रविवार, 5 मार्च 2017

म.प्र. लेखक संघ की ‘नारी शक्ति’व ‘‘माँ’’ पर केन्द्रित हुई 221वीं गोष्ठी 5-3-2017

Date-5-3-2017
.प्र. लेखक संघ की ‘नारी शक्ति’व ‘‘माँ’’ पर केन्द्रित हुई 221वीं गोष्ठी

टीकमगढ़//नगर की सर्वाधिक सक्रिय साहित्यिक संस्था ‘म.प्र.लेखक संघ’
 जिला इकाई टीकमगढ़ की 221वीं गोष्ठी ‘नारी शक्ति’ एवं ‘माँ’ पर केन्द्रित
 डे केयर राजमहल परिसर में आयोजित की गयी।
 जिसमें मुख्य अतिथि डा.अनीता गोस्वामी रही एवं
अध्यक्षता वरिष्ठ कहानीकारा डाॅ. रूखसाना सिद्दीकी ने की तथा
 विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमती सुधा खरे मंचासीन रही।
 श्रीमती सुधा खरे ने सरस्वती वंदना करते हुए यह रचना पढ़ी-
नारी ने जिम्मेदारी ली पूरी कर दिखलायेगी।
समय शिला की पृष्ट भूमि पर अमिट लेखक बन जायेगी।
डाॅ. अनीता गोस्वामी ने पढ़ा-
मैं लिखँूगी माँ, लेकिन क्या, हर शब्द तुमसे छोटा लगता है।।
मानवता की गौरव गान तुम्हीं हो, सुबह की बेला दिन की धूप गोधूलि की साँझ तुम्हीं हो।।
डाॅ. रूखसाना सिद्दीकी ने सुनाया-
रक्त के कतरे कतरे से बना मेरा वजूद।
 मेरी हर साँस में रहती है माँ मौजूद।।
बल्देवगढ़ से पधारे कवि यदुकल नंदन खरे ने सुनाया-
अमीरों का गरीबों से कोई न कोई संबंध तो होता है।
श्रम से भावनाआंे का खिलवाड़ होता है।।
बल्देवगढ़ से पधारे कवि कोमल चन्द्र बजाज ने पढ़ा-
नारी द्रोपदी,सीता,नारी लक्ष्मी बाई,
सीता जग में पूजयनीय, जो राम के पहले आई।।
लखौरा से पधारे बुन्देली कवि गुलाब यादव ‘भाऊ’ने पढ़ा-
नर से नारी में शक्ति,सभी गुणों की खान है।
ज्ञान वैराग वीरता भक्ति कैरय वेद पुरान है।।
राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने कविता सुनायी-
देखा सब कुछ इन आँखों ने, अब थकन सी लगती है।
मुझको तो ये माता मरियम, मदर टेरेसा लगती है।।
सियाराम अहिरवार ने पढ़ा- नारी तेरे रूप अनेकों,सबमें रूप ममत्व का।
  तेरे हर किरदार में देवी, भाव भरा अपनत्व का।।
अमिताभ गोस्वामी ने पढ़ा- हम भला कैसे तुम्हारा ऋण चुकाए।
  बस हृदय से दे रहे माँ को दुआएँ।।
अनवार खान ‘साहिल’ ने गजल पढ़ी-
ओढ़कर आ रहा तिरंगा में, मेरी माँ को खबर दे दे।।
पूरन चन्द्र गुप्ता ने पढ़ा- अद्भुद रचना है नारी की सृष्टि के संग्राम में,
बनी विजेता है वह हर दम, विधि के उस परिणाम में।
सीताराम राय ने सुनाया-
समर का श्ंाखनाद है नारी। तो समर्पण का सागर है नारी।।
राज राजेश्वर पाराशर ने रचना सुनायी-
श्वेत वस्त्र धारिणी,श्वेत पद्मासिनी,श्वेत करो उजियारा, दूर अंधकार हो।।
डी.पी.शुक्ला ने पढ़ा- या जग में भई देवी सत्यवती पवित्रता और बलवान।
रविन्द्र यादव ने पढ़ा- तूने संसार बनाया तेरे कई अवतार।
लगता है ये सारा जीवन तुझपै जाऊँ बार।।
बी.एल. जैन ने पढ़ा- नारी महान है क्योंकि वह घर की शान है।।
भारत विजय बगेरिया ने सुनाया-
 लड़की देश का भविष्य होती है,बलिदान की मूर्ति लक्ष्मीबाई होती है।।
धर्मदास साहू ने सुनाया-
कलयुग में सिद्ध हो देव तुम्हीं हनुमान तुम्हारा क्या कहना।
    तेरी शक्ति का क्या कहना, तेरी भक्ति का क्या कहना।।
इसके अलावा हरिविष्णु अवस्थी,वीरेन्द्र बहादुर खरे, विजय मेहरा,रामगोपाल रैकवार,अजीत श्रीवास्तव,हाजी जफ़र उल्ला खां जफर,रामस्वरूप पाण्डेय, कृष्ण कुमार रावत, एन.डी.सोनी, प्रभुदयाल श्रीवास्तव, एस.पी.खरे, रघुवीर आनंद, दयाली विश्वकर्मा, बाल मुकुन्द प्रजापति, जय प्रकाश कुशवाहा, प्रभुदयाल गुप्ता, आदि ने 38 कवियों ने काव्य पाठ कियाI
 गोष्ठी का संचालन उमाशंकर मिश्र‘तन्हा’ ने किया तथा
सभी आभार अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने माना।
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रिपोर्ट -राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’                                                अध्यक्ष- म.प्र.लेखक संघ टीकमगढ़
 मोबाइल-9893520965





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