Rajeev Namdeo Rana lidhorI

शनिवार, 19 जून 2021

दद्दा (बुंदेली दोहा संकलन) ई-बुक- संपादन- राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'



                             दद्दा
                  (बुंदेली दोहा संकलन) ई बुक
          संपादक - राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'

                              पैजनिया
                  (बुंदेली दोहा संकलन) ई बुक
          संपादक - राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'

प्रकाशन-जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़
© कापीराइट-राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'

ई बुक प्रकाशन दिनांक 20-06-2021
        टीकमगढ़ (मप्र)भारत-472001
         मोबाइल-9893520965

😄😄😄 बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़😄😄😄


              अनुक्रमणिका-
1-रामेश्वर प्रसाद गुप्त 'इंदु' (झांसी)
2- संजय श्रीवास्तव, मवई (दिल्ली)
3-प्रभुदयाल श्रीवास्तव, टीकमगढ़,(म.प्र.)
4- एस. आर. 'सरल', टीकमगढ़ 
5-कल्याणदास साहू "पोषक",पृथ्वीपुर(निवाड़ी)(म.प्र.)
6-जयहिंद सिंह 'जयहिन्द',पलेरा(म.प्र.)
7परम लाल तिवारी, खजुराहो (मप्र)
8-अशोक पटसारिया (लिधौरा, टीकमगढ़) 
9-डां. शरद नारायण खरे, मंडला
10-प्रदीप खरे 'मंजुल', टीकमगढ़ (मप्र)
11-वीरेन्द चंसौरिया, टीकमगढ़
12-हरिराम तिवारी, खरगापुर
13-गुलाब सिंह यादव'भाऊ', लखौरा, टीकमगढ़
14-शोभाराम दांगी इंदु, नदनवारा (मप्र)
अप्रतियोगी
15- राजीव नामदेव 'राना लिधौरी' (टीकमगढ़)(म.प्र.)
16-रामानंद पाठक 'नदं', नैगुवा(टीकमगढ़)(म.प्र)

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1-रामेश्वर प्रसाद गुप्त 'इंदु' (झांसी)
प्रथम स्थान प्राप्त दोहा-

दद्दा घर के हैं बडे़,
          दद्दा घर की शान।
                    मौडी़ मौड़न के करें, 
                                वे पूरे अरमान।।
                                            ***
  -रामेश्वर प्रसाद गुप्त इंदु.,बडागांव झांसी (उप्र.)
                               ***
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2- संजय श्रीवास्तव, मवई (दिल्ली)
द्वितीय स्थान प्राप्त दोहा-

दद्दा बरगद पेड़ से,
         पियत घाम दयँ छाँव।
                  परहित, भाव-स्वभाव सें, 
                               पूजत पूरो गाँव।।
                                        ***
                         -  संजय श्रीवास्तव, मवई (दिल्ली)

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3-प्रभुदयाल श्रीवास्तव, टीकमगढ़,(म.प्र.)

तृतीय स्थान प्राप्त दोहा-

दद्दा देरी द्वार की,
        आन बान उर सान।
                साक्षात भगवान हैं,
                         होबें ‌न‌इं  हैरान।।
                               ***
     -प्रभु दयाल श्रीवास्तव पीयूष टीकमगढ़

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4-एस आर सरल,टीकमगढ़(मप्र)


दूद दही  दद्दै दियों, 
दद्दा  रँय खुशहाल।
दद्दा की सेवा करें, 
होत न बाँकौ  बाल।।
***
 मौलिक एवं स्वरचित
     -एस आर सरल,टीकमगढ़      
        
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5-कल्याणदास साहू "पोषक", पृथ्वीपुर, (निवाड़ी)

देइ-देवता पूजकें , 
भारी खुसी मनात ।
दद्दा-जू औलाद खों , 
काबिल खूब बनात ।।                              ***
 -कल्याण दास साहू "पोषक"पृथ्वीपुर,निवाडी़ (मप्र)
  ( मौलिक एवं स्वरचित )

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  6-जयहिंद सिंह 'जयहिन्द',पलेरा(मप्र)

दद्दा कौ मन देवता,
राखें सबसें प्यार।
करबें भलौ समाज सँग,
सुखी रखें परिवार।।
               ***
#मौलिक एवम् स्वरचित#
-जयहिंद सिंह 'जयहिन्द',पलेरा, (टीकमगढ़)

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7- श्री परम लाल तिवारी,खजुराहो(मप्र)


