राना का ब्लॉग पढ़ने वाला100वां देश बना लिथुआनिया :-
लिथुआनिया देश की सामान्य जानकारी :-
लिथुआनिया एक छोटा सा देश है जो उत्तरी यूरोप में बाल्टिक क्षेत्र में स्थित है। यह देश बाल्टिक सागर के किनारे पर स्थित है।इसके पड़ोसी देश लातविया, बेलारूस, पोलैंड, और रूस हैं
लिथुआनिया की राजधानी विलनियस है यहां की भाषा लिथुआनियन है एवं मुद्रा यूरो है इस देश कीजनसंख्या: लगभग 2.8 मिलियन है तथा क्षेत्रफल 65,300 वर्ग किलोमीटर है
इस देश को स्वतंत्रता: 11 मार्च 1990 में सोवियत संघ से मिली थी। संसदीय गणराज्य की सरकार है यहां के वर्तमान राष्ट्रपति: गीतानास नौसेदा है एवं प्रधानमंत्री: इनेग्रा शिमोनाइट है
लिथुआनिया की अर्थव्यवस्था :-
यहां की जीडीपी: लगभग 49 बिलियन यूरो है।जीडीपी वृद्धि दर: 3.5% है यहां कामुख्य उद्योग: सेवा, उद्योग, कृषि।मुख्य व्यापारिक साझेदार यूरोपीय संघ, रूस, बेलारूस देशों से है।
लिथुआनिया की संस्कृति: -
लिथुआनियन लोकगीत:- लिथुआनिया में एक समृद्ध लोकगीत परंपरा है।
लिथुआनियन व्यंजन: लिथुआनियन व्यंजन में शीतकालीन सब्जियाँ, मांस, और दूध के उत्पाद शामिल हैं
इतिहास:-१४वीं शताब्दी में लिथुआनिया यूरोप का सबसे बड़ा देश हुआ करता था। आधुनिक बेलारूस व युक्रेन के साथ-साथ पोलैन्ड और रूस के कई हिस्से लिथुआनिया महाड्यूक राज्य के भाग थे। १५६९ में लुबलिन संधि के तहत पोलैन्ड और लिथुआनिया एक द्विराष्ट्रीय 'पोलिश-लिथुआनियाई महाकुल' नामक परिसंघ में जुड़ गए। यह लगभग १५०-२०० वर्षों तक सलामत रहा लेकिन १७२२ से १७९५ काल में पड़ोसी देशों ने इसे धीरे-धीरे तोड़ दिया। लिथुआनिया के अधिकतर भूभाग पर रूसी साम्राज्य का अधिकार हो गया।
प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान १९१७ में रूस में अक्टूबर समाजवादी क्रांति हुई जिस से रूसी साम्राज्य टूटा और सोवियत संघ ने जन्म लिया। इस उथल-पुथल का लाभ उठाते हुए १६ फ़रवरी १९१८ को लिथुआनियाई राजनैतिक नुमाइन्दो ने 'लिथुआनिया के स्वतंत्रता विधेयक' पर हस्ताक्षर किये और लिथुआनिया को एक आज़ाद राष्ट्र घोषित कर दिया। १९४० में, द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान, सोवियत संघ ने लिथुआनिया पर क़ब्ज़ा कर लिया और उसे लिथुआनियाई सोवियत समाजवादी गणतंत्र के नाम से गठित करके अपना भाग बना लिया। जल्द ही नात्ज़ी जर्मनी की फ़ौजों ने उन्हें निकालकर स्वयं लिथुआनिया पर नियंत्रण कर लिया। १९४४ में जब जर्मनी हारने लगा तो उसने अपनी सेनाएँ लिथुआनिया से हटा लीं और सोवियत संघ ने वापस लिथुआनिया पर अधिकार जमा लिया।
१९९० में जब सोवियत संघ कमज़ोर पड़ा तो ११ मार्च १९९० को लिथुआनिया अपनी अलग स्वतंत्रता घोषित करने वाला पहला सोवियत गणतंत्र बना। आधुनिक लिथुआनिया यूरोपीय संघ, यूरोपीय परिषद और नाटो का सदस्य है और इसकी आर्थिक बढ़ौतरी का दर यूरोप के सबसे तेज़ देशों में से एक है। २००७-२०१० काल के विश्व आर्थिक मंदी का असर इस देश पर भी हुआ था लेकिन उसके बाद से अर्थव्यवस्था फिर से तेज़ी से विकसित हो रही है।
