सोमवार, 5 जनवरी 2015

ओरछा में हुआ राष्ट्रीय आँचलिक बुन्देली कवि सम्मेलन हुआ-date-3-1-2015










ओरछा में हुआ राष्ट्रीय आँचलिक बुन्देली कवि सम्मेलन हुआ-



  टीकमगढ़//बुन्देलखण्ड साहित्य एवं संस्कृति परिषद भोपाल के संयोजन में तथा ओरछेश महाराज मघुकर शाह जू देव के संरक्षक में होटल बुन्देलखण्ड रिवर साइड ओरछा में  बुन्देली का राष्ट्रीय कवि सम्मेलन आयोजित किया गया  जिसमें  मुख्य अतिथि महाराज मधुकर शाह जू देव रहे व अध्यक्षता प्रसिद्व साहित्यकार रामस्वरूप ‘स्वरूप’ जी सेवढ़ा ने की तथा विशिष्ट अतिथि कैलाश मडबैया जी भोपाल रहे।
 संचालन डाॅ आशा पाण्डे ग्वालियर ने किया।
 हेमा बुखारिया पृथ्वीपुर ने  सरस्वती वंदना ततपश्चात परमलाल तिवारी खजुराहो ने पढ़ा-कैसे करो जो वसूल मन कलेश है भारी।
।डाॅ. देवदत्त द्विवेदी बडामलहरा ने रचना पढी-ई मन खौ अजमा कै देखो,
                                                   निर्मल भाव बना कै देखो।
                     राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने बुन्देली हायकू सुनाये-
                            बुन्देली बानी, सुनत लगत,है एनई नोनी।
                            गुटका खाकै बिगरी मुइया,बनी टुइया।
                               दुद नीखरा मिलत है नइया भूखीं गइयाँ।।

डाॅ. आशा पाण्डे ग्वालियर ने पढ़ा-कितै दुकै हो बनवारी, जिनै राधा जू है प्यारी।
कैलाश मडवैया भोपाल ने पढ़ा-जिन     फागुन के दिना हर आँगन में खिली जुदईयाँ,
नये नये जोरा में फागुल बनी दुलइैया।।
शिवेन्द्र ंिसंह शिवेन्द्र भिण्ड ने पढ़़ा- मै मानव हूँ तो मानव को शिष्टाचार करता हँू।
भूपेन्द्र सिंह सेवढ़ा ने कविता पढ़ी- निकरत मोरी बात हिय में जौन कौऊ नै जानी,
  जा धरती बुन्देलखण्ड की नारी वीर कहानी।।
अरविन्द्र त्रिपाठी मऊरानीपुर ने रचना पढ़ी-माँ के आँचर की छाँव जीवन का हर दुःख भूल गये,                                          कौमल स्पश्र पाकै सब भूल गये।
रामगोपाल रैकवार  टीकमगढ़ ने पढ़ा- भुनसारे उठकै सब ढँूढ रय उरैया,
                                                  मान्स का जनावर का और चिरैया।।
दीनदयाल तिवारी टीकमगढ ने पढ़ा-    सोस विचार कें चलने भैया।
उमाशंकर उमेश पुथ्वीपुर ने पढ़ा-गुइया अबै लो न आये सइयां,लगन लगी लौलइयाँ।
राजनीश दुवे ओरछा ने पढ़ा-    तोरे नैना करेजे भरै रै गये,दके छाती पै गत्कौ खडे रै गयै।
संतोष पटेरिया खजुराहो’ ने पढ़ा-     बदरिया वरसो पिया के देश,
                                              अँगना वरसो अँगनिया बरसो।
श्यामचरण सनम’ डबरा ने पढ़ा-कर दई नाक में दम रे जौ मौबलिया ने।
                                            कर दओ चैपट रूपया भौया ने।
डाॅ.लखन लाल जी खरे करैरा ने कहा-भओ चैपट राजा कौ राज,कौऊ सुनने वारो नईया।।
सुरेश सोनी ललितपुर,ने पढ़ा-मताई मोखो नई मारौ पटई में
ओम प्रकाश तिवारी जौरा ने सुनाया-बिना दीन के हम रय गये,न इतई कै रय न उतई केैे रय।।
कु.इन्द्रप्रभा खरे पुथ्वीपुर ने पढ़ा-नदिया किनारे है प्यारौ सौ गाँव।
                                          सौधी सी माटी और पीपर की छाँव।।

इनके अलावा डाॅ. शिरोमणि सेवढ़ा,डाॅ.जे.पी.रावत टीकमगढ़,संतोष कुमार,पुरूषोत्तम नारायण ललितपुर, पूरन चन्द्र गुप्ता टीकमगढ़ आशा तिवारी, प्यारेलाल बेधडक मऊरानीपुर,रामानंदन पाठक नैगुवा,अभिनंदन गोइल टीकमगढ़,देवी दयाल कुशवाहा आरछा आदि ने भी अपनी रचनाएँ सुनायींे। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राजीव नामदेव राना लिधोरी ने जारी एक प्रैस विज्ञप्ति में दी है।                           
                            रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
            ,                अध्यक्ष म.प्र.लेखक संघ,टीकमगढ़,
                                                      मोबाइल-9893520965,   

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