रविवार, 1 जनवरी 2017

‘म.लेखक संघ की वीर रस पर हुई 219वीं कवि गोष्ठी



Date7 1-1-2017
‘म.लेखक संघ की वीर रस पर हुई 219वीं कवि गोष्ठी
( स्व.दुर्गा प्रसाद जी शर्मा की ‘स्मृति
ग्रंथ’ का हुआ विमोचन)     



sarvodaya
 

टीकमगढ़// सर्वोदय आश्रम  गणेश गंज मेंं स्व.चतुर्भुज पाठक स्मृति न्यास एवं म.प्र.लेखक संघ’ जिला इकाई टीकमगढ़ की 219 वीं गोष्ठी ‘वीर रस’ पर केन्द्रित हुई जिसके मुख्य अतिथि जनपद अध्यक्ष श्री पर्वत लाल अहिरवार एवं  पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष श्री राकेश गिरि रहे व अध्यक्षता  ने डॉ. दुर्गेश दीक्षित की जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में कुण्डेश्वर से पधारे प.गुणसागर सत्यार्थी एवं प.हरिविष्णु अवस्थी रहे।
 इस अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी त्रय स्व.चतुर्भुज पाठक, स्व. श्री बाबू प्रेम नारायण खरे एवं स्व. श्री दुर्गाप्रसाद जी शर्मा को विनम्र श्रद्धांजलि दी गयी तत्पश्चात बुन्देली माटी के सपूत स्व.श्री दुर्गा प्रसाद शर्मा जी ‘स्मृति ग्रंथ’ का विमोचन अतिथियों द्वारा किया।
  सरस्वती वंदना के पश्चात म.प्र. लेखक संघ द्वारा कवि गोष्टी आयोजित की गयी जिसमें
ग्राम लखौरा से पधारे कवि गुलाब सिंह यादव ‘भाऊ’ ने पढ़ा-

 ‘लहर लहराये तिरंगा, जा भारत की शान है।
  तन मन करो निछावर अपनो,जब तक भीतर प्रान है।।
ग्राम पठा से आये कवि सीताराम राय ने पढा-

‘‘गर सरहद पे अपनी जरूरत पडे।
 तो सरहद पे जाने का वादा करो।।
कवयित्री गीता वेदिका ने पढ़ा-

 टूटी जोरी पाई-पाई जीवन कर्ज भरी गठरी,
दो रये घर के माथ पे जे, आँखे अँसुवन की गगरी।।
म.प्र. लेखक संघ के अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने 

स्व.दुर्गा प्रसाद शर्मा जी पर कविता सुनाई-
शरीर था उनका दमदार,दिखते थे वे नम्बरदार।
पुस्तक छप उनकी आठ ,पढ़ाते थे वे अहिंसा का पाठ।।
 ज्फरउल्ला खां ‘जफ़र’ ने ग़ज़ल पढ़ी-

सैंकड़ा होने में अभी एक साल बाकी है,
हड्डियाँ बोल गयी सिर्फ खाल बाकी है।
डॉ. अनीता गोस्वामी ने रचना पढ़ी-

भारतीय इतिहास कीझलक कैसे दिखलाऊँ,
जौहर की परिभाषा पूर्णतः बदल गयी है।।
सियराम अहिरवार ने रचना पढ़ी-     

कर्तव्य बोध होता है जिसको अपने जीवन के प्रति।
उसकी अपने आप फैलती है सारे जग में कीर्ति।।
अमिताभ गोस्वामी ने सुनाया-

नहीं आरजू हमको, जहाँ में बादशाहत की, 
तमन्ना है वतन के वास्ते जश्ने शहादत की।।
परमेश्वरीदास तिवारी  ने कविता सुनायी-

घर बनाने में वक्त लगता,पर मिटाने में पल नहीं लगता।।
दीनदयाल तिवारी ने पढ़ा-

यह आकार है संसार, नहीं कोई ठिकाना है,नहीं कुछ साथ लाया था, नहीं साथ जाना है।
एन.डी.सोनी ने कविता पढ़ी- 

करो विरोध देश के हित में यह विवेक भी कहता है सिर्फ विरोध,
 विरोध की खातिर कुछ तो शर्म करो।।
 इनके अलावा छिल्ला उ.प्र. से पधारे कवि बाबू लाल द्विवेदी डॉ.डी.पी.,खरे, रामगोपाल रैकवार, आर.एस.शर्मा, हरिविष्णु अवस्थी, रामेश्वर प्रसाद तिवारी, भारत विजय बगेरिया,उमा पारासर, डी.पी.शुक्ला, गुणसागर सत्यार्थी,डॉ.दुगेश दीक्षित, अजीत श्रीवास्तव,हरेन्द्र पाल सिंह आदि ने भी अपने विचार रखे।

 गोष्ठी संचालन वीरेन्द्र चंसौरिया ने किया एवं सभी का आभार प्रदर्शन आर.एस.शर्मा ने किया।

रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’,
     अध्यक्ष म.प्र.लेखक संघ,टीकमगढ़,
मोबाइल-9893520965,   
 

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