Rajeev Namdeo Rana lidhorI

बुधवार, 30 दिसंबर 2020

नये साल का स्वागत- राजीव नामदेव 'राना लिधौरी' Happy New year

दोहे- नये साल का स्वागत

*1*
नये साल का कर रहे,
स्वागत है श्रीमान।
यश कीरत सम्मान हो,
होवे सब धनवान।।

*2*
नये साल में कर रहे,
 बिनती ये इंसान।
कोरोना का नाश हो,
हे ईश्वर, भगवान।।

*3*
कोरोना के काल में,
मना रय नया साल।
संकट अभी टला नहीं,
कैसे हो खुशहाल।।

*4*
मास्क लगाएं चेहरे,
आंखे करती बात।
नये साल में नाचते,
बीती सारी रात।।
****
@ राजीव नामदेव "राना लिधौरी" टीकमगढ़
           संपादक "आकांक्षा" पत्रिका
जिलाध्यक्ष म.प्र. लेखक संघ टीकमगढ़
अध्यक्ष वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
नई चर्च के पीछे, शिवनगर कालोनी,
टीकमगढ़ (मप्र)-472001
मोबाइल- 9893520965
Email - ranalidhori@gmail.com
Blog-rajeevranalidhori.blogspot.com

मंगलवार, 29 दिसंबर 2020

दुष्यंत कुमार-ग़ज़ल सम्राट(राजीव नामदेव राना लिधौरी)


दुष्यंत कुमार ने हिंदी ग़ज़ल को नये ऊंचाइयां दी थीं

आलेख - राजीव नामदेव राना लिधौरी, टीकमगढ़

साहित्य में ग़ज़ल विधा को एक नई ऊंचाइयां  दुष्यंत कुमार जी ने दी थीं। आपका हिन्दी एवं उर्दू दोनों भाषाओं पर समान अधिकार था तथा खासतौर पर हिंदी ग़जलों को साहित्य में उचित मान सम्मान के साथ-साथ खूब प्रसिद्धि दिलाने में बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। दुष्यंत कुमार जी की कुछ ग़ज़लें कालजयी है। देश के लाखों शायरों के वे आदर्श रहे हैं, उनकी ग़ज़लों को पढ़कर हजारों नये शायर बन गये हैं।

दुष्यंत कुमार जी का जन्म-१सितम्बर १९३३ को राजपुर नावड़ा बिजनोर उत्तर प्रदेश में हुआ था तथा 
आपकी मृत्यु-३० दिसंबर १९७५ को हुई थी। आपकी ग़ज़लों सैंकड़ों लोगों शोध किया तथा पी.एच-डी.की है। अनेक कक्षाओं के पाठ्यक्रम में आपकी ग़ज़लों को पढ़ाया जाता है। आपकी याद में हर साल जंयती एवं पुण्य तिथि पर कवि सम्मेलन एवं मुसायरा देशभर में आयोजित किये जाते है।

धर्मवीर भारती को दुष्यंतजी का गजलपत्र-

दुष्यंत कुमार की गजल एवम कवितायें जनांदोलनों का नारा बनकर आज भी उद्वेलित करती हैं . विधानसभाओं और संसद में सबसे ज्यादा उद्धरित किये जाने वाले कोई कवि हैं तो वे दुष्यंतजी ही है. १सितम्बर १९३३ को राजपुर नावड़ा बिजनोर में जन्मे दुष्यंतजी की कर्मभूमि भोपाल रही. ३० दिसंबर १९७५ को वो हमारे बीच नहीं रहे. लेकिन हिंदी शाइरी में जो स्थान उनका है उसके निकट तक कोई नहीं पहुंच पाया. दुष्यंतजी को गंभीर और क्रांतिधर्मी कवि मन जाता है लेकिन उनमे हास्य और मनोविनोद भी भरपूर था. उनका समग्र साहित्य ऑनलाइन व् पुस्तकों, चाहने वालो की जुबांनो पर है लेकिन मनोविनोद से भरा एक गजलपत्र आज धर्मवीर भारती की पत्रकारिता पढ़ते हुए सामने आया. यह गजलपत्र उन्होंने भारतीजी को पारिश्रमिक बढ़ाने को लेकर लिखा था जो धर्मयुग के २३ मार्च १९७५ के अंक में छपा था. धर्मवीर भारती का जवाब भी गजल में ही दिया। पढ़िए.

पत्थर नहीं है आप तो पसीजिए हुजूर
संपादकी हक़ तो अदा कीजिये हुजूर
अब जिंदगी के साथ जमाना बदल गया
पारिश्रमिक भी थोड़ा बदल दीजिये हुजूर
कल मैकदे में चैक दिखाया था आपका
वो हँस के बोले इससे जहर पीजिये हुजूर
शायर को सौ रुपये मिले जब गजल छपे
हम जिन्दा रहे ऐसी जुगत कीजिये हुजूर
लो हक़ की बात की तो उखाड़ने लगे हैं आप
शी..होठ सील के बैठ गए लीजिये हुजूर
निवेदक ..दुष्यंत कुमार
(धर्मवीर भारती का जवाब )

जब आपका गजल में हमें खत मिला हुजूर
पढ़ते ही यकबयक ये कलेजा हिला हुजूर
ये धर्मयुग हमारा नहीं सब का पत्र है
हम घर के आदमी हैं हमी से गिला हुजूर
भोपाल इतना महगा शहर तो नहीं कोई
महँगी का बांधते हैं हवा में किला हुजूर
पारिश्रमिक का क्या है बढ़ा देंगे एक दिन
यह तर्क आपका है बहुत पिलपिला हुजूर
शाइर को यहाँ भूख ने ही किया है यहाँ अजीम
हम तो जमा रहे हैं वही सिलसिला हुजूर
आपका.. धर्मवीर भारती

(साभार-माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार वि.वि द्वारा प्रकाशित पुस्तक,..धर्मवीर भारती 'पत्रकारिता के सिद्धान्त'..लेखक-साकेत दुबे, में इस प्रसंग का दिलचस्प तरीके से उल्लेख है )

   दुष्यंत कुमार जी को हिंदी ग़जलों का प्रथम ग़ज़लकार कहा जाये तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। आपकी कही ग़ज़लें आज भी उतनी ही लोकप्रिय हैं  जितनी उस समय थीं। आप ग़जलों के सम्राट है।

ऐसे दिव्य महापुरुष दुष्यंत कुमार जी को हमारा शत् शत् नमन हैं बंदन है।
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©आलेख- राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
संपादक आकांक्षा पत्रिका
अध्यक्ष मप्र लेखक संघ टीकमगढ़
अध्यक्ष वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
नई चर्च के पीछे, शिवनगर कालोनी टीकमगढ़ (मप्र)-472001
मोबाइल- 9893520965

शनिवार, 26 दिसंबर 2020

अटल बिहारी वाजपेई जी को समर्पित कविता- राजीव नामदेव 'राना लिधौरी', टीकमगढ़ (मप्र)

माननीय श्रीअटल जी को समर्पित’
कविता-‘हे अटल तुम...’

हे अटल तुम तो सचमुच अटल हो,
तुम्हारी कीर्ति अजर और अमर हो।
जीवन भर देश की सेवा करते रहे,
भाजपा के सरोवर के स्वर्ण कमल हो।।

कारगिल युद्ध कराके आपने,
पाक के नापाक इरादे नाकाम कर दिये,
दुश्मन के दाँत खट्टे कर दिये।
देश में चैंन और अमन का, 
काम ऐसे करते सदा रहे हो,
विपक्षी भी आपको सर झुकाते रहे।

आज देश को आपकी जरूरत है,
आप फिर से भारत में ही जन्म लेना।
आज के नेताओं को राजनीति का पाठ सिखाना,
वे राजनीति भूल कर कूट नीति करने लगे हैं।
नेता शब्द को ही बदनाम करने लगे है।

आपकी कविताएँ भी क्या धूम मचाती हैं,
युवाओं में जोश और चेतना जगाती हैं।
फिर ऐसी क्या बात हो गयी कि
मौत से आपकी ठन गयी।

अचानक रूठ के हमसे चले गये,
सारी दुनिया को स्तब्ध कर गये।
आपका यूँ चले जाना अच्छा नहीं लगा,
जैसे चला गया हो कोई हमारा सगा।

