शनिवार, 2 मई 2015

आलेख-''बुन्देलखण्ड़ की प्रमुख पत्रिकायें (आलेख-राजीव नामदेव 'राना लिधौरी)

आलेख-''बुन्देलखण्ड़ की प्रमुख पत्रिकायें
                (आलेख-राजीव नामदेव 'राना लिधौरी)
           
            बुन्देलखण्ड कवियन और साहित्यकारन की खान हती और अबै है। सो इतै से मुलकन पत्रिकाएँ निकरत हतीं और अबै  निकर रइर्ं । बैसै सबसैं पैलाँ सन 1932 में 'वीर बुन्देल पत्रिका निकरी ती फिर दूसरी हमाये टीकमगढ़ सें श्री वीरेन्द्र केशव साहित्य परिषद द्वारा 1 अक्टूबर सन 1940 सें 'मधुकर (पाक्षिक पत्र) नाव से निकरत हती जी के संपादक देश के जानेमाने लेखक पत्रकार दादा श्री बनारसीदास चतुर्वेदी जी हते। 'मधुकर में 'बुन्देली उर खड़ी बोली में कविताएँ व आलेख छपत हते। जून सन 1944 सें 'लोकवार्ता त्रैमासिक टीकमगढ़ से कड़न लगी जी को सम्पादन श्री कृष्णानंद गुप्त जू करत ते।'विन्ध्यवाणी साप्ताहिक टीकमगढ़ से 2 अक्टूबर सन 1948 से छपन लगो, सन 1962र्इ. में श्री कन्हैया लाला जू 'कलश ने गुरसराय से 'बुन्देली वार्ता शुरू  करो, फिर  डा. हरि सिंह गौर विश्व विधालय सागर से सन 1983-84 से 'र्इसुरी नाव से पत्रिका कौ प्रकाशन भऔ, जी के संपादक डा. कांति कुमार जैन हते र्इ में बुन्देलखण्ड के साहित्यकारन कौ एनर्इ स्थान मिलत हतो र्इ मे 'बुन्देली शब्द कोश कौ प्रकाशन भी होत हतो जो कि भौतर्इ काम कौ हतो।
        संवत 2038 से छतरपुर से 'मामुलिया पत्रिका डा. नर्मदा प्रसाद जी गुप्त के कुशल सपांदन में निकरत हती। छतरपुर से ही बसारी बुन्देली मेला उत्सव पर  'बुंदेली बसंत नाव से एक वार्षिक पत्रिका(स्मारिका) सन 2000 से निकरन लगी जी कै संपादक डा. बहादुर सिंह जी परमार है, जा पत्रिका एक शोध ग्रंथ को काम करत है। र्इ में 150 पेजन में बुन्देली से सम्बधित सबर्इ तरहा की जानकारी छपत है।
        एर्इ तरहा की एक वार्षिक पत्रिका 'बुन्देली दरसन हटा जिला दमोह से सोउ  सन  2008 से निकरन लगी है। जी को संपादन डा. एम.एम.पाण्डे जू करत, जा पत्रिका नगर पालिका हटा के द्वारा बुन्देली मेला पै हर साल निकरत। र्इ कौ चौथौ अंक भी अबर्इ कछु दिनन में निकरबै वारौ है। र्इ में सोउ मुलक पन्ना रत । तीसरे अंक सन 2010 में 124 पेज हते, रंगीन झाँकियन ओर फोटयन सैं सजी धजी जा पत्रिका भी मन खौ एनर्इ नौनी लगत । दमोह से 'बुंदेली अर्चन सोउ सन 2010 सें  निकरवौ शुरू भर्इ । ग्वालियर सै 'आखर माटी नाव सै सोउ एक पत्रिका निकरत ।            
    टीकमगढ़ (म.प्र.) से 'आकांक्षा नाँव से भी सन 2006 से एक वार्षिक लघु पत्रिका 64 पेजन की राजीव नामदेव 'राना लिधौरी के संपादन में निकरत है, र्इ में सोउ बुन्देली की कविताएँ छपती है। जी कौ सन 2015 कौ अंक 10 'माँ, विशेषांक के रूप में छपो  है जोउ अपुने हातन में है। सन 2006 से एक औरर्इ लघु चौमासा पत्रिका 48 पेजन की उरर्इ जिला जालौन (उ.प्र.) से 'स्पंदन नाव से निकरन लगी हैं। जी कै संपादक डा. कुमारेन्द्र सिंह जी सेंगर हैं।
            सन 2010 में छतरपुर से एक 'अथार्इ की बातें नाव से शुद्ध बुन्देली में एक त्रैमासिक पत्रिका श्री सुरेन्द शर्मा 'शिरीष जी के सपांदन के शुरू भइ है, जी कौ दूसरौ अंक छप गऔ है।साप्ताहिक निर्दलीय समाचार पत्र (भोपाल),चौमासा आदि।
 र्इ तरा से बुंदेली खौ बढावौ देवै वारी मुलकन पत्रिकाएँ निकरन लगी हैं। जी से बुन्देली कौ खूबर्इ नाव देश भर में हो रऔ है। इन पत्र-पत्रिकाओं में बुन्देलखण्ड की लोक संस्कृति एवं लोक साहित्य आदि की विशेषताओं को देश भर में एनर्इ बिखेरों है जा से बुन्देली को मान बढ़ो उर हमार्इ बुन्देली आज सबर्इ खौं नौनी लगन लगी है।
            मुलकन फिलमें सोउ बुन्देली में बनन लगी और बुन्देली लोकगीत तो देश भरे में सुने जात है। 'पीपली लाइव फिलम कांै गाना (लोकगीत) 'मंहगार्इ डायन खाय जात है तो एनर्इ पिरसिद्ध भओ। र्इ गाना (लोकगीत) ने तौ पूरे देशभरे में धूम मचा दयी। अब 'बुन्देली को भविष्य भौत ऊजरौ दिखार्इ देन लगो है।            
        &बुन्देलखण्ड़ की प्रमुख पत्रिकायें आलेख-राजीव नामदेव 'राना लिधौरी
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी
        संपादक 'आकांक्षा पत्रिका
       अध्यक्ष-म.प्र लेखक संघ,टीकमगढ़
      शिवनगर कालौनी,टीकमगढ़(म.प्र.)मोबाइल-9893520965
       साभार-'आकांक्षा पत्रिका टीकमगढ़ अंक-7 (2011) सपांदक-राजीव नामदेव'राना लिधौरी

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