रविवार, 5 अप्रैल 2015

म.प्र.लेखक संघ की ‘हास्य व्यंग्य’ पर केन्द्रित 196वीं गोष्ठी हुई-5-4-2015

म.प्र.लेखक संघ की ‘हास्य व्यंग्य’ पर केन्द्रित 196वीं गोष्ठी हुई-
(गायत्री शक्तिपीठ पर हुई रसवर्षा)
  टीकमगढ़//‘ म.प्र.लेखक संघ जिला इकाई टीकमगढ़ की 196वीं गोष्ठी ‘ हासय व्यंग्य’  पर केन्द्रित गायत्री शक्ति पीठ बानपुर दरवाजा में आयोजित की गयी, जिसके मुख्य अतिथि बल्देवगढ से पधारे साहित्यकाऱ श्री कोमल चन्द्र बजाज  रहे व अध्यक्षता उमाशंकर मिश्र ‘तन्हा’ ने की जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप युवा व्यंग्यकार विजय मेहरा रहे।
पूरन चन्द्र गुप्ता’ ने सरस्वती वंदना पढ़ी और ये ग़ज़ल सुनायी- देखा एक तमाशा हमने,सत्ता के बाज़ार में।
                                    ठलुवा तो है हलुआ खा रय जनता है लाचार में।।
कुण्डेश्वर से पधारे पी.एल. कड़ा ने चैकडिया पढ़ी-चुगला चुगली बिना नी मानत,मसकऊँ कै कें लम्बी तानत।
हाजी ज़फ़र उल्ला खां ‘ज़फ़र’ ने बुन्देली ग़ज़ल पढी-बूढ़न खां ई सुख पहुचाई,पइसा लठिया और लुगाई।।
म.प्र.लेखक संघ के जिलाध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने हास्य कविता सुनायी-
                मैंने जैसे ही डायरी उठायी, ये देख पत्नी गुर्राई,
कहा जा रहे हो फिर कवि सम्मेलन,विरोध कर रहा था उनका बेलन।।
उमाशंकर मिश्र तन्हा’ ने पेरोडी सुनायी- एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा...
जैसे कोयला की खान जैसे कौआ की तान जैसे आफत में जान........
 कृष्ण कुमार रावत ‘किस्सू’ ने पढा-जि़न्दगी जैसी तमन्ना थी कुछ कम है,हर घड़ी होता एहसास कहीं कुछ कम नहीं।।
बल्देवगढ़ से पधारे कवि कोमलचन्द्र बजाज ने पढा- गाल बजाकर जजमानों को नाच नचा गए पंडित जी।
रचकर माया जाल चकाचक माल उड़ाते पंिड़त जी।।
परमेश्वरीदास तिवारी ने कविता पढ़ी-    धन्य धरा बुन्देलखण्ड की की डग-डग में है पानी।
                        शीतल मंद सुगंध पवन है फसल होत मनमानी।।
वीरेन्द्र चंसौरिया ने गीत पढा-हम प्रैम से रहे तो हंसेगी ये जि़न्दगी,हम फूल से खिले तो खिलगी ये जि़न्दगी।।
अनवर खान साहिल ने ग़ज़ल पढ़ी-दुका दुका के धर लई घर के रेक में,सेल्समेन ने बैंची खाद ब्लैक में।।
बल्देवगढ़ से पधारे कवि यदुकुलनंदन खरे ने पढा-    मँहगाई भ्रष्टा क्या बेरोजगारी से जुडे हुए,
सवाल इसी तरह से उभरते ाहेगे।
भान सिंह श्रीवास्तव ने कविता पढी-एक डाली पर दो बन्दा बैठे,बिस्कुट और विस्की के लिए आपस में लड     रय थे।
दीनदयाल तिवारी ने पढा-हमतौ कई ती कै जौ का कर रये,कुत्तन के बगर में कनक के दिया धर रय।।
सीताराम राय ने पढा-बांके बिहारी प्यारे रहना तू आसपास,दर्शन बिना तेरे बुझती नहीं प्यास।।
अभिनन्दन गोइल ने मेरे घर में चिडि़या का घौंसला’ कविता पढी। अजीत श्रीवास्वत व्यंग्य ‘तत्वज्ञान’ एवं विजय मेहरा ने व्यंग्य ‘लोकतंत्र के कब्बे’ सुनाया। अवध विहारी श्रीवास्तव ने पढा-डर लागे और हासी आवे,अजब जामाना आया है।
रघुवीर आनंद ने पढा-हम तुमसे डरते है ऐसे चोर पुलिस से डरता जैसे। ऐसा हैआंतक तुम्हारा बिच्चु जैसा डंक तुम्हारा।
शांति कुमार जैन ने पढा-मेरे दिल कहता है कि मैं उसके साथ ठहर जाऊँ।
मनमोहन पांडे ने पढा-तारे बहुत है आसमां में एक तारा ना सही। हैं नजारे सैकड़ों बस इक नजारा न सही।।
बी.एल. जैन ने पढा-केवल आदमी ही हँसकर प्रसन्न चित्त होता है। जानवरों के पास न हँसने हँसाने का चेहरा होता है।
लेकगीत गायक सत्यनारायण तिवारी ने पढा-हर हर गंगे हर गोपाल आजादी के सडसठ साल।
जनता कौ कौ बूझे हाल,भ्रष्आचारी मालामाल।
इनके अलावा लक्ष्मी नारायण शर्मा ने भी अपने विचार रखे। गोष्ठी संचालन वीरेन्द्र चंसौरिया ने किया एवं सभी का आभार प्रदर्शन जिलाध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधोैरी’ ने किया।    
                रपट- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
            अध्यक्ष म.प्र.लेखक संघ,टीकमगढ़,मोबाइल-9893520965,                rajeev namdeo

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