हम आपको कभी नहीं भुला पाएँगे।
किये जो काम आपने वो सदा याद आयेगें।।
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   © राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
संपादक ‘आकांक्षा’ पत्रिका
  अध्यक्ष-म.प्र लेखक संघ,टीकमगढ़
अध्यक्ष वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
महामंत्री-अ.भा.बुन्देलखण्ड साहित्य एवं संस्कृति परिषद
 शिवनगर कालौनी,टीकमगढ़ (म.प्र.)
  पिनः472001 मोबाइल-9893520965

मंगलवार, 22 दिसंबर 2020

भोर तरैया (बुंदेली नाटक) समीक्षा- राजीव नामदेव "राना लिधौरी", टीकमगढ़


नाटक समीक्षा:-‘‘भोर तरैया’’ (बुंदेली नाटक)

लेखक/ निर्देशक:- संजय श्रीवास्तव 
समीक्षक:- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’(टीकमगढ़)


ग्रामीणों की दशा को बयां करता नाटक ‘भोर तरैया’
                                  -राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ 


              ‘भोर तरैया’ नाटक के लेखक व निर्देशक श्री संजय श्रीवास्तव जी ने अपने इस नाटक में ग्रामीणजनों के संघर्ष और वर्तमान पंचायती व्यवस्था पर  चोट करते हुए बेहतरीन नाटक लिखा हैं पात्रों के संवाद बुन्देली भाषा के लालित्य लिए हुए बहुत जोरदार है पढ़नेवालों एवं देखने वालों दोनों के हृदय में सीधे भीतर तक उतर जाते है। नाटक देखकर बहुत आनंद प्राप्त होता है। 
        दलित सामाज दर्द एवं गरीब की दुर्दशा का बहुत मार्मिक चित्रण किया गया है किस प्रकार दबंगों द्वारा पंपापुर की महिला आरक्षित सीट होने पर एक बेडनी को जबरन सरपंच के लिए खड़ा किया जाता है और फिर उसे लाठी और धमकी के दम पर निर्विरोध जिता दिया जाता है वह नाम मात्र की सरपंच रहती है और उसके नाम से लाखों रूपए गाँव के एक दबंग महिपाल द्वारा डकार लिये जाते तथा उसका किस प्रकार से शोषण किया जाता है। 
         यह वर्तमान में आज भी गाँवों के देखने को मिल जाता है। यह कटु सत्य है ऐसी घटनाएँ अक्सर होती है जहाँ दलित महिला सीट होती है, नाटक में शहर से वापिस आयी महिला द्वारा अब आवाज उठायी जाती है और उसकी निडरता से गाँव में लोग जागरूक हो जाते है और फिर उस दबंग महिपाल का विरोध करते है तथा उससे नहीं डरते है तो गाँव की दशा ही सुधर जाती है और गाँव वालों को भोर की तरैया दिखाई देने लगती एक नयी उम्मीद और आशा के साथ इस नाटक का अंत सुखांत है और हमें बहुत कुछ सीख देता है। हमें किसी से नहीं डरना चाहिए एवं हमें अपनी हिम्मत से काम लेना चाहिए।
नाटक में बुन्देली कार्तिक गीत राई, एंव बधाई आदि नत्यों को भी बीच-बीच में दिखाया गया है जो कि मनोरजंन प्रदान करता है तथा बुन्देलखण्ड और बुन्देली संस्कृति की एक सुदंर झलक भी दिखाता है।
               नाटक के सभी पात्र उमदा है दबंग ‘महिपाल’ की आवाज बहुत बुलंद है और उनका अभिनय लाजबाब है तो वही पर ‘बेडनी’ का अभिनय भी कमतर नहीं है, शहर से वापिस आयी महिला का भी अभिनय अपना विशेष प्रभाव छोड़ता है। ‘अंधे आदमी’ का अभिनय और उनके द्वारा गाया गया पे्ररणा गीत भी बहुत प्रभावित करता है। सभी पात्रों ने बेहतरीन अभिनय किया है। नाटक के संवाद कसे हुए है चुटीले एवं व्यंग्यवाण छोड़ते संवाद सभी को आनंदित करते है।
            नाटक के सफल लेखन, निर्देशन एवं मंचन के लिए श्री संजय श्रीवास्तव जी एवं पाहुना जन समिति को हार्दिक बधाईयाँ
    ----------000000---------
राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
संपादक ‘आकांक्षा’ पत्रिका
  अध्यक्ष-म.प्र लेखक संघ,टीकमगढ़
  जिलाध्यक्ष-वनमाली सृजन केन्द्र,टीकमगढ़
शिवनगर कालौनी,टीकमगढ़ (म.प्र.)
पिनः472001 मोबाइल-9893520965
E Mail-   ranalidhori@gmail.com
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सोमवार, 21 दिसंबर 2020

वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ की सभी गोष्ठियां

वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ की सभी गोष्ठियां
वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़(म.प्र.) का प्रतिवेदन-
‘‘राना लिधौरी वनमाली सृजन टीकमगढ़ केन्द्र के जिलाध्यक्ष बने’
टीकमगढ़// रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय एवं रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वकला एवं संस्कृति केन्द्र भोपाल द्वारा वनमाली सृजन केन्द्रों का राष्ट्रीय सम्मेलन रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय भोपाल में आयोजित किया गया जिसमें 10 राज्यों से 114 सजृन केन्द्रों से 150 साहित्यकार उपस्थित रहे। वनमाली सृजन पीठ के अध्यक्ष श्री संतोष चैबे जी द्वारा 114 वनमाली सृजन केन्द्रों के अध्यक्षों की घोषणा करते हुए टीकमगढ़ का जिला अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ को मनोनीत किया हैं। 

1-वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़(म.प्र.) केंन्द्र का किया गया गठन-
टीकमगढ़ रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय एवं रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वकला एवं संस्कृति केन्द्र भोपाल द्वारा संचालित वनमाली सृजन केन्द्रों टीकमगढ़ (म.प्र.) का का विधिवत गठन किया गया केन्द्राध्यक्ष श्री राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी ने केन्द्र का गठन इस प्रकार से किया-
नाम पद मोबाइल नं.
1- श्री राजीव नामदेव‘राना लिधौरी’ - अध्यक्ष 9893520965
2- श्री यदुकुल नंदन खरे  - उपाध्यक्ष  9179344874
3- डाॅ. रूखसाना सिद्दीकी   - सचिव 9806221955
4- श्री सियाराम अहिरवार    - सह सचिव 9893125144
5- डाॅ. एन.एम अवस्थी    - कोषाध्यक्ष 9425360465
6- गीतिका वेदिका   - प्रसार सचिव-9826079327- 
7-श्री सीताराम राय‘सरल’  - सम्मानित सदस्य                                           8839562727
8- श्री रविन्द्र यादव, - सम्मानित सदस्य 7879144979
9- श्री अजीत श्रीवास्वत,  - सम्मानित सदस्य 8827192845
10-श्री रामगोपाल रैकवार, - सम्मानित सदस्य 8085153778
11-श्री व्ही. व्ही. बगेरिया - सम्मानित सदस्य 9893277557
12-श्री वीरेन्द्र चंसौरिया - सम्मानित सदस्य 9893673111
13-श्री विजय मेहरा - सम्मानित सदस्य 9893997657
,14-श्री परमेश्वर तिवारी   - सम्मानित सदस्य 9424923125
15-श्री जफ़रउल्ला खां‘ज़फ़र’ - संरक्षक सदस्य  9893864090
16-श्री हरविष्णु अवस्थी  - संरक्षक सदस्य 9407873003
-रपट-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
जिलाध्यक्ष-वनमाली सृजन केन्द्र,टीकमगढ़
टीकमगढ़ (म.प्र.) मोबाइल-9893520965