साभार:- विकीपीडिया, , इंटरनेट व अन्य स्रोतों से
प्रस्तुति -नामदेव राना लिधौरी
‘राना लिधौरी’ के सौ देशों के ब्लाग पाठक हुए
(राना लिधौरी ने इतिहास रचा सौ देशों के ढाई लाख पाठक):-
टीकमगढ़//बुन्देलखण्ड के ख्यातिप्राप्त कवि राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी की के ब्लाग पाठक व्यू संख्या आज ढाई लाख के करीब पहुँच गयी है। उनके 100 देशों के 235781 पाठक हो चुके है एवं सोशल मीडिया पर पाँच लाख से अधिक पाठक है उनके ब्लाग राजीवरानालिधौरीब्लाग स्पाट डाॅट काम को बहुत पसंद किया जा रहा है।
राना लिधौरी ने बताया कि लिथोआनिया देश के एक पाठक के जुड़ते ही उनके पढ़ने वालों देशों की संख्या 100 हो गयी हैं। उनके ब्लाग पर 907 पोस्ट में हिन्दी एवं बुन्देली में कविताएँ लिखी गयी हैं। जिनको 100 देशों के 235781 लोग पढ़ चुके हैं। उन्होंने एक नया इतिहास रचा है। इस प्रकार से राना लिधौरी हिन्दी एवं बुन्देली को विश्वपटल पर लोकप्रिय बनाने में अपनी अहम भूमिका अदा कर रहे है।
गौरतलब हो कि राना लिधौरी की अब तक 5 बुन्देली एवं 6 हिन्दी में पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है तथा 18 पुस्तकों का संपादन करते हुए 137 ‘ई बुकों’ का संपादन एवं प्रकाशन कर चुके हैं। टीकमगढ़ जिले से प्रकाशित होने वाली एकमात्र साहित्यक पत्रिका ‘‘आकांक्षा’’ का प्रकाशन विगत 21 सालों से नियमित करते आ रहे हैं। विगत पाँच सालों से ‘अनुश्रुति’ नाम से एक बुन्देली की त्रैमासिक ई पत्रिका का भी नियमित प्रकाशन कर रहे है। ‘राना लिधौरी द्वारा ‘बुन्देलखण्ड के आधुनिक कवि ग्रंथ का प्रकाशन किया गया है, जो कि बहुत चर्चा में है। राना लिधौरी के हिन्दी एवं बुन्देली ब्लाग को अब तक 100 देशों के ढाई लाख से अधिक पाठक पढ़ चुके हैं। इसके पूर्व राना लिधौरी को उनकी कृति ‘लुक-लुक की बीमारी’ बुंदेली (़गद्य व्यंग्य संग्रह) तत्कालीन राज्यपाल मध्यप्रदेश मान.आनंदी बेन पटेल द्वारा सन् 2018 में भोपाल में 5000रूपए शांति देवी पुरस्कार से सम्मानित किया था। सन् 2023 में साहित्य अकादमी का इक्यावन हज़ार रुपए का ‘छत्रसाल पुरस्कार’ भी आपको प्राप्त हो चुका है। तीन राज्यपाल सहित देशभर से लगभग 200 सम्मान प्राप्त ‘राना लिधौरी’ हिन्दी एवं बुन्देली में साहित्य के लिए समर्पित राना लिधौरी आजकल खूब सुर्खियों में है हाल की में उनका ‘राना लिधौरीः गौरव ग्रंथ 426 पेजों में प्रकाशित हुआ है।
राना लिधौरी के 100 देशों के 235781 ब्लाग पाठकों में कुछ प्रमुख पाठकों की देश बार संख्या निम्नलिखित है-
(01) भारत-177666 (02) अमेरिका-12982,(03) सिंगापुर-12694,(04) नीदरलैंड-8344, (05) रूस-1689 (06) जर्मनी-1317, (07) इजराइल-958, (08) हांगकांग-1985, (09) यूनाइटेड किंगडम-812, (10) मैक्सिको-712,(11) स्वीडन-670, (12) आयरलैंड-587, (13) फिनलैंड-472, (14) कनाडा-552, (15) पुर्तगाल-548,(16) फ्रांस-431 (17) आस्ट्रेलिया-186, (18) इंडोनेशिया-153,(19)-यूक्रेन-121,(20)पोलेंड-115, (21) ब्राजील-98,(22) वियतनाम-90, (23) संयुक्त अरब अमीरात-82,(24) तुकर्मेनिस्तान-80,(25) नेपाल-73, (26) वेनेजुएला-42,
