Rajeev Namdeo Rana lidhorI

सोमवार, 30 मार्च 2026

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. श्री मोहन सिंह जू परमार छिपरी पुण्य तिथि पर 28मार्च को आयोजित कार्यक्रम एवं कवि सम्मेलन की रपट समग्र, प्रस्तुति -राजीव नामदेव राना लिधौरी, टीकमगढ़

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मोहन सिंह जू देव परमार की स्मृति में कवि सम्मेलन हुआ-

टीकमगढ/ दिनांक -28.3.2026 को ग्राम छिपरी में स्वतंत्रता  संगाम  सेनानी  एवं कर्मयोगी स्व. श्री मोहन सिंह जू देव परमार की द्वि़तीय  पुण्यतिथि पर एक भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया किया। इसके पूर्व सुंदर कांड का पाठ किया गया।
द्वीप प्रज्ज्वलन व सरस्वती पूजन एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मोहन सिंह जू देव परमार के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने पश्चात मुख्य अतिथि के रूप में अपने उद्वोधन में दिवान साहब छत्रपाल सिंह जू देव जिला पंचायत सदस्य खरगापुर ने शासन एवं जन प्रतिनिधियों ने निवेदन किया है कि छिपरी में एक चैराहे  का नाम मोहन सिंह जू देव परमार के नाम से रखा जाए एवं वहाँ पर उनकी मूर्ति स्थापित की जावे तथा कार्यक्रम स्थल पर एक स्मृति पार्क बनाया जावे।
जिला निर्वाचन अधिकारी श्री शैलेन्द्र सिंह जी, सांसद प्रतिनिधि अनुराग वर्मा जी, श्री जंडैल सिंह चैहान (मातौल), सुरेन्द्र सिंह बुंदेला बिजराबन,रामप्रसाद प्रजापति, सियाराम नायक आदि ने भी अपने उद्वोधन में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के बारे में  लोगों को विस्तार से  बताया कि किस प्रकार से मोहन सिंह जू देव  परमार एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के  साथ-साथ एक समाज सेवी भी थे उन्होनें साँप बिच्छू आदि जहरीले जीवों से काटे हुए अनेक लोगों को अपने  उपचार से पुर्नजीवित किया है। उनके  पुत्र एवं कार्यक्रम के संयोजन श्री वीरेन्द्र सिंह परमार ने बताया कि पिताजी ने जीवन भर सदा सत्य बोलने का प्रण लिया था और जीवनभर सत्य की बोला। सभी कवियों एवं अतिथियों का शाल श्रीफल से सम्मान किया गया।
 द्वितीय सत्र में सरस्वती वंदना के पश्चात कवि सम्मेलन शुभांरभ करते हुए कवयित्री  हेमा बुखारिया ने पढ़ा- आजादी की जंग लड़ी आजादी का पैगाम  लिखा।
और अपने  पास रखी वो गोली जिस पर अपना नाम लिखा।।
अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि उमाशंकर खरे‘उमेश’(पृथ्वीपुर) ने सुनाया-
आजादी के लिए लाखों बलिदान हो  गए।
ओढकर तिंरगा कुर्बान हो गए।।
राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’टीकमगढ़ ने दोहे  सुनाए-
छोटे से  इस गाँव में किया बड़ा ही काम।
युगों-युगों तक अमर रहे मोहन जू का नाम।।
नारायणदास भट्ट (सिंगरोली) ने पढ़ा-मोहन जी वीरता की निशानी है।
 प्रेम ही समर्पण, प्रेम की कहानी है।
सुखदेव व्यास (गुरसराय) ने सुनाया-पूजे गये यहाँ  सुखदेव जो, ज़िन्दगी औरों के खातिर जो जिये।
गोविन्द्र सिंह गिदवाहा (मड़ाबरा) ने पढा-
 मातृभूमि के बने सजग प्रहरी,आजादी के रथ पर सवार।
बुन्देलखण्ड के  स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय मोहन सिंह जू दवे परमार।। विशाल कड़ा (बड़ोराघाट) ने कविता पढी-
अपना सर्वस्व लुटा करके जो राष्ट्र वंदना गाता है।
भारत के सच्चे अर्थो में वो सेनानी कहलाता है।।
इनके अलावा कवि राजेश तोमर तनु (पृथ्वीपुर),राजेन्द्र विदुआ,दयालीराम विश्वकर्मा (टीकमगढ), सियाराम नायक (छिपरी), चंदन सिंह  बुन्देला (लिधौरा),सुनीता विश्वकर्मा, हीरालाल राजपूत ने भी शानदार काव्य पाठ कर श्रोताओं को बांधे रखा। कवि सम्मेलन का संचालन ओमप्रकाश तिवारी ‘कक्का’(ज्यौरा) ने किया तथा सभी आभार वीरेन्द्र सिंह  परमार ने किया।
रपट-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’,
कार्यक्रम मीडिया प्रभारी
टीकमगढ़, मोबाइल-9893520965

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