सोमवार, 7 नवंबर 2016

‘बाल साहित्य’ पर हुई कवि गोष्ठी 6-11-2016

date- 6-11-2016
‘बाल साहित्य’ पर हुई कवि गोष्ठी




bal sahitaya
(दुर्ग,बल्देवगढ़,कुण्डेश्वर, पठा, लखौरा,सिंमरा,तखा से आये कवि)
 
टीकमगढ़//‘ साईं मंदिर के पास गीतकार वीरेन्द्र चंसौरिया के निवास पर
 म.प्र.लेखक संघ’ जिला इकाई टीकमगढ़ की ़ की 217 वीं गोष्ठी ‘बाल साहित्य’ पर हुई
जिसके मुख्य अतिथि बल्देवगढ से पधारे साहित्यकार यदुकुल नंदन खरे रहे
व अध्यक्षता बुन्देली कवि प्रभु दयाल श्रीवास्तव अहिरवार ने की
जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में बुन्देली गीतकार सीताराम राय रहे।
सर्वप्रथम सीताराम राय ने सरस्वती वंदना‘ पढ़ी-
‘‘शारदे कण्ठ विराजो आन,शब्द सार्थक कर दो हे माँ और बढ़ा दो शान।
ग्राम सिमरा से पधारे बाल कवि रविन्द्र यादव ने पढ़ा-
कब तक छुपोगे आखिर सपनों की छाँव में,
                            सामना तो होगा ही, हकीकत की धूप से।।
बाल कवि अमित चौबे ने कविता सुनायी-ब्याब नई करने हतो कर गये,न हक मेंं आफत में पर गये।
दुर्ग छत्तीसगढ से पधारे कवि सुशील यादव ने पढ़ा-
ऐसी तितली वैसी तितली,जाने कैसी कैसी तितली।
 बात बात पर गुस्सा हो जाती,मैंने देखी एक अनमनी तितली।।
म.प्र. लेखक संघ के अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने बाल कविता पढ़ी-
सोचो कितनी प्यारी होती लम्बीं पूँछ हमारी होती।
किसी किसी की पतली होती और किसी की झबरी होती।
बल्देवगढ़ से पधारे कवि युदुकल नंदन खरे ने कविता पढ़ी-
बडे सबेर उठना सीखो,धरती पर तुम चलना सीखो।
बल्देवगढ़ से पधारे कवि कोमलचन्द्र बजाज ने पढ़ा-
राग द्वेष को छोड़ बाबरे ,प्रभु को तू हृदय धर ले।।
ग्राम लखौरा से पधारे कवि गुलाब सिंह यादव ‘भाऊ’ ने पढ़ा-
 ‘अब नये लरका बिगरत जा रय,अपने मन कौ चा रये।
ग्राम पठ से पधारे सीताराम राय ने सुनाया-
शरद पूनम थी चाँद सुहाना था, नंद के अंगना में उत्सव पुराना था।।
    वीरेन्द्र चंसौरिया ने गीत सुनाया-    घर और मन को मंदिर बनाओ।
परमेश्वरीदास तिवारी ने कविता सुनायी-
कहाँ से आया किसलिए आया और कहाँ है जाना।
                        मकसद क्या हे इस जीवन का मानव बनकर आना।।
सियराम अहिरवार ने रचना पढ़ी- मैं बन जाऊँ चन्द खिलौना जग जग कर दूँ कोना कोना।
                     किरणों की सीढ़ी से आकर,धरती पर मैं करूँ बिछौना।।
बुन्देली कवि प्रभुदयाल श्रीवास्तव ने पढ़ा-
बिरजे बलदाऊ के भैया, छुटकी देख जुदैया।
                        हमें खेलबे चंदा चाने अबइ मँगा दो भैया।।
कवि दीनदयाल तिवारी ने पढ़ा-
बच्चे मन के सच्चे, उनमें होता न कोई बिकार।
वे तो एसी कच्ची मिट्टी जिन्हें बल देता कुम्हार।।
पूरन चन्द्र गुप्ता ने कविता पढ़ी-बेटी पढ़े बढ़े बेटी जब, देश प्रगति की चाबी।
                    हे बालक भविष्य की चाबी बिमल भारती चाबी।।
अनवर खान ‘साहिल’ ने ग़ज़ल पढ़ी-
साये मे ंजिसको खेलकर इतने बडे़ हुए,हमसे वो पेड़ नीम का काटा नहीं गया।।
इनके अलावा रामगोपाल रैॅकवार ,विजय मेहरा, आर.एस.शर्मा, बाबूलाल जैन, पी.एल.कड़ा,लाल जी सहाय श्रीवास्तव आदि ने भी रचनाएँ पढी। गोष्ठी संचालन वीरेन्द्र चंसौरिया’ ने किया
 एवं सभी का आभार प्रदर्शन रामगोपाल रैकवार ने किया।

रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’,
     अध्यक्ष म.प्र.लेखक संघ,टीकमगढ़,
मोबाइल-9893520965,   

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