(27) जापान-38, (28) चेकिया-35, (29) स्विटजरलैंड-37 (30) स्पेन-32, (31) चीन-27,(32) बांग्लादेश-25,(33) द.कोरिया-24, (34) मलेशिया-24 (35) रोमानिया-08 (36) तुर्की-20,(37) थाईलैंड-16 (38) आस्ट्रिया-15, (39) केन्या-12, (40) ताइवान-11, (41) पाकिस्तान-11, (42) नार्वे-10, (43) अर्जेनटाइना-09, (44)-कोलांबिया-8, (45) फिलीपींस-8, (46)-बेल्जियम-7,(47) कतर-7,(48) श्रीलंका-06, (49) सर्बिया-06, (50) मारीषस-6, (51) इटली-06, (52) ईरान-04, (53) इक्वाडोर -4, (54) ब्रिटेन-4, (55) ओमान-4, (56) लाग्जवर्ग-03, (57) द.अफ्रीका-02, (58) साउदी अरब-02, (59) ग्वाटेमाला-02, (60) किग्रिस्तान-02, (61) स्लोवकानिया-2, (62) पनामा-02, (63) कुवैत-2,(64) माल्डोवा-02 (65) उजवेकिस्ताान-02 (66) बेलारूस-02, (67) रवांडा-02, (68) जार्डन-02, (69) जार्जिया-02, (70) हंगरी-2, (71) नाइजीरिया-1, (72) साइप्रस-1, (73) अजरवैजान-1, (73) कजाकिस्तान-1, (74) बोलिविया-1, (76) डेनमार्क-1, (77) आइसलैंड-1,(78) मंगोलिया-1, (79)-यमन-1, (80) बहरीन-1,(81) मिश्र-1,(82) त्रिनिदाद,टुबैको-1, (83) चैक गणराज्य-1, (84) यूनान-1, (85) म्यांमार (वर्मा)-1, (86) न्यूजीलैंड-1,(87) फिजी-1, (88) बोत्साना-01,89) होंडूरास-1,(90) पोटोरिको-1,(91) इराक-1, (92) अल्जीरिया-1,(93) अल्बानिया-1,(94) गिनी-1, (95) न्यूकेलेडोनिया-1, (96) लाइबेरिया-1,(97) मकाउ -1, (98) लातविया-1, (99) कांगोकिरांग-1, (100) लीथोआनिया-1, अज्ञात क्षेत्र-14185 पाठक व्यू हैं। कुल 100 देशों के 2,35781 पाठक व्यू है।
इसी प्रकार से अन्य सोषल मीडिया के अन्य प्लेटफार्म राना लिधौरी' के पाठक संख्या अग्रलिखित है- साहित्यपीडिया-2,45593, यू ट्यूब-49917(237), प्रतिलिपि-27389(321), कुटुंब ऐप-14986(241),
पब्लिक ऐप-6856, फेसबुक-4906,नोजोटो-3594,
लघुकथा कोष-1486,फेसबुक पेज-4902,
जय बुंदेली साहित्य समूह फेसबुक पेज-684व 466,इंस्टाग्राम- फालोवर 410,डेलीहंट-154,शब्द इन-129(27),सोफीजन-3269, ट्वीटर-26,
16- एक्सपर-18 फालोवर है।
इस उपलब्धि पर राना लिधौरी को जिले में साहित्यकारों ने बधाइयाँ एवं शुभकामनाएँ दी है जिसमें प्रमुख रूप से श्री रामगोपाल रैकवार, विजय मेहरा,प्रमोद मिश्रा,उमाशंकर मिश्रा, शील चन्द्र जैन, चाँद मोहम्मद,सुभाष सिंघई, डाॅ. प्रीति सिंह परमार, प्रदीप खरे ’मुंजल’, कैलाश श्रीवास्तव आदमी, अनिल अयान,डाॅ. राज गोस्वामी,मीरा खरे,एस.आर.सरल,कमलेश सेन,रविन्द्र यादव,वीरेन्द्र चंसौरिया,विद्या शरण खरे,डाॅ. रेणु श्रीवास्तव,वफ़ा शैदा,स्वप्निल तिवारी,डाॅ. नरेन्द्र मोहन अवस्थी,डाॅ.एम.एस श्रीवास्तव,रामानंद पाठक सहित अनेक साहित्यकार हैं।
*-राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’*
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