रविवार, 5 जुलाई 2015

म.प्र.लेखक संघ की ‘प्रेमचन्द्र’ पर केन्द्रित 199वीं गोष्ठी हुई Date-5-7-2015



म.प्र.लेखक संघ की ‘प्रेमचन्द्र’ पर केन्द्रित 199वीं गोष्ठी हुई-
 
टीकमगढ़//‘ म.प्र.लेखक संघ’ टीकमगढ़ की 199वीं गोष्ठी ‘प्रेमचन्द्र’ पर केन्द्रित गायत्री शक्तिपीठ बानपुर दरवाजा में आयोजित की गयी, जिसके मुख्य अतिथि उमा शंकर मिश्र रहे व अध्यक्षता बी.एल.जैन ने की जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में साहित्यकाऱ श्री शांतिकुमार जैन रहे। सर्वप्रथम सभी ने प्रार्थना गीत - हे प्रभु अपनी कृपा की छाँव में ले लीजिए। कर दृर खोटी बुद्धि सबको नेक नियति दीजिए गाया तथा पूरन चन्द्र गुप्ता ने सरस्वती वंदना‘ की।
 तत्पश्चात-पहले दौर में प्रेमचन्द्र पर आधारित में विचार गोष्ठी में आलेख ग्राम दिगौड़ा से पधारे युवा कवि देवेन्द्र कुमार अहिवार ने पढ़ा,जबकि बी.एल.जैन ने प्रेमचन्द्र के जीवन को संघर्षपूर्ण बताते हुए उनकी कृति ‘सोजे वतन’ पर चर्चा की, वही उमाशंकर मिश्र ने कहा की-हमारे बुन्देलखण्ड के बांदा में ही सबसे पहले धनपत राय को ‘पे्रमचन्द्र’ नाम दिया था। राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी ने कहा कि-प्रेमचन्द्र कथासम्राट होने के साथ-साथ एक श्रेष्ठ उपन्यासकार भी थे। उनके रचे पात्र आज भी जीवंत है। शिक्षक अविनाश खरे ने कहा कि पे्रमचन्द्र की कहानियाँ समसामयिक व प्रेरणादायक है।
दूसरे दौर में कवि गोष्ठी हुई जिसमें पूरनचन्द्र गुप्ता ने कविता पढ़ी-हिन्दी साहित्य को मिला निश्चित ही नव मोड।
                                       प्रेमचन्द्र ने ही दिया बंगला,उर्दू,तोड।।
परमेश्वरीदास तिवारी ने कविता सुनायी-    भ्रष्टाचार दहाड़ रहा है खुलकर के दरवाजे।
नाच रही पशुता घर-धर में बजा बजाकर बाजे।
कवि राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने ग़ज़ल सुनायी-
                                बचके रहना सदा आज के दौर में,लोग रहते भी है घात ही घात में।
                        उसको समझा चुके बात ही बात में,समझे भाषा को वो लात ही लात में।।
ग्राम लखौरा से पधारे कवि गुलाब सिंह यादव ‘भाऊ’ ने पढ़ा- ईश्वर पानी खा रये तरसा,कऊ सूका कऊ बरसा।
                                सुनलो सबको जानो मानो,पोष माव और चैत चिचाने।।
उमाशंकर मिश्र तन्हा’ ने ग़ज़ल पढ़ी- बात ही बात में बात बढ़ती गयी,दे दिया दिल उसे बात ही बात में।।
शांति कुमार जैन ने पढा -मेरी आवाज सुनो मेरा दर्द भरा गीत सुनो ,अन्तर्मन से पुकार रहा हँू उसे स्वीकार करो।।
गीतकार वीरेन्द्र चंसौरिया ने गीता सुनाया- जो सच्चे है वहीं अमर जग में रहते हैं।
बाबूलाल जैन ने कविता पढ़ी- अवसर जुटा हम आदमी को मोड़ क्यों दे,हम आदमी है आदमी को छोड़ क्यों दे।।
बाल कवि वेद प्रताप पस्तोर ने बुंदेली कविता सुनायी-मस्साब हते कर्मचारी हो गये,दातन फंसी सुपारी हो गये।।
गोष्ठी संचालन उमा शंकर मिश्र ने किया एवं सभी का आभार प्रदर्शन अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी ने किया। म.प्र. लेखक संघ की आगामी 200वीं गोष्ठी ‘गीत’ पर केन्द्रित होगी तथा यह गोष्ठी दिनांक 2 अगस्त को 2 बजे से परमेश्वरीदास तिवारी के निवास अद्धुव्र्य मंंिदर के सामने,सराय मोहल्ला,पुराना पोष्ठ आफिस के पास आयोजित की जायेगी।  
  
रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
         अध्यक्ष म.प्र.लेखक संघ,टीकमगढ़,
        मोबाइल-9893520965,              


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