अपने कलाम पेश किये।
*रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’*
टीकमगढ़(म.प्र.) मोबाइल-9893520965
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