सोमवार, 14 दिसंबर 2015










जनाब चाँद आखिर भाई द्वारा ली गयी राना लिधौरी की विभिन्न मुद्राओं में ग़ज़ल पढ़ते हुए फोटो धन्यबाद चाँद भाई       

तंजीम ़बज़्में अदब’ का सालाना जलसा एवं मुशायरा हुआ- date-13-12-2015  Tikamgarh mp
 

टीकमगढ़//‘ इंदिरा कालोनी में केप्टन सत्तार आजाद के निवास पर तंजीम ‘बज़्में अदब’ का सालाना जलसा एवं मुशायरा हुआ जिसमें मेहमाने खुसूसी जनाब राकेश गिरी पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष एवं रमजान खां वार्ड पार्षद एवं श्री पर्वत लाल अहिरवार जिला पंचायत अध्यक्ष रहे एवं प्रोग्राम के मेहमानान श्रीरामकुमार पार्षद,संतोष कुमार पार्षद एवं शोभाराम पार्षद की उपस्थिति रही। प्रोग्राम की सदारत जनाब जब्बार खां खान पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष ने की।
प्रोग्राम का आगाज जाबिल गुल ने किया।
 इसके बाद झाँसी से पधारे शायर नसीम मुहँफट ने अपना कलाम पेश किया-
बेग़म है ऐसी पाई अरे बाप क्या करूँ,,च्युंगम चबी चबाई अरे बाप क्या करूँ।
सागर से तशरीफ़ लाए शायर जनाब अशफाक अंदाज़ ने ग़ज़ल पेश की-
वही करेगा मदद इंतज़ार बाकी है,
मेरे नसीब मेें परबरदिगार बाकी है।।
झाँसी से पधारे शायर ने जनाब शकील कुरेशी ने अपना कलाम में कहा-
सभी से आशियाँ अपना अलग हटकर बनाया है।
 हवा के शहर में कागज़ का घर बनाया है।।
सरपरस्त कारी अख्लाक ने कलाम पेश किया-
खिरद वाले है खुश फहमी में लेकिन,वो दाना है जो दिवाना हुआ है।।
तंजीम के सदर इकबाल फ़ज़ा ने कलाम पेश किया -
ग़ज़ल कहने चले है आप लेकिन अभी शेरों में गहराई नहीं है।
म.प्र.लेखक संघ के जिलाध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने ग़ज़ल पेश की-
     तुम एक दरिया सा बहकर देखों,
      तुम्हें भी किसी दिन समंदर मिलेगा।

उमा शंकर मिश्रा ने ग़ज़ल पेश की-
नफ़रत के तू चार न लिख,
प्यार के अक्षर ढाई लिख।
बहुत लिख लिया ऐ तन्हा अपनी अब तन्हाई लिख।।
अनवर खान ने ग़ज़ल पेश की-
अब रिहा हो भी जाऊँ तो क्या फायदा,कट गयी उमर सारी हवालात में।।
बिजावर से तशरीफ़ लाए शायर फरीद बेग ने अपना कलाम पेश किया-
अक्सर लगा के आग बुझाता है फिर वही,    
   ऐसा भी एक शख्स हमारे शहर में है।
जनबा बशीर फराज़ ने ग़ज़ल पेश की- उसने मुझे भेजा है फूलों का नज़राना,दुनिया ने बना डाला उसका नज़राना।।
हा़जी हनीफ़ अहमद नेे कलाम पेश किया -वो हिन्दू थे न मुस्लिम थे,
न कोई सिख इसाई,
  सभी ने मिलकरके अंग्रेजो को भगाय था।।
हाजी अनवर’ ने कलाम पेश किया-
हमारे देश की धरती ही सबसे प्यारी है,ये बागे खुल्द है जन्नत की एक क्यारी है।
शिवचरण उटमालिया नेे पेश किया -
नज़र से गिरने का ग़म हो गया है,मोहब्बत में ये आलम हो गया है।।
अनके अलावा केप्टन सत्तार आजाद’,शकील खान, पूरनचन्द्र गुप्ता,गीतिका वेदिका, डाॅ.रूससाना सिद्दीकी, साबरा सिद्दीकी, कु.वीणा, चाँद मोहम्मद आखिर,लाल जी सहाय श्रीवास्तव, ने भी अपने कलाम पेश किया।
नशिस्त का संचालन सागर से तशरीफ़ लाए शायर जनाब अशफाक ने किया एवं सभी का शुक्रिया अदा सदर इकबाल फ़जा ने किया।

रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
   अध्यक्ष म.प्र.लेखक संघ,टीकमगढ़,
  मोबाइल-9893520965,    rajeev namdeo rana lidhori
   

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