2-वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ की ‘कथा कोश’ पर हुई कथा गोष्ठी’-
टीकमगढ़// रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय एवं रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वकला एवं संस्कृति केन्द्र भोपाल द्वारा संचालित वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ की ‘‘कथा गोष्ठी’’,दिनांक 31.3.2019 को ‘आकांक्षा’ पब्लिक स्कूल,टीकमगढ़ में आयोजित की गयी। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कथाकारा डाॅ.रूखसाना सिद्दीकी ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में बल्देवगढ़ से पधारे वरिष्ठ कहानीकार श्री यदुकुल नंदन खरे जी रहे एवं विशिष्ट अतिथि के रूप के रंगकर्मी एवं कथाकारा गीतिका वेदिका रहीं।सरस्वती बंदना कर गोष्ठी का शुभांरभ करते हुए सीताराम राय ‘सरल’ ने गीत पढ़ा- हे माँ वीणा वादिनी वर दे, अज्ञान घटा,जला ज्योति ज्ञान कर दे।
सर्वप्रथम वनमाली सृजन पीठ केन्द्र टीकमगढ़ के अध्यक्ष एवं संयोजक राजीव नामदेव ‘राना 
लिधौरी’ ने केन्द्र के प्रमख उद्देश्य,के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वनमाली सृजन केन्द्र में कथाओं पर केन्द्रित गोष्ठियाँ आयोजित की जायेगी,जिसमें नगर के कथाकारों को एक सशक्त मंच मिलेगा तथा उनकी कहानियों को विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होने का अवसर प्रदाय किये जायेगे, केन्द्र द्वारा एक पुस्तकालय स्थापित किया जायेगा,जिसमें लेखकों की पुस्तकों के अलावा वर्तमान में प्रकाशित प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकायें भी पढ़ने को मिलेगी।
‘कथा मध्यप्रदेश’ कहानी खण्ड-1 की समीक्षा हाजी ज़फ़रउल्ला खा ‘ज़फ़र’ ने की उन्होंने कहा कि-‘म.प्र.कथा कोश’ में इंसान के जीवन से जुड़ी कथाओं का कोश है। कोश में प्रकाशित अधिकांश कथायें उस समय के सामाजिक परिवेश,दशा एवं समस्याओं को प्रदर्शित करती है।’ 
श्री अजीत श्रीवास्वत ने अपनी समीक्षा में कहा कि-‘शोध पर शोध को लुभाती कथा कोश’,दाम थोड़ा अधिक है लेकिन कृति अनोखी बन पड़ी है।’ श्री आर.एस.शर्मा ने कहा कि-‘यह कोश नई पीढ़ी को भाषा और संवाद से जोड़े रखे, इस दृष्टि से सम्पादक श्री सतोष चैबे जी का प्रयास सराहनीय है।’
‘कथा मध्यप्रदेश’ कहानी खण्ड-2 की समीक्षा करते हुए अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने कहा कि- ‘‘सौ सालों के कथा इतिहास को 6 खण्डों में लगभग 200 कथाओं के साथ-साथ 35 लेखों प्रकाशन किया गया है जो कि एक बहुत की श्रम साध्य कार्य है इस क्रमिक शोध कार्य हेतु श्री संतोष चैबे जी सहित पूरा संपादक मंडल बधाई का पात्र है।’’ 
कालेज के पूर्व प्राचार्य डाॅ. एन.एम. अवस्थी ने कहा कि- ‘‘इस कोश में श्रेष्ठ कहानियों को प्रकाशित किया गया है ये कहानियाँ इतिहास में मील का पत्थर साबित होगी।गीतिका वेदिका ने कहानी ‘जलगाँव’ कहानी सुनायी। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहीं डाॅ. रूखसाना सिद्दीकी ने कहा कि-‘‘ये कथाकोश कहानियों का उपवन है। कहानियाँ समाज का दर्पण होती है। पं.हरिविष्णु अवस्थी ने कहा कि- कहानियाँ मनुष्य के जीवन में अमिट छाप छोड़ती है। ये मनुष्य का जीवन होती है। बल्देवगढ़ से पधारे यदुकुल नंदन खरे ने कहा कि- ‘‘कहानियों वर्तमान घटनाओं पर केन्द्रित होती है इसमें देशकाल का अपना एक महत्व होता है।’’
 इसमें अलावा परमेश्वरी दास तिवारी,वीरेन्द्र चंसौरिया,विजय मेहरा,रन्विद्र यादव,विकास नापित,राजेश्वर पाराशर ‘राज’ आदि ने भी अपने विचार रखे। गोष्ठी का संचालन अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी ने किया तथा सभी का आभार परमेश्वरी दास तिवारी ने माना।
-- -राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
अध्यक्ष एवं संयोजन-वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
मोबाइल-9893520965
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3-वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ की ‘कथा कोश’ पर हुई कथा गोष्ठी’-

टीकमगढ़// रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय एवं रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वकला एवं संस्कृति केन्द्र भोपाल द्वारा संचालित वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ की ‘‘कथा गोष्ठी’’,दिनांक 28.7.2019 को ‘आकांक्षा’ पब्लिक स्कूल,टीकमगढ़ में आयोजित की गयी। गोष्ठी की अध्यक्षता कथाकारा गीतिका वेदिका जी ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार श्री हरिविष्णु अवस्थी जी रहे एवं विशिष्ट अतिथि के रूप के शायर  हाजी जफरउल्ला खां ‘जफ़र’ रहे। सरस्वती बंदना कर गोष्ठी का शुभांरभ करते हुए रविन्द्र यादव ने पढा-
तुमसे बहती ज्ञान की गंगा, तुम से तन मन चंगा मंगा। माँ जय हो,मैया जय हो।
सर्वप्रथम वनमाली सृजन पीठ केन्द्र टीकमगढ़ के अध्यक्ष एवं संयोजक राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने बताया कि अब जुलाई माह से 12 साहित्यिक पत्रिकायें वनमाली सृजन केन्द्र में पढ़ने के लिए आने लगी हैं जिसमें प्रमुख रूप से हंस, वागर्थ, कथा देश, तद्भव, अक्षरा,समय के पाखी, रंग संवाद,पहले पहल, इलेक्ट्रिनिकी,आदि के साथ-साथ अनेक प्रसिद्ध लेखकों की पुस्तकंे भी पढ़ने को मिलेगी। इससे पाठकों को और भी अधिक पढ़ने को मिलेगा और वे नया सृजन कर सकेगे। टीकमगढ़ केन्द्र द्वारा एक पुस्तकालय स्थापित किया गया है,जिसमें लेखकों की पुस्तकों के अलावा वर्तमान में प्रकाशित प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकायें भी पढ़ने को मिलने लगी है। 
‘कथा मध्यप्रदेश’ कहानी खण्ड-3 की समीक्षा करते हुए पं.हरिविष्णु अवस्थी जी ने कहा कि-‘म.प्र.कथा कोश’ में संपादक ने कहानियों का चयन बहुत सोच विचार कर किया है संकलन की लगभग सभी कहानियाँ अच्छी है जो पाठकों को बाँधे रखने की शक्ति रखती है कहानियों की भाषा सहज,सरल एवं बोघगम्य है सम्पादक बधाई के पात्र है। मुझे माता चरण मिश्र की कहानी ‘शेरवानी’ बहुत पंसद आयी।
श्री अजीत श्रीवास्वत ने ‘कथा मध्यप्रदेश’ कहानी खण्ड-4 समीक्षा करते हुए कि-इसमें ‘आस पास से उठाई कहानियाँ है। इस खंड में कहानियों में विविधता भी हैं उन्होंने कहा कि महिला कथाकारों पर भी इस प्रकार का कोश निकलना चाहिए। ‘स्वीटी’ कहानी और ‘पन्ना लाल का जूता’ विशेष पसंद आयी है।
‘कथा मध्यप्रदेश’ कहानी खण्ड-4 की पाठकीय प्रक्रिया देते हुए अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने कहा कि- इस खंड में वैसे तो सभी कहानियाँ अच्छी है लेकिन मुझे राजेन्द्र चंद्र कांत राय की कहानी ‘‘गुलामों का गणतंत्र’’बहुत पसंद आयी। इनके अलावा ‘कुतुब एक्सपे्रस’,श्री विलास गुप्ते की कहानी ‘‘ ‘‘पन्नालाल के जूते ’’भी पसंद आयी। कथाआंे पर क्रमिक शोध कार्य हेतु श्री संतोष चैबे जी सहित पूरा संपादक मंडल बधाई का पात्र है।’’ 
गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहीं गीतिका वेदिका ने कहानी ‘नीलू’ कहानी सुनायी। सियाराम अहिरवार ने ‘‘अपने पैरों पर’ कहानी सुनायी। इसके अलावा परमेश्वरी दास तिवारी,रविन्द्र यादव,विकास नापित,राजेश्वर पाराशर ‘राज’ ,श्रीमती उमा पाराशर, आदि ने भी अपने विचार रखे। गोष्ठी का संचालन अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी ने किया तथा सभी का आभार रविन्द्र यादव ने माना।
-- -राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
अध्यक्ष एवं संयोजन-वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
मोबाइल-9893520965
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4 ‘‘आख्यान का आंतरिक संकट ’’पुस्तक की समीक्षा) 

