रविवार, 9 अगस्त 2015

म.प्र.लेखक संघ ने 200वीं गोष्ठी कराकर रचा इतिहास

म.प्र.लेखक संघ ने 200वीं गोष्ठी कराकर रचा इतिहास
          (‘गीत’ पर केन्द्रित हुई 200वीं गोष्ठी)
(‘बक्स्वाहा,चंदेरा,बल्देवगढ़,नदनवारा,लखौरा से पधारे कवि)

  टीकमगढ़//‘ म.प्र.लेखक संघ’ टीकमगढ़ ने 200वीं गोष्ठी आयोजित कराकर टीकमगढ़ के साहित्यिक इतिहास में एक मील का पत्थर स्थापित कर दिया है इसका सारा श्रेय संस्था के अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी एवं सचिव रामगोपाल रैकवार को जाता है जिन्हांेने संस्था को इतनी ऊँचाईयाँ प्रदान की आज टीकमगढ़ इकाई की मिशाल प्रादेशिक इकाई भोपाल द्वारा दी जाती है। यह विचार उमा शंकर मिश्र‘तन्हा’ ने व्यक्त किये।
इस अवसर पर दोहा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए म.प्र लेखक संघ ने वरिष्ठ कवि अवध बिहारी श्रीवास्तव ‘दाऊ’ को ‘दोहाश्री’ की सम्मोनोपाधि से विभूषित किया गया।
 200वीं गोष्ठी गीत’ पर केन्द्रित गायत्री शक्तिपीठ बानपुर दरवाजा में आयोजित की गयी, जिसके मुख्य अतिथि रामगोपाल रैकवार रहे व अध्यक्षता प.मनमोहन पाण्डेय ने की जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में नदनवारा से पधारे गीतकाऱ शोभाराम दांगी व वीरेन्द्र चंसौरिया रहे।
सर्वप्रथम भान सिंह श्रीवास्तव ने सरस्वती वंदना‘ की और गीत सुनाया-छैला छलिया छलन बृजनार बन गये’’
 ग्राम चंदेरा से पधारे कवि देवकी नंदन शुक्ला’ ने पढ़ा-
   भोल बम बम बम,भोले बम बम बम,
  भ्रष्टाचार की कालिख लगा गया व्यापम।।
ग्राम बक्स्वाहा से पधारे कवि बृजभूषण दुवे ’बृज’ ने सुनाया- लोक परलोक की साथ देती है गऊ माता।
ग्राम बल्देवगढ़ से पधारे कवि कोमलचन्द्र बजाज’ ने पढ़ा-
 न हम हिन्दू सिख ईसाई न जैन बौेद्ध न मुसलमान।
हम सब मानव ,मानव जाति,एक ईश्वर की है संतान।।
ग्राम नदनवारा से पधारे गीतकार शोभाराम दांगी ‘इन्दु’ ने गीत पढ़ा-
 झाँसी की रानी ने होंसला दिखाया है,
उमर की है बारी सोते को जगाया हैै।।
ग्राम लखौरा से पधारे कवि गुलाब सिंह यादव ‘भाऊ’ ने पढ़ा- मोदी मौढा भूख नंगे रये,रोटी नईयां काल खाँ।।
ग्राम बल्देवगढ़ से पधारे युवाकवि जय हिन्द ‘स्वतंत्र’ ने पढ़ा-
 जिन लोगो को अमर तिरंगा भारत का स्वीकार नहीं।
उनको भारत की धरती पर रहने का अधिकार नहीं।।
वीरेन्द्र चंसौरिया ने गीत गाया-   
प्राणों से प्यारे देश हमारे कगरने न देगे तेरी शान हम।।
रामगोपाल रैकवार ने गीत सुनाया-
पथ पे पद चिह्न कोई अभी लिखा भी नहीं,
 लक्ष्य संकेत कोई अभी दिखा भी नहीं।
लेखक संघ के जिलाध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने व्यंग्य कविता सुनायी-‘‘झण्डा ऊँचा रहे हमारा’’
    बिना नोट के काम चले न बिना सोर्स के दालगले न।
    रिश्वत का है खेल सारा झण्डा ऊँचा रहे हमारा।।
गीतकार मनमोहन पाण्डेय ने गीत पढ़ा- वह सुबह कभी तो आयेगी,जब हरियाली की साडी पहने धरती माँ मुस्कुरायेगी।।
अवध बिहारी श्रीवास्तव ने पढा -दुनिया भूल न जाना भारत के उपकारों को।
हाजी ज़फ़रउल्ला खां जफ़र ने ग़ज़ल पढी-
करता है फक्र मुल्क मिसाइलमेन के नाम पर,
उस जैसा नेक दिल तो अब इंसाल नहीं है।।
उमाशंकर मिश्र तन्हा’ ने ग़ज़ल पढ़ी-
सफेद रंग ने केशरिया,हरे व नीले रंग से कहा-
आओ हम सब मिलकर तिरंगे का  निमार्ण करे
 और सभी काले रंगों का मुँह काला करे।।
सियाराम अहिरवार ने कविता सुनायी-
हिन्द हमारा देश प्यारा हम इसकी बगिया के फूल।
दीनदयाल तिवारी ने कविता पढी-
तड़क भड़क की चकाचैंध में दौड रहे सब बेधड़क।
 पूरनचन्द्र गुप्ता ने कविता पढ़ी-
बढे चलो तुम वीरो तुम आगे भारत भूमि पुकारती।
अभिनंदन गोइल ने बुंदेली लोक कथा ‘जकडे पंख और पीर घनेरी’ सुनायी।


rajeev namdeo rana lidhori सीताराम राय ने पढा-भारत माता बुला रही।
इनके आलावा परमेश्वरीदास तिवारी,शिवचरण उटमालिया, बाबूलाल जैन, विजय कुमार मेहरा, आर.एस.शर्मा,रघुवीर आनंद,वेद प्रताप पस्तोर आदि ने भी रचनाएँ पढी।
 गोष्ठी संचालन राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने किया एवं सभी का आभार प्रदर्शन अजीत श्रीवास्तव ने किया।
 
 रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’,
अध्यक्ष म.प्र.लेखक संघ,
टीकमगढ़,
मोबाइल-9893520965,   

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