बड़े होंय जो आयु में,
और अनुभव में सिध्द।
वे ही दद्दा नाम से, 
रहते जगत प्रसिद्ध।।
***
      -परम लाल तिवारी, खजुराहो

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8-अशोक पटसारिया नादान ,लिधौरा ,टीकमगढ़ (मप्र)


दद्दा की इक्कर धुकत,
दद्दा चलतादार।
दद्दा के बिन नइ लगत,
कौंनउ भी दरवार।।
   ***
               -अशोक नादान ,लिधौरा, टीकमगढ़ 

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9-डां. शरद नारायण खरे, मंडला(मप्र)

दद्दा की अब को सुनै,
मोड़ों को है राज।
बहुत बुरये दिन काटते,
घर-घर बूढ़े आज।।
***
                 --प्रो.शरद नारायण खरे, मंडला

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10-प्रदीप खरे 'मंजुल', टीकमगढ़ (मप्र)

दद्दा दय हैं दौंदरा,
खासत सबरी रात। 
बिड़ी पियै, पउआ डरै,
जानें कितनौ खात।।
***
-प्रदीप खरे 'मंजुल',टीकमगढ़ मप्र💐

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11-वीरेन्द चंसौरिया, टीकमगढ़

दद्दा के संग खाय हम,
दद्दा के संग सोय।
दद्दा बिन दिन रात मन,
भीतर भीतर रोय।।

***
वीरेन्द चंसौरिया, टीकमगढ़

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-
12-हरिराम तिवारी, खरगापुर

 दद्दा बिन अब रो रहे, 
सब परिवार अनाथ।
कोरोना के काल में, 
लाज रखें रघुनाथ।।
****
-हरिराम तिवारी, खरगापुर

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13- गुलाब सिंह यादव 'भाऊ', लखौरा, टीकमगढ़

दद्दा की परिवार में,
सबरी है पद भात।
 जन्म कर्म की सधना,  
राबे तुमरे सात।।  
***
   -गुलाब सिंह यादव भाऊ,लखौरा टीकमगढ़

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14--शोभाराम दांगी इंदु, नदनवारा (मप्र)


बैठे पंच अथाई पै, 
करै गांव की बात ।।
 होय समस्या कौनऊं,  
"दद्दा "ही निपटात ।।
            ---शोभारामदाँगी, नदनवारा

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अप्रतियोगी 

15- राजीव नामदेव 'राना लिधौरी', टीकमगढ़ (मप्र)
*बिषय बुंदेली दोहे -"पैजनिया"

1-सप्लीमेंट्री अप्रतियोगी-
 
*अप्रतियोगी दोहे/सप्लीमेंट्री* @ *बिषय-"दद्दा"*

*1*

दद्दा बैठे पोर में,
मूंछन पै दे ताव।
लंबी लंबी फैंकते
कर रय है बतकाव।।

***

*2*
दद्दा तो सुनतइ नई
कै कौनउ भी बात।
अपनी अपनी हांकते,
दे रय सबकौ मात।।
***

*3*
दद्दा बाई की करो,
सेवा दिन अरु रात।
उनके ही आसीस से
बन जायेगी बात।।
***
दिनांक-19-6-2021

*© -राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
संपादक-आकांक्षा" पत्रिका
जिलाध्यक्ष म.प्र. लेखक संघ टीकमगढ़
अध्यक्ष वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
नई चर्च के पीछे, शिवनगर कालोनी,
टीकमगढ़ (मप्र)-472001
मोबाइल- 9893520965
Email - ranalidhori@gmail.com
Blog-rajeevranalidhori.blogspot.com
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18- रामनंद पाठक, नैगुवां,टीकमगढ़ (मप्र)

सप्लीमेंट्री अप्रतियोगी-

अप्रतियोगी दोहा-

दद्दा पर दोहा
दद्दा सें दम दोगुनी,
देवें दुख में साथ।
छत छाया उनकी रहै,
मूंड पै होय हाथ।

-रामानन्द पाठक नन्द,नैगुवा

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                            दद्दा
                (बुंदेली दोहा संकलन) ई बुक
          संपादक - राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'

प्रकाशन-जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़
© कापीराइट-राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'

         ई_बुक प्रकाशन दिनांक 20-06-2021
            टीकमगढ़ (मप्र)भारत-472001
                 मोबाइल-9893520965

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2 टिप्‍पणियां:

dr.t.r.rawat ने कहा…

अप्रतिम संकलन। बहुत बहुत बधाई और आभार।

rajeev namdeo rana lidhori ने कहा…

धन्यवाद श्री रावत जी