टीकमगढ़// रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय एवं रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वकला एवं संस्कृति केन्द्र भोपाल द्वारा संचालित वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ द्वारा गांधी जी की 150वीं जयंती पर’ पुस्तक समीक्षा गोष्ठी ,‘आकांक्षा’ पब्लिक स्कूल,टीकमगढ़ में दिनांक 2.10.2019 को गांधी जयंती पर आयोजित की गयी। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार पं.हरिविष्णु अवस्थी जी ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में बुजुर्ग शायर श्री हाजी जफरउल्ला खां ‘जफर’ जी रहे एवं विशिष्ट अतिथि के रूप के साहित्यकार श्री सियाराम अहिरवार रहे।  गोष्ठी के प्रारंभ में श्री सीताराम राय ‘सरल’ द्वारा सरस्वती वंदना पढ़ी गयी तत्पश्चात् गीतकार वीरेन्द्र चंसौरिया ने गांधी जी का प्रिय भजन ‘रघुपतिराघव राजा राम’’ सुमुधर कंठ ने सुनाया। गोष्ठी में ‘कथा मध्यप्रदेश’ कहानी खण्ड-6 की समीक्षा करते हुए कथा लेखिका एवं रंगकर्मी गीतिका वेदिका ने विनोद कुशवाहा की कहानी ‘प्रथा’ के बारे में बताया है यह कहानी बलि पर आधारित है तथा जिसमें एक बच्चा किसना जो कि बकरी के बच्चे को प्यार करने लगता है। कहानी प्रथा के नाम पर एक कुप्रथा है।
 राजेश्वर राज पाराशर ने संगीता झा की ‘आँखें’ कहानी की समीक्षा करते हुए कहा कि यह कहानी आशा की अनुभूति है। आखों की चमक एक सकारात्मकता है अपने बच्चों को निरंतर आगे बढ़ते देखते रहने के लिए। एक गरीब ओटो वाले एवं उनकी बेटी की कहानी है।
 अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने संगीता गुंदेचा की कहानी ‘‘लकडी का बाक्स’’ पर समीक्षा करते हुए कहा कि यह एक छोटे बच्चे की कहानी है जिसमें बच्चा कचरें में भी सोचता है कि जीवन है  और उसे घर का कचरा फेंकने में बहुत कष्ट होता है। वह एक लकड़ी के बक्से में कचरे को छुपकर रख लेता है लेकिन माँ उस कचरे को देख लेती है और उसे बाहर फेंक आती है। ‘आख्यान का आंतरकि संकट’ की समीक्षा करते हुए राना लिधौरी ने कहा कि इस पुस्तक में 5 भागों में लगभग 100 विद्वानों के विमर्श दिये गये है तथा सन् 1993 से सन् 2000 तक दिये गये स्व.वनमाली चैबे कथा सम्मानों के बारे एवं जिन्हें अब तक प्राप्त हो चुका है उनके बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी है।ं कार्यक्रमों की विस्तत रपट भी उनके विद्वानों व्याख्यानों सहित प्रकाशित की गयी है जो कि महत्वपूर्ण एवं पठनीय है।
सीताराम राय ‘सरल’ ने भी ‘आख्यान का आंतरकि संकट’ की समीक्षा करते हुए कहा है कि यह पुस्तक में विभिन्न विचारों का संगम हैं। कहीं- कहीं अंगेजी के शब्द खटकते हैं। आम पाठकों के लिए न होकर गंभीर कथा प्रेमी पाठकांे के लिए यह पुस्तक उपयोगी एवं पठनीय हैं। 
लाइब्ररियन विजय मेहरा ने महात्मा गांधी जी पर अपने विचार व्यक्त किये वहीं साहित्यकार रामगोपाल रैकवार ने लालबहादुर शास्त्र जी के बारे में बताया और शहीदों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि आज की पीढ़ी शहीदों को भूलती जा रही है।इनके अलावा पं.हरिविष्णु अवस्थी, सियाराम अहिरवार, जफरउल्ला खां जफर’, गुलाब सिंह यादव भाऊ, श्रीमती उमा पाराशर, भारत विजय बगेरिया आदि ने भी अपने विचार रखे। गोष्ठी का संचालन वीेरेन्द्र चंसौरिया ने किया व आभार वनमाली सृजन केन्द्र केे अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी ने माना। 
--- -राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
अध्यक्ष एवं संयोजन-वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
  टीकमगढ़ मोबाइल-9893520965
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5-गीतिका की ‘सहेली की डायरी’का हुआ आन लाइन लोकार्पण
(समर्पयामि फाउण्डेशन व वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ का संयुक्त आयोजन)
टीकमगढ़// समर्पयामि फाउण्डेशन एवं वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में तथा महेन्द्र भीष्म समर्पयामि कला एवं शोध संस्थान के संयोजन में दिनांक 2.6.2020 को ‘अथ सहेली संवाद’ आनलाइन कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध कथाकार श्री महेन्द्र भीष्म जी, लखनऊ (किन्नर कथा व मै पायल के लेखक) ने की व मुख्य अतिथि श्री राजेश्वर वशिष्ठ जी,गुडगाँव (याज्ञसेनी और अगस्त के राम के लेखक) तथा विशिष्ट अतिथि श्री सहावेंद्र प्रताप सिंह जी ललितपुर (सहेली की डायरी की भूमिका लेखक) व सुश्री अजंलि सिंह मंगलमुखी, अवध से रहे। सर्वप्रथम सरस्वती व केशव बंदना की गयी तत्पश्चात् सुप्रसिद्ध कहानीकारा गीतिका वेदिका (टीकमगढ़) द्वारा रचित कहानी संग्रह ‘सहेली की डायरी’ का आनलाइन विमोचन किया गया।
राजेश्वर वशिष्ठ जी (गुडगाँव) ने सहेली की डायरी की समीक्षा पढ़ी पुस्तक को पठनीय बताते हुए उसकी कहानी शुभ, नीलू, आदि पर अपनी समीक्षा करते हुए कहा कि-ये कहानी ग्रामीण परिवेश में रची गयी है। बहुत बढ़िया और पठनीय कहानियाँ है।
 राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’,टीकमगढ़ (जिलाध्यक्ष वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़) ने अपनी समीक्षा में कहा कि- कहानी संग्रह में नीलू,‘जलदान’, ‘तीन पग’ मौसी  आदि कहानियाँ बहुत पंसद आयी  शुभ कहानी एवं नीलू कहानियों में हिन्दी के साथ-साथ बुन्देली का भी पुट मिलता है लेखिका की कहानियों में बीच-बीच में कविताएँ भी पढ़ने को मिलती हंै ‘सहेली की डायरी’ कहानी संग्रह पठनीय है।षायर चाँद मोहम्मद आखिर टीकमगढ़ ने समीक्षा के दौरान कहा कि-बैसे तो सभी कहानियाँ अच्छी है लेकिन मुझे ‘जलदान’ एवं ‘विदाई कहानी बहुत अच्छी लगी। ग़ज़लकार उमाशंकर मिश्र टीकमगढ़ ने समीक्षा में कहा कि -सभी कहानियाँ अच्छी लिखी गयी है मुझे ‘शुभ’ और ‘नीलू’ कहानी बहुत अच्छी लगी ,‘शुभ’ कहानी की विस्तृत समीक्षा करते हुए इसे एक श्रेष्ठ कहानी बताया। समर्पयामि के संरक्षक श्री महेन्द्र भीष्म जी लखनऊ ने समीक्षा में कहा कि-‘सहेली की डायरी’में लिखी सभी कहानियाँ अच्छी है उसमें भावों की सुंदर ढंग से अभिव्यक्ति है। उसके पात्र हमंे अपने ही आस पास मिल जाते है।‘अथ सहेली संवाद प्रश्न’के अतर्गत शोधार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी भीष्म जी ने किया।
आशीष कुलश्रेष्ठ लखनऊ ने कहा कि कहानियाँ बहुत अच्छी है उन्हेे भी नीलू, शुभ, आखिरी बस, और जलदान कहानियाँ बहुत अच्छी लगी। शलिनी सिंह लखनऊ(रेडियो जंगशन) कहानियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि- इस पुस्तक की कुछ कहानियों को ‘‘साहित्य के फनकार’’ कार्यक्रम में सुनाया जायेगा।
 इनके अलावा वीणा सिंह, अनुज द्विवेदी शलिनी वर्मा, योगेन्द्र तिवारी योगी, टीकमगढ़, अलोक उपाध्याय, अतिम चैबे, गोल्डी त्रिवेदी ललितपुर सहित अथ किन्नर कथा संवाद समूह से किन्नर विमर्श के शोधार्थी, रामायण व हिन्दी-संस्कृत-अध्येता व स्वतंत्र मंच से अनेक शोधार्थी भी सहभागी रहे। कार्यक्रम का संचालन स्वयं लेखिका गीतिका वेदिका ने किया। तकनीकी सहयोग अनुपमा पाण्डेय कानपुर, व सीमा भुवनेश्वर मुबंई,ने किया। सभी का आभार अंजलि अग्रवाल कलाधाम अकादमी नोएडा ने माना। अंत में सभी ने गीतिका वेदिका का ‘सहेली की डायरी’ के विमोचन पर बधाइयाँ दी। गीतिका वेदिका ने बताया कि ‘सहेली की डायरी’ पर केेन्द्रित शीघ्र ही ‘अथ सहेली संवाद’ शीर्षक से एक विशेषांक प्रकाशित किया जायेगा। 
- रपट-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
जिलाध्यक्ष-वनमाली सृजन केन्द्र,टीकमगढ़
टीकमगढ़ (म.प्र.) मोबाइल-9893520965
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6-दिनांक-20-12-2020 
7- दिनांक-25-4-2021 जूम पर आन लाइन समीक्षा 
गोष्ठी
*प्रैस विज्ञप्ति*

वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ की हुई ‘पुस्तक समीक्षा गोष्ठी’ दिनांक-25-4-2021

(‘वनमाली समग्र सृजन’ एवं ‘अनुभूति’’ पुस्तक की समीक्षा)

*टीकमगढ़*// रविन्द्रनाथ टैगोर विष्वविद्यालय एवं रविन्द्रनाथ टैगोर विष्वकला एवं संस्कृति केन्द्र भोपाल द्वारा संचालित वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ द्वारा पुस्तक समीक्षा गोष्ठी , *जूम पर आनलाइन दिनांक 25 अप्रैल 2021* को आयोजित की गयी।

 गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार संस्था के अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में व्यंग्यकार श्री रामगोपाल जी रैकवार जी रहे एवं विषिष्ट अतिथि के रूप के साहित्यकार श्री जी. पी. शुक्ला रहे। 

 सरस्वती वंदना के पष्चात् वरिष्ठ साहित्यकार श्री एन.डी. सोनी जी लिखित समीक्षा श्री विजय कुमार मेहरा जी ने पढ़ी। उन्होंने श्री संतोष चैबे जी द्वारा संपादित पुस्तक ‘वनमाली समग्र सृजन’ की समीक्षा पढ़ते हुए कहा कि- जगन्नाथ चैबे वनमाली अपनी तीक्ष्ण बुद्धि के बल पर अध्ययन और साधना करके एक अच्छे साहित्यकार बने। श्री चैबे जी मूल रूप से शिक्षक थे  प्रखर बुद्धि होने के कारण ही आदर्श शिक्षक के रूप में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हुए उनके हजारों शिष्यों ने उसे प्रेरणा ली है।

       टीकमगढ़ सृजन केन्द्र के अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने कहा कि- श्री चैबे जी ने एक साहित्यकार पिता के साहित्य और उनके संघर्षपूर्ण जीवन से पाठकों को भली भांति अवगत कराने के उद्देश्य से  ‘वनमाली समग्र सृजन’ नाम से पुस्तकें सम्पादित की हैं जिसमें उनके व्यंग्य, कहानियाँ, संस्मरण निबंध आदि संग्रहीत है।

श्री रामगोपाल जी रैकवार ने समीक्षा करते हुए कहा कि- ‘वनमाली समग्र सृजन’ पुस्तक के दूसरे भाग में श्री चैबे जी ने अपनी भूमिका में कहानी का रास्ता नाम से लिखा जिसमें उनके जीवन संघर्ष और उनकी प्रमुख विशेषताओं को बताया गया है। श्री वनमाली जी के दो लेख कला का आदर्श एवं कला का जीवन से संबंध प्रकाशित हैं।

इंदौर से वरिष्ठ साहित्यकार श्री अभिनंदन गोइल  जी ने समीक्षा करते हुए कहा कि- श्री संतोष चैबे जी ने स्वयं एवं विभिन्न लेखकों द्वारा उनकी खूबियों को वनमाली समग्र में कई भागों में बाँटकर रेखांकित किया है।

कवि श्री डी.पी. शुक्ला जी श्री मनोज रूपड़ा जी की कृति ‘अनभूति’ की समीक्षा करते हुए  कहा कि-‘अनुभूति’ कृति एक नये अंदाज मे ंलिखी गयी है इससे इनका पाठक वर्ग अलग है इसमें मात्र तीन कहानियाँ  अनुभूति,  ‘साज-नासाज और ‘आमाजगाह’ शीर्षक से है जो कि लंबी है।  इसमें लेखक ने विलुप्त होती संगीत की करूण कहानियों को  अपनी कलम के माध्यम से बहुत खूबसूरती से उकेरा है।

टीकमगढ़ से श्री नितिन बबेले जी ने कहते हैं कि - पुस्तक में संगीत के विभिन्न आयामों को संजोया गया है। उो अंजाने स्वरों को संबद्ध करने के लिए लेखन ने एक स्वर में जोड़ने का प्रयास किया है जो जीवन राग ही हो सकता है। 

आनलाइन समीक्षा गोष्ठी का संचालन लाइबे्ररियन श्री विजय कुमार मेहरा ने किया ने किया तथा सभी का आभार वनमाली सृजन केन्द्र केे अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी ने माना। 
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रपट-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
अध्यक्ष एवं संयोजन-वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
 टीकमगढ़ मोबाइल-9893520965
      E Mail-   ranalidhori@gmail.com
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8-दिनांक-15-5-2022

