सोमवार, 8 जनवरी 2018

हाजी जफर से फार्महाउस पर म.प्र.लेखक संघ की 231 वीं गोष्ठी एवं पिकनिक Date7-1-2018

            ‘वीर रस एवं देश भक्ति पर हुई कवि गोष्ठी   
        हाजी जफर से फार्महाउस पर म.प्र.लेखक संघ की 231 वीं गोष्ठी एवं पिकनिक  Date7-1-2018
         (जतारा, बल्देवगढ़, नदनवारा, लखौरा,पठा,सिमरा,तखामजरा से आये कवि)   

    टीकमगढ़// वरिष्ठ शायर हाजी जफरउल्ला खां ‘जफर’ बडागाँव खुर्द के पास स्थित के फार्म हाउस पर में पिकनिक एवं साहित्यिक संस्था म.प्र. लेखक संघ जिला इकाई टीकमगढ़ की 231 वीं कविगोष्ठी वीर रस एवं देश भक्ति पर केन्द्रित आयोजित की गयी। जिसकी अध्यक्षता बल्देवगढ़ से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार यदुकुल नंदन खरे ने की जबकि मुख्य अतिथि के रूप में नंदनवारा से पधारे गीतकार शोभाराम दांगी ‘इन्दु’ रहे एवं विशिष्ट अथिति के रूप में व्यंग्यकार रामगोपाल रैकवार कँवल’ एवं युवा शायर अनवर खान ‘साहिल’ रहे।
वीरेन्द्र चंसौरिया ने सरस्वती वंदना कर रचना पढ़़ी- देश ही मंदिर,देश ही मस्जिद देश ही अपना घर।
जतारा से पधारे युवाकवि महेन्द्र चैधरी ने वीर रस में सुनाया-
                शेर के मुख में हाथ डालके गिन लेते हम दांतों को।
                दिल्ली ने गर बांधा न होता सेना के हाथों को।।
बल्देवगढ़ से पधारे कवि कोमल चन्द्र बजाज ने सुनाया-ओ पाक,चीन के गद्दरों तुम भारत क सोचो मत।
म.प्र.लेखक संघ के जिलाध्यक्ष राजीव नामदेव ‘‘राना लिधौरी’ ने ग़ज़ल सुनायी-
    देश रक्षा के लिए खून बहाने की जगह,हम लहू दंगे फसादों में बहा देते है।
    हम तो सहते है जमाने के सितम हँस हँसके, हम नहीं वो जिन्हें हालात रूला देते है।।
            परमेश्वरीदास तिवारी ने कविता पढ़ी- जिन्दगी का सबसे बड़ा साथी गुलाब हैं।
ज़फ़र उल्ला खां ‘ज़फ़र’ ने ग़ज़ल पढ़ी-    तुम्हें जिंदगी भर न भूलेगे हम,मगर राजे दिल भी न खोलेगें हम।।
ग्राम नदनवारा से पधारे कवि शोभाराम दांगी ने पढ़ा-झंडा तिरंगा देश की शक्ति का निशान है।
                                जिसने गवां दी जान वो महान की तू महान है।
ग्राम लखौरा से पधारे बुंदेली कवि गुलाब सिंह भाऊ ने पढ़ा-लहर लहर लहराये तिंरगा जा भारत की शान है।
                                तन मन करो निछावर अपने जिब तक भीतर प्रान है।।
ग्राम पठा के पधारे सीताराम राय ‘सरल’ ने रचना पढ़ी-
                वीर सपूतो की टोली हरसाय के चली,देश माटी सिर लगाये के चली। सिमरा से ग्राम सिमरा से आये रविन्द्र यादव ने पढ़ा-भारत के भाग्य विधाता थे श्री स्वामी जी का क्या कहना।
बल्देवगढ़ से पधारे कवि यदुकुलनंदन खरे ने सुनाया-
                कहीं बातों मे बात न बिगड जाये,धरती पर कहीं विश्वयुद्ध न हो जाये।
उमाशंकर मिश्र ने पढ़ा-दौड़कर आ गये सबं तिरंग तले,उसने जब भी पुकारा वतन के लिए।
अनवर खान साहिल ने पढ़ा-बंटवारे के होते ही पडौसी चले गये,हम हिन्द की जमीन छोड़कर नहीं गये।
रामगोपाल रैकवार ने गीत पढ़ा- आओ गुनगुनी धूप में बैठे,
पूरनचन्द्र गुप्ता ने सुनाया-धन्य-धन्य है धरा हमारी धन्य यहाँ की आन है,
               धन्य तिरंगा झण्डा अपना जिसमें अपनी शान है।
आर.एस.शर्मा ने सुनाया- पेनकार्ड को आधार से जोडो के बजाय,हिंदू को मुसलमान से जोड़ो।
                दलित को दलित से जोड़ो,भारत को भारत से जोड़ो।।
            इस मौके पर बी.एल जैन,परमेश्वरी दास तिवारी, भारत विजय बगेरिया, रामेश्वर राय ‘परदेशी’, अशरफ खान, योगेन्द्र तिवारी, डी.पी.यादव आदि सहित अनेक कवियों ने भी रचना पढ़ी।
                    कार्यक्रम का संचालन उमाशंकर मिश्र ने किया तथा सभी का आभार हाजी जफरउल्ला खां ‘जफर’ ने किया गोष्ठी के अंत में सभी ने पिकनिक मनाते हुए भोजन का आनंद लिया।
                                    रपट-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी‘‘
                                        अध्यक्ष-म.प्र.लेखक संघ टीकमगढ़
                                        मोबाइल-9893520965
                                        E-Mail- ranalidhori@gmail.com













rajeev namdeo rana lidhori

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