सफ़र ज़िन्दगी का बहुत मुक्तसर है ...बज्में अदब की माहना नशिस्त-
टीकमगढ़// दिनांक -14-2-2026 नगर की उर्दू अदब की एकमात्र संस्था ब़ज़्में अदब की माहना नशिस्त शकील खान के दौलत कदे में आयोजित की गयी। नशिस्त की सदारत म.प्र.साहित्य अकादमी द्वारा एवार्ड प्राप्त साहित्यकार एवं शायर राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने की एवं निजामत शायर इकबाल फ़ज़ा ने की। तमाम शायरों ने दी गयी मिसरह तरह-‘सफ़र ज़िन्दगी का बहुत मुक्तसर है’ पर अपने-अपने शानदार क़लाम पढ़े।
बुजुर्ग शायर कारी अख़लाक़ साहब ने कलाम पढ़ा-
वो अहले खिरद हैं हम अहले जुनूं हैं।
मेरी उनसे अनबन इसी बात पर है।।
राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने ग़ज़ल कही -
मुहब्बत की खुशबू अगर चे उधर है।
मेरे दिल की बेताब हालत इधर है।।
वफा शैदा ने कलाम पढ़ा- गुनाहों से भूला हुआ हर बशर है।
रहे याद रब को मगर सब खबर है।।
शकील खान ने ग़ज़ल कही- मिरे प्यार का पहला-पहला असर सफ़र है
नई मंज़िलें है नई हर डगर है।
इकबाल फ़ज़ा ने ग़ज़ल कही- कभी तो गुलामी का समरा मिलेगा।
तिरा आस्ताना है उर मेरा सर है।।
चांद मोहम्मद ‘आखिर’ ने ग़ज़ल कही- नफरतों की यकीनन जलेगी।
हमारी वफाओं में इतना असर है
कभी तो गुलामी का समरा मिलेगा,
आस्ताना है उर मेरा सर है।।
शायरा सबरा सिद्दीकी ने पढ़ा- है सदियों का सामां न पाल की खबर है।
तसव्वुर अय नादान तेरा किधर है।
अनवर साहिल ने शेर कहे-कई पंछियों का यही एक घर है। इसे मत गिराओ पुराना शजर है।।
सलीम खान ने ग़ज़ल कही-
सलीम अपना रखना क़दम देखकर तुम।
ये राहे मुहब्ब बहुत पुरख़तर है।।
शायरा गीतिका वेदिका ने ग़ज़ल कही-
जो बीती है हम पे किसे क्या खबर है।
दुआ जो भी की थी हुई बेअसर है।।
युवा शायर जाबिर गुल ने शेर कहे-
ये तक़रार कुछ और ही कह रही है।
मुहब्बत से कहदो मुहब्ब अगर है।।
इनके अलावा पूरन चन्द्र गुप्ता एवं रविन्द्र यादव ने भी अपने कलाम पेश किये।
*रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’*
टीकमगढ़(म.प्र.) मोबाइल-9893520965
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