*वनमाली सृजन केन्द्र की ‘पुस्तक समीक्षा गोष्ठी’ हुई*
*(‘बुन्देलखण्ड के आधुनिक कवि’’ ग्रंथ  की समीक्षा)*
*टीकमगढ़*// रविन्द्रनाथ टैगोर विष्वविद्यालय एवं रविन्द्रनाथ टैगोर विष्वकला एवं संस्कृति केन्द्र भोपाल द्वारा संचालित वनमाली सृजन केन्द्र,टीकमगढ़ द्वारा ‘बुन्देलखण्ड के आधुनिक कवि’’ ग्रंथ  की  पुस्तक समीक्षा गोष्ठी, आकांक्षा पब्लिक स्कूल टीकमगढ़ में दिनांक 15-5-2022 को आयोजित की गयी। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार  वरिष्ठ साहित्यकार पं. श्री हरिविष्णु जी अवस्थी’ ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में व्यंग्यकार श्री अजीत श्रीवास्तव जी रहे एवं विषिष्ट अतिथि के रूप के साहित्यकार श्री एस.आर.‘सरल’ जी रहे।  माँ सरस्वती के पूजन के पश्चात वीरेन्द्र चंसौरिया ने सरस्वती वंदना पढ़ी। तत्पष्चात् पहले दौर में पुस्तक समीक्षा पढ़ी गयी। दूसरे दौर में काव्य पाठ किया गया।
  लाइबे्ररियन श्री विजय कुमार मेहरा जी ने ‘बुन्देलखण्ड के आधुनिक कवि’’ गं्रथ समीक्षा पढ़ते हुए कहा कि-मन के आवेग,विचार और संवेदनाओं की अभिव्यक्ति साहित्य की विभिन्न विधाओं द्वारा होती है। कविता उन सभी सर्जनाओं में सर्वोपरी है जो मन के भावों को संगठित करके सर्जित की जाती है। ‘बुन्देलखण्ड के आधुनिक कवि’ श्री राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ बुन्देलखण्ड अंचल के युवा कवियों की रचनाओं से सुसज्जित काव्य कृति है। ‘बुन्देलखण्ड के आधुनिक कवि’ पुस्तक में विशेषकर युवाओं की रचनाओं को प्रकाश में लाने का काम भाई राजीव नामदेव का प्रयास प्रशंसनीय है। यह पुस्तक निश्चित ही बुन्देलखण्ड के साहित्य जगत में मील का पत्थर साबित होगी।
  श्री रामगोपाल जी रैकवार ने समीक्षा करते हुए कहा कि-पुस्तक के पेपर की गुणवत्ता, कुल पृष्ठ और सम्पादक की मेहनत को देखते हुए 174 पेज की इस पुस्तक का मूल्य 300रू. कम ही कहा जाएगा। श्री राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ को जी बधाई और शुभकामनाएँ उन्होंने इस पुस्तक का संपादन कर बुन्देलखण्ड के साहित्य जगत में नई पौध का पालन-पोषण सरल कर दिया है।
पं. श्री हरिविष्णु अवस्थी  जी ने समीक्षा करते हुए कहा कि- कविता, निबध्ंा, व्यंग्य,हाइकु,दोहा आदि विभिन्न विद्याओं में क्रियाशील अनेक पुस्तकों के रचियता, म.प्र. की प्रतिष्ठित संस्था मध्यप्रदेश लेखक संघ भोपाल की जिला इकाई टीकमगढ़ का निष्ठापूर्वक विगत 23 वर्षो से कुशलता पूर्वक संचालन कर रहे श्री राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ द्वारा संकलित एवं सम्पादित कृति ‘बुन्देलखण्ड के आधुनिक कवि’ की समीक्षा लिखते हुए, ऐसा अनुभव हो रहा है जैसे हिन्दी भाषा के ज्ञान यज्ञ मे मुझे भी आहुति देने का सुयोग अकस्मात प्रात हो गया है। निष्कर्ष रूप में कहा जाता सकता है कि राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने प्रस्तुत कृति के संकलन, सम्पादन एवं प्रकाशन में गुरुतर भार को निष्ठापूर्वक सम्पन्न कर आधुनिक रचनाकारों की प्रतिभा को प्रकाश में लाने का सराहनीय कार्य किया है। इस कार्य हेतु वह प्रशंसा के अधिकारी हैं। कृति का मुद्रण त्ऱुटि रहित है। आवरण पृष्ठ पर लगभग सभी कवियों के चित्र देकर उसको आकर्षक बनाने का यत्न सफल रहा है।
डाॅ. प्रीति सिंह जी परमार ने समीक्षा करते हुए कहा कि- संपादक श्री राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ जी ने इस पुस्तक में 61 नये कवियों को एवं 10 पुराने कवियों को स्थान दिया है इस पुस्तक में कविता ,दोहा, ग़ज़ल, हाइकु बुन्देली गीत, घनाक्षरी, मुक्तक व्यंग्य आदि पद्य की लगभग सभी विद्याएँं समाहित है। इस पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें ‘हमारी धरोहर’ भाग में बानगी के तौर पर बुन्देलखण्ड के 10 प्रसिद्ध बहुत पुराने कवियों की रचनाएँ सपरिचय दी गयी है। ताकि वर्तमान पीढ़ी उनके साहित्य को पढ़कर कुछ सीख सके। ‘राना लिधौरी’ ने बुन्देलखण्ड के कवियों को एक माला के पिरोने का स्तुत्य कार्य किया है।
व्यंग्यकार श्री अजीत श्रीवास्तव जी ने समीक्षा करते हुए कहा कि-श्री राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ द्वारा संपादित यह ग्रंथ ‘बुन्देलखण्ड के आधुनिक कवि’ भविष्य के शोध के लिए बहुत काम आयेगा। वर्तमान में कैसा साहित्य लिखा जा रहा है इसकी झलक इस पुस्तक में देखने को मिल जाती है। युवा पीढ़ी को इस पुस्तक को एक वार जरूर पढ़ना चाहिए बेहतरीन ढंग से सम्पादित यह पुस्तक संग्रहणीय है।
कवि श्री डी.पी. शुक्ला जी ने समीक्षा करते हुए कहा कि-श्री राजीव नामदेव द्वारा बेहतरीन ढंग से सम्पादित पुस्तक ‘बुन्देलखण्ड के आधुनिक कवि’ के माध्यम से उन्होंने नवोदितो एवं खासकर ग्रामीण अँचलों में रहने वाले कवियों को ढूँढकर जिनकी रचनाएँ केवल वहीं तक सीमित थी, उनकी रचनाओं को एकत्रित कर उन्हें संपादित करके इस पुस्तक में स्थान दिया जो कि बहुत ही प्रशंसनीय एवं वंदनीय कार्य है।
नवोदित कवि श्री कमलेस सेन जी ने समीक्षा करते हुए कहा कि-श्री राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ द्वारा मुझ जैसे अनेक गुमनाम नवोदित को एक सशक्त मंच प्रदान करते हुए हमारी काव्य प्रतिभा को सबके सामने लाने एवं उन्हें प्रकाशित करने का जो बीड़ा उठाया है उसकी जितनी प्रशंसा की जाये उनती कम है। यह पुस्तक हमारे लिए एक अनमोल धरोहर है।
गीतकार श्री वीरेन्द्र चंसौरिया जी ने करते हुए कहा कि- आज राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ साहित्य के क्षेत्र में स्वयं नित नया सृजन कर ही रहे है वहीं दूसरों को भी हमेशा प्रोत्साहित करते रहते हैं काव्य गोष्ठियाँ म.प्र.लेखक संघ, वनमाली सृजन केन्द्र एवं जय बुन्देली साहित्य समूह के माध्यम के हर माह तो करते ही रहते है इसके अलावा वे कवियों की रचनाओं का सांझा प्रकाशन भी समय-समय पर करते रहते है ‘अभी लंबा है सफर’,‘जज़्बात’, काव्य संकलन के बाद हाल ही में ‘बुन्देलखण्ड के आधुनिक कवि’ का प्रकाशन करके ‘राना लिधौरी’ जी ने बुन्देलखण्ड के साहित्य जगत में धूम मचा दी है। आज कल यह पुस्तक बहुत चर्चित हो रही है।
वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ के जिलाध्यक्ष व पुस्तक के सपंादक राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने कहा कि- हमने इस पुस्तक में बुन्देलखण्ड के अधिक से अधिक कवियों को शामिल करने का प्रयास किया था उनसे संपर्क भी किया था किन्तु अनेक लोगों ने रचनाएँ हमें प्राप्त नहीं हो पायी। अधिक बिलंब न हो जाये इसीलिए ‘बुन्देलखण्ड के आधुनिक कवि’ (भाग-1) के रूप में इसे प्रकाशित किया है भविष्य में इसके दूसरे भाग में जो कवि शेष रह गये है उन्हें शामिल किया जायेगा।  
अंत में सभी का आभार वनमाली सृजन केन्द्र केे जिलाध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी ने माना।
*रपट-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’*
अध्यक्ष एवं संयोजन-वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
 टीकमगढ़ मोबाइल-9893520965
E Mail-   ranalidhori@gmail.com
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9-
दिनांक-20-10-2022टीकमगढ
10-

#विश्वरंग के अंतर्गत वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ का कवि सम्मेलन -*

*(वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ द्वारा कवि सम्मेलन हुआ)*

टीकमगढ़// नगर की प्रसिद्ध साहित्यिक संस्था वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़ द्वारा विश्वरंग कार्यक्रम-2022 के अंतर्गत आन लाइन कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। अध्यक्षता वरिष्ठ कवि सुभाष सिंघई (जतारा) ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में विद्या चौहान (फरीदावाद) जी रहे व विषिष्ट अतिथि रंगकर्मी व कवि संजय श्रीवास्तव (दिल्ली़) रहे।
कवि गोष्ठी का शुभारंभ वीरेंद्र चंसौरिया ने सरस्वती वंदना कर रचना पढ़ी-
जय हो तुम्हारी जय हो तुम्हारी, संगीत विद्या ज्ञान की देवी।
स्वीकारिये बंदना ये हमारी।जय हो तुम्हारी जय हो तुम्हारी ।।

फरीदाबाद़ से विद्या चौहान ने ग़ज़ल सुनायी-
न ही आफताब न चाँद का ये जो नूर मुझमें है आपका।
जो झलकता आँख में प्यार बन, वो हुजूर मुझमें हैं आपका।।

सिवनी से कविता नेमा ने पढ़ा-
फूलों की खुश्बू है बढ़ाती हर पल तेरा निखार है।
बुधवारी के चौक में देखों सजा ये जथानी दरवार है।।

बड़ा मलेहरा के डॉ. देवदत्त द्विवेदी  ने ग़ज़ल
सुनायी- हम ग़मों की गोद में पलते रहे।
लोग फिर भी हमसे जलते रहे।।

टीकमगढ़ से म.प्र.लेखक संघ के जिलाध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने‘ श्री कृष्णा पर दोहे पढ़े-
कतकारी ढूँढे़ फिर कउँ न मिले भगावान,
कान्हा तो भीतर बसे, ज्यों मुरली में तान।।

जतारा से सुभाष सिंघई ने कुत्ते पर व्यंग्य पढ़ा-
दोनों में फर्क ही क्या है दोनों नेक है,
एक दिनभर चीखता है एक रात भर भौंकता है।

बल्देवगढ़ के प्रमोद मिश्रा ने सुनाया-
जनकपुरी की जुरी लगाई चलो अवधपुर जाँवने,
जू घर बनवा रय पाँवने।।

एस. आर सरल ने पढ़ा-
मैं नफरतों की लपटों पर, पानी उडेलता हूँ।
मानवता कमे फूल लिए, पथ में बिखेता चलता हँू।।

दिल्ली से संजय श्रीवास्तव ने पढ़ा-
माँ के भीतर घर रहता है। घर के भीतर माँ रहती है।
बारिश,आँधी,तूफां सारे, धरती माँ सी सहती माँ।।

जिला निवाड़ी आशा रिछारिया ने रचना पढ़ी-
न होतीं तो ये जग न होता,न होती वो ममता
जो गा कर सुला दे।मीठी सी थपकी,
परियों से मिला दे।चंदा भी थाली में,दस्तक न देता।

नंदनवारा से शोभा राम दांगी ने कविता पढ़ी-
है इंदियारौ जितै उतै अब, होा जावै उजयारौ।
आ गइ आज दिवाइ कैचू घर कौ कूरा झारौ।।

इनके आलावा मीनू गुप्ता,भगवान सिंह लोधी अनुरागी (हटा),अंजनी कुमार चतुर्वेदी (निवाड़ी),ब्रज भूषण दुवे (बक्सवाहा), मोहिनी दुवे (बक्सवाहा),रामानंद पाठक नैगुवाँ, मीरा खरे आदि ने भी काव्य पाठ किया।
कविसम्मेलन का संचालन व अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने किया।
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#राजीव_नामदेव #राना_लिधौरी #टीकमगढ़
#rajeev_namdeo_rana_lidhori
 *राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’*
  शिवनगर कालौनी,टीकमगढ़ (म.प्र.) मोबाइल-9893520965

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date 3.12.2023



शुक्रवार, 18 दिसंबर 2020

लघुकथा- शोषण (राजीव नामदेव 'राना लिधौरी')

*लघुकथा-‘‘कोरोना काल में शोषण’’*

                        *-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’*
         
दिल्ली में मजदूरी करते रामलाल को यूँ कई बर्ष हो गए थे, लेकिन इस साल मार्च में कोरोना महामारी के कारण गंभीर हालात पैदा हो गए और लाॅक डाउन बढ़ने की वजह से लोग वापिस अपने घर नहीं आ पा रहे थे ऐसे के महामारी बढ़ती ही जा रही है तब वहाँ से हजारों प्रवासी मजदूरों ने जब भूखे मरने की नौबत आने लगी तो उन्होंने ने वापिस अपने गाँवों की ओर लौटने में ही अपनी भलाई समझी यही सोचकर रामलाल ने अपने ठेकेदार से कहाकि- बाबूजी हमारा पूरा हिसाब करके जितने पैसा होते है हमें दे दीजिए हम घर जाने चाहते है।
ठेकेदार पहले तो कुद दिन टालता रहा है इस प्रकार से ये सभी वाापिस चले जाएँगे तो फिर आगे काम कैसे होगा मेरी ऊपरी कमाई भी बंद हो जाएगी। तीस हजार रूपए तीन महीने का हो रहा था। मजदूर ने कुछ दिन बाद फिर गुहार लगाई कि मुझे मेरे पैसा दे दो उधर वह ठेकेदार दो-तीन दिन बाद आना फिर देदे अभी हमारे पास नहीं है वे बेचारे फिर लौट जाते। 
जब दो माह लाकडाउन को हो गए ओर कुछ ही आगे निश्चित न रहा तब रामलाल सोच रहा था कि वो यदि यहाँ और दिन रहा तो वह भी बीमारी की चपेट मे आ जायेगा और अब तो खाने के भी लाले पड़ने लगे है जितना थोड़ा कुछ बचा था वह भी खत्म हो गया है। काम धंधा अभी सब बंद है तो वह अंतिम बार ठेकेदार के पास पैसा माँगने जाता है तो ठेकेदार पहले तो उसे अभी देने से मना कर देता है जब कहता है कि बाबूजी अब मैं यहाँ रहूँगा मैं रात में ही वापिस ठेकेदार भी बहुत चालक था उसने मजबूरी का फायदा उठाते हुए कहा कि-देखो भाई मेरे पास फिलहाल तो इतने पैसे नहीं ही कि सभी को पूरे दे सकंू और भी बहुत से लोगों के पैसा देना है।
अपने घर जा रहा हूँ  तो ठेकेदार ने पूछा कि- जब ट्रेन, बस सब बंद है तो फिर कैस जाओंगे, तो वह बोला कि- मैं पैदल ही जाऊँगा और भी हमारे साथी है किसी तरह पहुँच ही जाएगे यहाँ और रहे तो कोरोना होने से पहले, भूखों ही मर जाएगे।
बहुत मिन्नते करने और हाथ-पाँव जोड़ने के बाद वह बोला कि- ऐसा करो अभी तो मैं तुम्हेें पाँच हजार रूपए ही दे सकता हूँ बाकी बाद में ले लेना मैं खा के थोड़े ही भगे जा रहा हूँ। बेचारा मजदूर क्या करता वे पाँच हजार रूपए ही लेकर कि ‘‘भागते भूत की लंगोटी ही भली’’, ठेकेदार को मन ही मन कोसता हुआ कि जिस कोराना की वजह से तुमने मेरे खाये है वहीं तुम्हें हो जाये,बददुआएँ देते हुए वह किसी तरह अपने घर वापिस आ गया। 
ठेकेदार सोच रहा था कि चलो मैंने उसे अच्छा मूर्ख बनाया पाँच हजार ही देने पड़े पन्द्रह हजार अपने हो गए। साला मर जाएँगा रास्ते में, पैदल जा रहा है पाँच सौ किलोमीटर दूर अपने गाँव। कहते कि-‘दुआ कि तरह बददुआ में भी असर होता है’। ठेकेदार कुछ दिन बाद ‘कोरोना’ हो गया और वह मर गया। उसे अपनी करनी का फल मिल गया। 
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*©-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’*
संपादक ‘आकांक्षा’ पत्रिका
अध्यक्ष-म.प्र लेखक संघ,टीकमगढ़
शिवनगर कालौनी,टीकमगढ़ (म.प्र.)
पिनः472001 मोबाइल-9893520965
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बुधवार, 16 दिसंबर 2020

किसान आंदोलन


#बुंदेली कविता-
किसान बनाम किसान_आंदोलन

जे राजनेता सोइ
किसान आंदोलन कर रय,
सफारी में बैठ के
ज़हर उगल रय।।
भोरै किसानन खों,
बातन के बतासा,
खूब खुवा रय।
गरीब किसान तो,
खाद कै लाने
परेशान फिर रय।।
लैन में लग कै,
डंडा खा रय।
दस तो चाउने है,
पै एकई बोरी पा रय।।
मंदिर में जाकै अब
खूब पांव है पर रय।।।
कोउ तो सुनत नइयां।
राम जू अब है कर रय।।
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राजीव_नामदेव_राना_लिधौरी_टीकमगढ़

अध्यक्ष मप्र लेखक संघ टीकमगढ़
अध्यक्ष वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
टीकमगढ़ (मप्र)
मोबाइल 9893520965

शनिवार, 5 दिसंबर 2020

बापू के नाम पत्र - राजीव नामदेव 'राना लिधौरी', टीकमगढ़

बापू जी के नाम पत्र:-


जन-जन के प्रिय बापू जी,
आपको शत्-शत् प्रणाम, वंदन,नमन।


              प्रिय बापू जी, आप मुझे हमेशा मुझे प्रेरित करते हैं। आपका पूरा जीवन ही एक ‘पाठशाला’ की तरह हैं जिसमें हमें कुछ न कुछ सीखने को मिलता ही रहता है। आपके द्वारा किये गये कार्य हमें कुछ न कुछ प्रेरणा देते है।
           हे बापू जी, आज भारत को आपकी पुनः जरूरत है। आप शीघ्र यहाँ पर अवतार ले, लीजिए आपने हम भारतवासियों को पहले सन् 1947 में आजाद कराया था तब हमें आपने अंग्रेजी की गुलामी से आजाद कराया था आज फिर भारत मानसिक गुलाम है। आप यहाँ आकर भारत के लोगों को अंग्रेजों व अंग्रेजी की मानसिकता को दूर करते हुए आजाद कीजिए।
              हे बापू जी, आपने ‘खादी’ को बढ़ावा देकर स्वदेशी’ को बढ़ावा दिया था तथा देशी स्वनिर्मित कपड़ों की महत्वता को बल दिया था लेकिन आज तो आपकी खादी को केवल नेता ही पहनते है वो भी अपनी राजनीति छवि बनाने के लिए आज के नेता आपकी उसी पवित्र खादी को दागदार कर रहे है।
          हे बापू जी हमें आपके तीनों बंदर बहुत याद आते है। आपके वे तीनों बंदर पशु होते हुए भी हमें बहुत कुछ सीख देते है और उन्होंने मानव धर्म अपनाया लिया था लेकिन आज के मनुष्यों ने पशु के अवगुणों अपनाया लिया है आज वे पशु समान आपस में लड़ते-भिड़ते रहते हैंं और मारपीट करते रहते है। आपने उस समय अहिंसा का नारा दिया था लेकिन आज यहाँ इसके विपरीत हर क्षेत्र में हिंसा व्याप्त है लोग जरा-जरा सी बात पर मार-काट करके हत्या तक कर देते
है।
           हे अहिंसा के पुजारी, आज का आदमी बहुत बदल गया है। अब तो ‘अहिंसा’ से ‘अ’ अक्षर ही अदृष्य हो गया ’ है, हिंसा चारों तरफ बढ़ती जा रही है। लगता है घोर कलयुग आ गया।

           डाक विभाग ने भी आपके सम्मान में डाक टिकिट जारी किये है। सरकार ने आपके सम्मान में करेंसी नोटों पर आपके चित्र छापे है लेकिन दुःख तो तब होता है जब कुछ शरारती तत्व आपकी नोटों की फोटों पर काले पेन से दाढ़ी बना कर लादेन का चित्र बना देते है।  सच पूछियें बापू जी तब मेरी आत्मा को बहुत कष्ट हो रहा है। आज भारत से ज्यादा विदेशों में लोग मानते है और आपकी पूजा करते हैं। शायद वे अपने पुराने कर्मो(जब अफ्रीका में आपका अपमान किया था) का प्राश्चित कर रहे है। इसलिए आज आप विदेशों में सर्वाधित लोकप्रिय है।
           हे बापू जी, आपका एक कार्य जो कि आप उस समय छुआछूत मिटाने का था वह बहुत ही नेक कार्य था जो कि आपने उस समय किया जब देश में छुआछूत व जाति-भेद चरम पर था। आज छुआछूत भारत से काफी हद तक मिट गया है सभी जाति के लोग आपस में उठने बैठने लगे है। कोई जाति भेद न रहा है। आपसी भाईचारा बढ़ गया है। आज अनेक हिन्दू नेता भी ईद के समय रोजा अफ्तार पर मुस्लिम भाइयों के साथ एक साथ भोजन करते है। आपसी भाइ्र्रचारा,प्रैम,सद्भवना आदि यही तो हमारे भारत देश की पहचान बन गया है। आज दूसरे देश के लोग हैंरान कि भारत में विभिन्न संस्कृति के इतने सारे लोग एक साथ इतने प्रेम से कैसे रह लेते हैं।
           हे बापू जी, आपके द्वारा किये गये कार्य इतने महान है कि आगे की पीढ़ी तो कभी यह विश्वास ही नहीं करेगी कि, ‘महात्मा गांधी’ नाम को कोई हाड़ मांस के आदमी ने इस धरती पर जन्म लिया था। जिसने अहिंसा के मार्ग पर चल कर भारत देश को आजाद करा दिया था। जबकि आज परमाणु बम जैसे घातक रासायनिक हथियार बनाने की होड़ देशों के बीच लगी है। जो पल में पूरी दूनिया को मिटा सकते है। फिर बिना हथियार के केवल ‘अहिंसा’ के दम पर देश को आजाद कराना एक कल्पनीय कार्य ही लगेगा। आज से 100 साल बाद लोग सोचने को मजबूर हो जायेगें कि क्या यह संभव था? लेकिन, बापू जी आप तो इंसान भगवान थे जो कि इंसान के रूप में जन्म लेकर जीवन भर कर्म करते रहे और लोगों के हमेशा
प्रेरणास्त्रोत रहे।
         हे बापू जी आपके सत्कर्म ही आपको इंसान से ‘देवता’ बनाते है और देव हमेशा पूजनीय होते है और सदा से पीढ़ियों तक इसी प्रकार पूजे जायेगें। हम सभी भारतवासियों के लिए यह बहुत ही गर्व की बात है कि आपने हमारे देश भारत में जन्म लिया और भारत को आजाद कराकर ही दम लिया।
         हे बापू जी मुझे आपका असहाय,गरीब और कुष्ट रोगियों के प्रति सेवा भाव वंदनीय लगता है जहाँ आज भी लोग कुष्ट रोगी से दूर भागते है तथा घ्रणा की दृष्टि से देखते है वहीं आपने जीवनभर कुष्ट रोगियों की सेवा की उनके घाव अपने हाथों से साफ किये तथा मरहम पट्टी की उनकी इतनी सेवा तो उनके सगे संबंधी भी नहीं करते हैं जितनी आपने की है। यह आपके ‘प्रेम’ की पराकाष्ठा ही कहीं जायेगी। हे बापू जी, आपने उस समय शिक्षा की अलख जगायी, जब लोग बहुत कम शिक्षित थे और शिक्षा के प्रति उदासीन थे, तब शिक्षा केबल उच्च घरानों के लोग ही ले सकते थे। तब उस समय आप अपनी उच्च शिक्षा के लिए द.अफ्रीका तक गये वहाँ से वकालात करके फिर से भारत वापिस आकर देश कि सेवा में लग गये यह आपका देश के प्रति अटूट प्रेम दर्शाता है। 

            आप एक सच्चे देशप्रेमी थे आपने अपना पूरा जीवन ही देश कि सेवा में ही लगा दिया। आज लोग एक बार विदेश जाते है तो वहीं के रहके हो जाते है। उन्हें अपने देश से प्रेम नहीं होता, वे तो सिर्फ दौलत से प्यार करते है, लेकिन आप एक सच्चे देश प्रेमी है। आपने देश प्रेम भी भावना कूट-कूट कर भरी है।
           मैं अंत में बापू जी के श्री चरणों में ससम्मान अपनी स्वरचित काव्यांजलि दे रहा हूँ-

कविता- बापू जी आप तो...........
बापू जी गुणों की खान हैं,
आप तो बहुत महान हैं।
इसीलिए तो आपकी,
सारे विश्व में पहचान हैं।।
आप सदैव प्रेरित करते हैं,
आपको करते हम नमन है।
‘बापू’ की वजह से ही
ये मुस्कराता चमन है।
आप देव तुल्य इंसान है।
आपको शत्-शत् नमन है।।

©- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’

संपादक आकांक्षा पत्रिका

अध्यक्ष मप्र लेखक संघ टीकमगढ़

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जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़ की ई बुक्स- संपादन- राजीव नामदेव "राना लिधौरी", टीकमगढ़

जय_बुंदेली_साहित्य_समूह_टीकमगढ़ एवं
#म_प्र.#लेखक_संघ_टीकमगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में

जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़ की अब तक मात्र 15माह में ही 69 #ई_पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं कुछ के कवर पेज हम दे रहे है ये हमारे पटल की 22 जून2020 से 30 नवंवर 2020 तक की के दैनिक लेखन की कुछ उपलब्धि हैं।
इन पुस्तकों में हिंदी एवं बुंदेली के लगभग 60 कवियों के दिये गये बिषय पर  लगभग 3000 दोहे संकलित है।
पटल से जुड़े सभी साथियों का हृदय तल से आभार, अभिनंदन।

#एडमिन-
राजीव नामदेव "राना लिधौरी" एवं
श्री राम गोपाल रैकवार

#संपादन-#राजीव_नामदेव_राना_लिधौरी
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